गंगा के जल स्तर में थोड़ी सी वृद्घि होने पर भी गांवों में आ जाती है बाढ़
शाहपुर : लगभग तीन दशक पूर्व शुरू हुआ बक्सर-कोईलवर तटबंध का निर्माण कार्य आज तक अधूरा है. प्रशासनिक एवं विभागीय लापरवाही से गंगा नदी में आनेवाली बाढ़ से 70 हजार की आबादी इससे तबाह होती है.
तबाही ऐसी जो प्रखंड क्षेत्र की लगभग आधी से ज्यादा आबादी को अपने आगोश में ले लेती है.बाढ़ के तांडव से बचाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर भले ही बांध को वर्षो पूर्व बनाया गया है पर बांध में एक स्लुइस गेट नहीं लगने से गंगा के जल स्तर में थोड़ी सी वृद्घि भी गांवों में भारी तबाही ला देती है.
कहां छोड़ा गया है स्लुइस गेट : शाहपुर प्रखंड की लालूडेरा पंचायत में मरचईया डेरा गांव के पास करीब एक किलोमीटर तक अधूरा तटबंध बक्सर- कोईलवर के पास गंगा का सुरक्षा तटबंध चेन संख्या 1600 से 2167 के बीच पड़ता है, जो सरकारी फाइलों के अनुसार स्लुइस गेट लगाने के नाम पर छोड़ा गया है, लेकिन, आज तकस्लुइस गेट नहीं लगा, न ही इसके रख -रखाव के लिए पर्याप्त संसाधन की व्यवस्था की गयी.
बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल सुस्त : बाढ़ नियंत्रण कार्यालय, बिहिया चौरस्ता लोगों की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सका. लिहाजा निचले इलाके के लोगों को बाढ़ की विभीषिका प्राय: ङोलनी पड़ती है. हाल के वर्षो 2003, 2011 एवं 2013 में आयी बाढ़ ने सरकारी स्तर पर बाढ़ नियंत्रण के किये गये कार्यो की कलई खोल दी. लेकिन, फिर भी इससे सरकार ने न कोई सबक सिखा और न ही बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल कार्यालय की नींद टूट सकी.
अधूरे तटबंध से जनजीवन पर असर : तटबंध अधूरा रहने के कारण तटबंध के भीतर गंगा की तलहट्टी
में बसे दामोदरपुर एवं लालूडेरा के
साथ -साथ दर्जन भर दियारा क्षेत्र के गांव इससे ग्रसित हैं. बरसात का मौसम आते ही इन क्षेत्रों के लोग बाढ़ के खतरों से दहशत में रहते हैं. बाढ़ से सबसे विकट समस्या किसानों एवं मजदूरों के समक्ष होती है. दियारा क्षेत्र की लगभग 70 प्रतिशत आबादी की मुख्य आजीविका भदई फसल की खेती पर निर्भर है, जो बाढ़ अक्सर ही उसे डूबो ले जाती है.
2013 में बाढ़ से मची थी तबाही : पिछले वर्ष नगर पंचायत सहित प्रखंड की 20 पंचायतों में पूर्ण तथा आंशिक रूप से असर पड़ा था. इस भीषण बाढ़ में लगभग आधा दर्जन लोगों की मौत हो गयी थी. हजारों एकड़ में लगी फसल बरबाद हो गयी थी.
