आरा : नगर के कई खुले नाले हादसे को आमंत्रण दे रहे हैं. इससे लोगों को परेशानी हो रही है. स्मार्ट सिटी योजना को खुले नाले मुंह चिढ़ा रहे हैं. लक्ष्य की प्राप्ति के लिए इस तरह के नाले बाधक बने हुए हैं. जबकि स्मार्ट सिटी के लिए पहली शर्त स्वच्छता का है. स्मार्ट सिटी योजना के पहले वर्ष 2007 में प्रदेश सरकार द्वारा इसे निगम का दर्जा भी दिया जा चुका है, पर उन सबके बावजूद विकास की लकीर अभी इतनी छोटी है कि लोगों को स्मार्ट सिटी का सपना पूरा होते नहीं दिख रहा है. नगर में कई नाले ऐसे हैं जो मिट्टी के कटाव के कारण छोटी नहर का रूप ले चुके हैं. इससे हमेशा लोगों को खतरे का भय बना रहता है.
इतना ही नहीं कई बार तो लोग खुले नाले का शिकार भी हो चुके हैं. इसकी गहराई और चौड़ाई 10 से 12 फिट तक हो चुकी है. कई बार मोटरसाइकिल सवार इसमें गिर कर जख्मी हो चुके हैं. वहीं पानी जाम रहने से नारकीय स्थिति बनी रहती है. निगम बनने के 11 वर्ष बाद भी इसकी सुधी लेने वाला कोई नहीं है. मुख्य सड़क के किनारे खुला नाला होने के कारण यातायात भी काफी प्रभावित होता है. चंदवा के रहने वाले अजय कुमार दुबे ने कहा कि सरकार केवल सपने दिखाती है. धरातल पर काम नहीं करती है. स्मार्ट सिटी का दर्जा पा चुके नगर में खुला नाला यह समझ से परे है. निगम टैक्स तो लेता है,पर सुविधा नहीं देता है. चरखंभा गली के रहने वाले मनोज कुमार ने कहा कि कच्चे नाले की स्थिति ऐसी है की यह छोटी नहर का आकार ले चुकी है. इसमें जानवर भी गिर जाते हैं. तो उनको निकालने में काफी परेशानी होती है. कई बार बाइक सवार भी गिरकर घायल हो जाते हैं.
