इलाज कराने के लिए मरीज रहते हैं परेशान का हाल, है बेहाल

लापरवाही . सदर अस्पताल के शिशु विभाग में समय पर नहीं आते हैं डॉक्टर आरा : सरकार स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की बात लगातार कह रही है. इसके लिए केंद्र सरकार व बिहार सरकार द्वारा कई तरह की योजनाएं चलायी जा रही हैं ताकि मरीजों को किसी तरह की परेशानी नहीं हो सके. स्वास्थ्य जीवन […]

लापरवाही . सदर अस्पताल के शिशु विभाग में समय पर नहीं आते हैं डॉक्टर

आरा : सरकार स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की बात लगातार कह रही है. इसके लिए केंद्र सरकार व बिहार सरकार द्वारा कई तरह की योजनाएं चलायी जा रही हैं ताकि मरीजों को किसी तरह की परेशानी नहीं हो सके. स्वास्थ्य जीवन का अह्म हिस्सा है. शिशु देश के भविष्य माने जाते हैं, पर जब जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल सदर अस्पताल में शिशुओं के स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशीलता नहीं हो, तो सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति को समझा जा सकता है.
सरकार द्वारा लगातार बैठक कर स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के उपाय किये जा रहे हैं. वहीं अस्पतालों की निगरानी की बात की जा रही है, पर धरातल पर सब कुछ बेमानी साबित हो रहा है. सरकार का यह प्रयास औंधे मुंह गिर रहा है. प्रभात खबर की टीम जब सदर अस्पताल में ऑन द स्पॉट स्थिति को देखने के लिए पहुंची, तो शिशु वार्ड से चिकित्सक गायब मिले. वहीं लोगों ने बताया कि सदर अस्पताल में हमेशा यही स्थिति रहती है.
सुबह आठ बजे से शुरू होता है पहला शिफ्ट: सदर अस्पताल में डॉक्टरों का दिन का पहला शिफ्ट सुबह आठ बजे से शुरू होता है और 12 बजे दिन तक चलता है. प्रभात खबर की टीम जब 8.30 में शिशु वार्ड में पहुंची तो डॉक्टर अपने सीट पर नहीं थे. इतना ही नहीं, टीम द्वारा शिशु वार्ड का घूमकर स्थिति को देखा गया, तो वहां भी डॉक्टर नहीं मिले. वहीं कई स्वास्थ्यकर्मी भी गायब मिले. जबकि बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशीलता की काफी आवश्यकता है. बच्चे ही देश के भविष्य हैं. यदि उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं रहा, तो देश का भविष्य ठीक नहीं रहेगा.
शिशु विभाग में सुविधाओं का है अभाव
शिशु विभाग में बच्चों के स्वास्थ्य के लिए कई सुविधाओं का रहना आवश्यक है. फ्रीज, इंक्यूबेटर, वार्मर, फोटोथेरापी सहित एसएनसीयू की सुविधा होनी चाहिए, पर शिशु वार्ड में पांच में से दो इंक्यूबेटर खराब हैं. वहीं फ्रीज की स्थिति भी ठीक नहीं है. अभी पड़ रही ठंड से बचाव के लिए वार्मर का होना आवश्यक है, पर खराब पाये गये. वहीं फोटोथेरापी की व्यवस्था नहीं है.
नवजात शिशुओं के लिए बना है शिशु वार्ड
नवजात शिशुओं की मृत्यु दर रोकने के लिए सदर अस्पताल में शिशु वार्ड की व्यवस्था है, पर मरीजों की संख्या के अनुसार इंक्यूबेटर तथा अन्य सुविधाएं नहीं हैं. इससे बच्चा व जच्चा दोनों को काफी परेशानी होती है. वहीं शिशु वार्ड में बच्चों को सभी सुविधाएं नहीं दी जा रही हैं.
क्या कहते हैं मरीज
कर्मियों का व्यवहार ठीक नहीं रहता है. डॉक्टर प्राय: गायब रहते हैं. इससे काफी परेशानी होती है. शिकायत करने पर भी कार्रवाई नहीं होती है.
एनके सिंह, आरा
बच्चों को देश का भविष्य कहा जाता है. सरकार द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं के लिए कई तरह की सुविधाएं दी जा रही हैं. सदर अस्पताल में दवा नहीं मिलती है.
बेबी देवी, गुड़ी सरैया
दवा बाहर से खरीदनी पड़ती है. जो काफी महंगी होती है. गरीबों के लिए यह काफी कष्टदायक है. अस्पताल प्रबंधन को बच्चों के लिए दवा उपलब्ध करानी चाहिए.
देवंती देवी, बड़की सनदिया
कर्मियों का व्यवहार ठीक नहीं रहता है. बच्चों के परिजनों को ठहरने के लिए व्यवस्था नहीं है. मजबूरी में बाहर में ही सोना पड़ता है.
योगेंद्र यादव, जलपुरा मिल्की
क्या कहते हैं सिविल सर्जन
वार्ड में डॉक्टर रहते हैं. सरकार द्वारा जितनी सुविधाएं दी गयी हैं. वह बच्चों को दी जाती है. डॉक्टर की उपस्थिति की जांच कर कार्रवाई की जायेगी. वहीं खराब पड़े उपकरणों को भी ठीक किया जायेगा.
डॉ रासबिहारी सिंह, सिविल सर्जन

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