जिम्मेवार एचएम या कोई और !

हाल मिड डे मील का : आखिर कब रुकेगा बीमारी का सिलसिला आरा : विद्यालयों में इन दिनों मिड डे मील खाने से बच्चों के बीमार होने का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है. आखिर इसके लिए जिम्मेवार कौन है? मध्याह्न् भोजन खाने से बच्चे का बीमार होने के लिए क्या विद्यालय में […]

हाल मिड डे मील का : आखिर कब रुकेगा बीमारी का सिलसिला
आरा : विद्यालयों में इन दिनों मिड डे मील खाने से बच्चों के बीमार होने का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है. आखिर इसके लिए जिम्मेवार कौन है? मध्याह्न् भोजन खाने से बच्चे का बीमार होने के लिए क्या विद्यालय में खाना बनानेवाली रसोइये की लापरवाही या विद्यालय के प्रधानाध्यापक जिम्मेवार हैं.
यदि यकीन करें, तो इसके लिए मुख्य रूप से जिम्मेवार विद्यालयों में एसएफसी द्वारा आपूर्ति किया जानेवाला वर्षो पुराना चावल भी इसके कारण में शामिल है. यही नहीं विद्यालयों में एसएफसी से आपूर्ति होनेवाले चावल की क्वालिटी खाने योग्य चावल के मानक के अनुरूप नहीं रहती है.
यदि जिला प्रशासन और खास कर मिड डे मील से जुड़े शिक्षा विभाग के अधिकारी ने समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया, तो मिड डे मील खाने से बच्चों के बीमार होने का सिलसिला रुकने के बजाय और बढ़ता जायेगा. बावजूद इसके विद्यालयों के प्रधानाध्यापक और रसोइया कार्रवाई के शिकार बनते रहेंगे. सिर्फ ऐसा करने से मिड डे मील की गुणवत्ता में सुधार होने की बात बेमानी होगी.
विद्यालयों में सोमवार से लेकर शनिवार तक के लिए बच्चों के मध्याह्न् भोजन का अलग-अलग मीनू निर्धारित है. मेनू के अनुरूप बच्चों को खाना मिले इसको लेकर सरकार विद्यालयवार 6-8 वर्ग के प्रति बच्च 5.38 रुपये की राशि देती है. वहीं, एसएफसी से विद्यालयों को प्रति बच्च 150 ग्राम के हिसाब से चावल की आपूर्ति की जाती है.
इधर, विद्यालयों की लापरवाही और मीनू के अनुरूप बच्चों को खाना नहीं दिये जाने के कारण जिले में पिछले दिनों दो विद्यालयों में मिड डे मील खाने से बच्चों के बीमार होने का मामला सामने आया था, जिसमें 24 जून को कौरा विद्यालय में मिड डे मील खाने से बच्चे गंभीर रूप से बीमार हो गये थे. वहीं, 25 जून को उदवंतनगर प्रखंड के नवादा बेन में मिड डे मील खाने से बच्चे बीमार हो गये थे.
प्रति छात्र खाद्य सामग्री की मात्र है निर्धारित : मिड डे मील योजना के अंतर्गत विद्यालय को प्रति बच्च मेनू और मानक के अनुरूप खाना देने के लिए खाद्य पदार्थो की मात्र भी सरकार द्वारा निर्धारित कर दी गयी है. प्रति छात्र चावल की मात्र 150 ग्राम, दाल की मात्र 30 ग्राम तथा सरसों तेल की मात्र 7.5 ग्राम सहित हरी सब्जी और सोयाबीन की भी मात्र निर्धारित की गयी है. साथ ही प्रति बच्च विद्यालयों को 6-8 कक्षा के लिए 5.38 रुपये मिलते हैं.
मानक के अनुरूप खाना नहीं मिलने पर शिक्षक हैं जिम्मेवार : मिड डे मील में बच्चों को मीनू और मानक के अनुसार यदि खाना नहीं मिलता है, तो इसके लिए निश्चित तौर पर विद्यालय के प्रधानाध्यापक और रसोइया जिम्मेवार हैं.
इसको लेकर इन दिनों प्रशासन द्वारा जिले में विद्यालयवार मध्याह्न् भोजन की गुणवत्ता की जांच और कीचेन रूम की साफ-सफाई की जांच की जा रही है. ऐसे में यदि विद्यालय में कोई गड़बड़ी पायी जाती है, तो विद्यालय के शिक्षक कार्रवाई के पात्र हैं.
क्या कहते हैं डीएम
डीएम पंकज कुमार पाल ने कहा कि मिड डे मील में गुणवत्ता बहाल करने और साफ-सफाई के प्रति विद्यालय को सजग रहने को लेकर निर्देश दिया गया है. साथ ही एमडीएम प्रभारी को मिड डे मील योजना का लाभ बच्चों को मीनू के अनुसार मिल रहा है या नहीं इसकी नियमित रूप से दौरा कर जांच करने को कहा गया.

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