फरहंगपुर सत्संग में लंगर में शामिल हुए दो लाख श्रद्धालु
कोइलवर : कोइलवर के फरहंगपुर में आयोजित विहंगम योग के प्रणेता अनंत श्री सद्गुरु सदाफल देव जी महाराज की 130 वीं जन्म जयंती के पावन अवसर चल रहे त्रिदिवसीय विहंगम योग सत्संग समारोह का हवन के पूर्णाहुति के बाद समापन हुआ. इस दौरान लाखों महिला-पुरुष, युवक-युवतियां, बच्चे सहित श्रद्धालुओं की भीड़ एकत्रित थी. त्रि-दिवसीय यज्ञ […]
कोइलवर : कोइलवर के फरहंगपुर में आयोजित विहंगम योग के प्रणेता अनंत श्री सद्गुरु सदाफल देव जी महाराज की 130 वीं जन्म जयंती के पावन अवसर चल रहे त्रिदिवसीय विहंगम योग सत्संग समारोह का हवन के पूर्णाहुति के बाद समापन हुआ. इस दौरान लाखों महिला-पुरुष, युवक-युवतियां, बच्चे सहित श्रद्धालुओं की भीड़ एकत्रित थी. त्रि-दिवसीय यज्ञ के समापन संध्या से पूर्व 5101 हवन कुंड के समक्ष श्रद्धालुओं व अनुयायियों ने एक साथ हवन किया. इससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया.
हवन के उपरांत विशाल भंडारे का आयोजन किया गया. यज्ञ की पूर्णाहुति के उपरांत लगभग दो लाख श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया. इधर यज्ञ को लेकर देश- प्रदेश से आये अनुयायी व जिला प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था संभाल रखा था. देर शाम तक कार्यक्रमों का दौर चलता रहा. श्रद्धालुओं की भीड़ से पूरा पंडाल भरा हुआ था.
इधर गुरुवार की देर रात तक प्रवचन का दौर चलता रहा. धर्म ,अर्थ, काम और मोक्ष जैसे चार पुरुषार्थ ही भारतीय संस्कृति का आधार है, जिसकी सिद्धि मानव जीवन का परम उद्देश्य है. धर्मपूर्वक ही अर्थ और काम की प्राप्ति श्रेयस्कर है. अर्थ और काम की प्रासंगिकता और प्रयोजन मर्यादित है. मुख्य पुरुषार्थ तो मोक्ष है. किंतु उसका आरंभ भी धर्म से ही होता है. उक्त बातें विहंगम योग के संत प्रवर श्री विज्ञान देव जी महाराज ने फरहंगपुर में आयोजित विहंगम योग के प्रणेता अनंत श्री सद्गुरु सदाफल देव जी महाराज की 130 वीं जन्म जयंती के पावन अवसर चल रहे त्रिदिवसीय विहंगम योग सत्संग समारोह में कहीं.
उन्होंने कहा कि भारत की आत्मा का नाम ही अध्यात्म है. आध्यात्मिक महापुरुषों की बदौलत ही भारत विश्व गुरु रहा है, विश्वगुरु है और विश्व गुरु रहेगा. विश्व में शांति को लेकर महाराज जी ने कहा कि मानव के मन में अशांति है और जब तक यह अशांति है. विहंगम योग की ध्यानस्थ अवस्था का अध्ययन 192 विद्युदाग्रों से किया गया जो आज तक किसी भी योग प्रणाली पर किया गया पहला प्रयोग है, जिसमें अल्फा तरंगों की बढ़ोतरी होती है. मस्तिष्क विश्रामपूर्ण अवस्था में चला जाता है. विहंगम योग की प्रारंभिक साधना से शांतिमय सचेत अवस्था की प्राप्ति होती है.