यातायात ठप रहने का सरकारी कार्यालयों पर दिखा असर
पांच घंटे तक पटना से टूट गया था संपर्क
कोइलवर/ बिहिया : भाकपा माले व आईसा कार्यकर्ताओं ने कोइलवर पुल पर, एससी-एसटी कर्मचारी संघ ने शहीद कपिल देव चौक, गीधा में भीम सेना समेत कई दल के लोग बंद समर्थकों के साथ दिखे. कोइलवर में सुबह आठ बजे से दोपहर एक बजे तक कोइलवर पुल को जाम कर यातायात को पूर्ण रूप से ठप कर दिया. इससे कई घंटों तक पटना से संपर्क टूट गया. इस मौके पर भाकपा माले के चंदेश्वर राम, विशाल ,भोला यादव, मुन्ना, राजदेव राम, सरोज यादव, वीरेंद्र राम, टुन्नू, रमेश राम, शिवशंकर राम, दिनेश सिंह, धरेंद्र राम, रवि, बिजेंद्र पांडेय, रामविलास, विश्वमोहन भास्कर समेत सैकड़ों महिला- पुरुष समर्थक मौजूद थे.
जाम के दौरान रेलवे पुल के ऊपर से गये लोग : कोइलवर में जाम लगते ही सैकड़ों बाइक पुल के अंदर व बाहर खड़े हो गये. कई लोग जाम कर रहे लोगों से गुहार लगाते दिखे लेकिन जाम समर्थक एससी/ एसटी नियम में बदलाव का हवाला देते हुए पूरे दिन यातायात ठप करने की बात कही. इसके बाद कई बाइक सवार ने जान को जोखिम में डाल सीढ़ी से कोइलवर रेलवे स्टेशन पर बाइक ले गये. फिर कोइलवर रेलवे पुल से होते हुई निकल पड़े.
बिहिया संवाददाता के अनुसार एससी-एसटी एक्ट में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के खिलाफ दलित संगठनों समेत राजद व भाकपा माले पार्टियों के लोग सोमवार की सुबह से ही बिहिया की सड़कों पर उतर गये और सड़क व रेल ट्रैक को जाम कर दिया. इस दौरान आक्रोशित बंद समर्थक अपने हाथों में विभिन्न नारे लिखे हुए तख्तियां व बैनर लिये हुए मोदी सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की व संशोधित कानून को वापस लेने की मांग की. बंद के कारण जहां रेल सेवा व सड़क मार्ग ठप रहने से यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा व घंटों यातायात सामान्य होने का इंतजार करना पड़ा.
सरकारी कार्यालयों पर दिखा यातायात ठप रहने का असर : प्रखंड मुख्यालय बिहिया स्थित विभिन्न सरकारी कार्यालयों पर सड़क व ट्रेन सेवा के ठप रहने का भारी असर दिखा. प्रखंड सह अंचल कार्यालय बिहिया, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, विभिन्न सरकारी बैंक, सरकारी व निजी विद्यालयों, बाल विकास परियोजना कार्यालय, नगर पंचायत कार्यालय समेत अन्य सभी संस्थानों में आवागमन कर अपनी ड्यूटी करनेवाले कर्मी व अधिकारी दोपहर तक नहीं पहुंच पाये, जिससे कार्यालयों के कार्यों पर भी असर पड़ा तथा वीरानगी छायी रही.
शटल के फंसने की वजह से कार्यालयों में नहीं पहुंच सके लोग : इस रूट की सबसे महत्वपूर्ण ट्रेन बक्सर-फतुहा पैसेंजर व आर-पटना पैसेंजर के फंसने की वजह से लोग कार्यालयों में नहीं पहुंच सके. पटना व बक्सर जाने वाले लोग बीच रास्ते में ही दोपहर बाद तक ट्रेनों की आवाजाही शुरू होने का इंतजार कर रहे थे. ट्रेनों की आवाजाही शुरू होने के बाद कई लोगों को अपनी यात्रा बीच में ही छोड़नी पड़ी.
15 रुपये पीस बिका सड़ा-गला समोसा : ट्रेनों में सफर करने वाले लोगों को उम्मीद थी कि उनकी ट्रेनें समय पर पहुंच जायेंगी, लेकिन बंद की वजह से जाम में ही ट्रेनें फंस गयीं. ऐसे में भूखे-प्यासे लोग सड़े-गले खाने को विवश थे. आमतौर पर पांच रुपये में बिकनेवाले समोसा की बिक्री सोमवार को 15 रुपये पीस के हिसाब से हो रही थी. कई ट्रेनों में पैंट्रीकार नहीं होने का अवैध वेंडरों ने खूब फायदा उठाया. 15 रुपये का बिकने वाला पानी 30 में बिक रहा था. उसकी भी कमी हो गयी, क्योंकि ट्रेनों के नहीं चलने से वेंडर भी एक स्टेशन से दूसरे स्टेशन तक नहीं जा पा रहे थे.
हंगामे व डर की वजह से होम सिग्नल पर ही खड़ी कर दी गयी पैसेंजर : आंदोलन की वजह से बक्सर से आ रही पैसेंजर ट्रेन को प्लेटफाॅर्म से पहले ही खड़ी कर दी गयी. इस पैसेंजर ट्रेन को आरा होम सिग्नल पर रोक दिया गया.
छोटे रेलवे स्टेशनों पर फंसी ट्रेनों में भूखे-प्यासे बिलबिलाते रहे लोग
ट्रेन से यात्रा करने वाले लोगों के लिए सोमवार दिन काला दिन साबित हुआ. ट्रेनों में फंसे लोग भूखे-प्यासे बिलबिलाते रहे. ट्रेन में इलाज कराने के लिए पटना जानेवाले लोग तड़पते रहे. आम यात्रियों की काफी आरजू-विनती करने के बाद भी ट्रेन की आवाजाही शुरू नहीं हो पायी. कई लोगों की तबीयत बिगड़ गयी. छोटे-छोटे बच्चे भूखे-प्यासे छटपटा रहे थे.
