किसान विरोधी हैं केंद्र व राज्य सरकारें

दीपंकर और कुणाल ने माले नेताओं का जूस पिला कर तोड़वाया अनशन आरा : केंद्र सरकार और राज्य सरकार दोनों किसान विरोधी है. किसानों को धान खरीद का अब तक भुगतान नहीं किया गया. किसान परेशान है, लेकिन सरकार इनकी सुध लेनेवाली नहीं है. किसानों ने आंदोलन किया, तो धान की खरीद हुई, लेकिन आज […]

दीपंकर और कुणाल ने माले नेताओं का जूस पिला कर तोड़वाया अनशन
आरा : केंद्र सरकार और राज्य सरकार दोनों किसान विरोधी है. किसानों को धान खरीद का अब तक भुगतान नहीं किया गया. किसान परेशान है, लेकिन सरकार इनकी सुध लेनेवाली नहीं है.
किसानों ने आंदोलन किया, तो धान की खरीद हुई, लेकिन आज तक उनका पैसा नहीं मिला, जिससे सरकार का असली चेहरा उजागर हो गया. बकाये की सरकार को अब विदा करने का समय आ गया है. उक्त बातें भाकपा माले के महासचिव दीपंकर भट्टाचार्या ने कही.
उन्होंने कहा कि किसानों की समस्याओं को लेकर आठ दिनों से माले नेता अनशन पर बैठे हुए है, लेकिन इनसे मिलने कोई नहीं आया. दीपंकर भट्टाचार्या ने माले नेता सुदामा प्रसाद एवं राजू यादव को जूस पिला कर अनशन तोड़वाया. उन्होंने कहा कि पहले राजनीति में नारा लगता था, कमाने वाले खायेगा, लुटने वाला जायेगा. किसान मजदूरों का राज लाने की बात होती थी, आज विदेशी कंपनियों और अडानी-अंबानी को इस मुल्क को लुटने की छूट दे दी है. केंद्र सरकार भूमि अधिग्रहण अध्यादेश पारित करने पर तूली है, जबकि पूरे देश में किसान इसका विरोध कर रहे है. केंद्र हो या राज्य सरकार दोनों किसानों को तंगो-तबाह करने पर पड़ी हुई है.
उन्होंने केंद्र के मोदी सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि एक साल बीत गये, लेकिन अच्छे दिन नहीं आये. बड़बोली सरकार का भाषण बढ़ता जा रहा है. वहीं राज्य सरकार पर भी कटाक्ष करते हुए कहा कि नीतीश कुमार द्वारा भूमि अधिग्रहण अध्यादेश के विरोध पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि पहले, तो उन्हें जवाब देना होगा की बियार्डा के जरिये जिन जमीनों पर उनकी सरकार ने कब्जा किया, उनका क्या हुआ. पटना में भू-दान की जमीन पर शराब की फैक्टरी खोली जा रही है.
उन्होंने लोगों को आगाह करते हुए कहा कि 1857 में भोजपुर में इस्ट इंडिया कंपनी राज के खिलाफ तमाम जातियों के लोग एकजुट होकर जैसे लड़े थे, उसी तरह आज लड़ना होगा तभी जाकर गलत राजनीति करनेवाले लोगों को सबक सिखाया जायेगा. अखिल भारतीय किसान महासभा के राष्ट्रीय महासचिव राजाराम सिंह ने कहा कि बिहार की सरकार बटाईदारों को फसल बरबादी की क्षतिपूर्ति नहीं देने का आदेश कर रही है.
महाराष्ट्र में भाजपा के मुख्यमंत्री कह रहे है कि किसानों के आत्महत्या को नहीं रोका जा सकता है. आरा में अनशनकारियों के प्रति जिला प्रशासन और बिहार सरकार के रुख ने किसानों के प्रति उनके संवेदनहीन चेहरे को उजागर कर दिया है.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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