लापरवाही : वीर कुंवर सिंह विवि के अधिकारियों की लेट-लतिफी की खुली पोल

आरा : विश्वविद्यालय में प्रभात खबर के ऑन स्पॉट अभियान के दौरान विश्वविद्यालय के अधिकारियों के लेट-लतीफी कार्य संस्कृति का पोल खोल कर सामने आ गया है. विश्वविद्यालय प्रशासन पर इन दिनों 12 बजे लेट नहीं और 3:40 के बाद भेंट नहीं की कहावत सटीक बैठती है, जब प्रभात खबर की टीम 11 बजे विश्वविद्यालय […]

आरा : विश्वविद्यालय में प्रभात खबर के ऑन स्पॉट अभियान के दौरान विश्वविद्यालय के अधिकारियों के लेट-लतीफी कार्य संस्कृति का पोल खोल कर सामने आ गया है. विश्वविद्यालय प्रशासन पर इन दिनों 12 बजे लेट नहीं और 3:40 के बाद भेंट नहीं की कहावत सटीक बैठती है, जब प्रभात खबर की टीम 11 बजे विश्वविद्यालय के शेरशाह प्रशासनिक भवन में दस्तक दी उस वक्त विश्वविद्यालय में सिर्फ कुलपति डॉ अजहर हुसैन और प्रतिकुलपति प्रो डॉ लीलाचंद साहा अपने कार्यालय कक्ष में बैठ कार्यो के निष्पादन में मसगूल थे, जबकि वित्तीय परामर्शी, वित्त पदाधिकारी, परीक्षा नियंत्रक, एनएसएस को-ऑडिनेटर, कुलसचिव, डीएस डब्ल्यू, कुलानुशासक, सहायक सूचना पदाधिकारी सहित दफ्तर के सभी कार्यालयों में 11 बजे तक या तो ताला लटके हुए थे या ताला खुलने के बाद भी अधिकारी की कुरसी खाली पड़े हुए थे.

ऐसे में हम यूं कहे कि आज भी विश्वविद्यालय के पदाधिकारियों का राजधानी मोह नहीं छूटा है. राजधानी मोह में जकड़े होने के कारण पदाधिकारियों के दफ्तर में 12 बजे के बाद आगमन होता है. ऐसे में विश्वविद्यालय के कार्यो को समय पर संपन्न कराने और एकेडमिक कैलेंडर लागू करने के विश्वविद्यालय के कुलपति और प्रतिकुलपति की प्राथमिकता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है. वहीं सासाराम, कैमूर, बक्सर और भोजपुर के विभिन्न अनुमंडलों से विश्वविद्यालय में अपने कार्य से आने वाले छात्र-छात्रओं और अभिभावकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है. वहीं विभिन्न तरह के सर्टिफिकेट निकालनेवाले छात्र और अभिभावकों को कई-कई दिनों तक इन अधिकारियों से मिलने को लेकर चक्कर लगानी पड़ती है.

परीक्षा विभाग व एनएसएस कार्यालय में 11 बजे तक लटका रहा ताला : वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के परीक्षा विभाग और एनएसएस कार्यालय में 11 बजे तक अधिकारियों और कर्मियों के इंतजार में ताला लटका रहा. परीक्षा नियंत्रक डॉ प्रसुंजय कुमार सिन्हा परीक्षा विभाग व एनएसएस को-ऑडिनेटर के प्रभार में हैं. इसके कारण श्री सिन्हा न तो परीक्षा नियंत्रक पद के कार्य कर पाते है और न ही एनएसएस को -ऑडिनेटर पद का दायित्वों का भी सही ढंग से निर्वह्न् नहीं कर पाते हैं. ऐसे में दोनों पद से जुड़े कार्य कई-कई दिनों और महीनों तक पड़े रह जाते हैं, जिसके कारण छात्र-छात्रओं और अभिभावकों को विश्वविद्यालय भाग दौड़ करने के साथ परेशानी उठानी पड़ती है, जिससे छात्रों और अभिभावकों में आक्रोश व्याप्त होने लगा है.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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