सहार : जिले में स्कूलों की स्थिति काफी दयनीय है. हर जगह कुव्यवस्था का आलम है. वहीं संसाधनों की कमी से विद्यालय जूझ रहे हैं. वर्षों से सरकार शिक्षा के स्तर में सुधार करने के प्रयास का दावा कर रही है पर अब भी धरातल पर सुधार नहीं दिखायी दे रहा है. इससे छात्रों के भविष्य पर काफी बुरा प्रभाव पड़ रहा है. संसाधनविहीन विद्यालय शिक्षा के उद्देश्य को पूरा नहीं कर पा रहे हैं. सरकार ने प्राथमिक शिक्षा को अनिवार्य बनाया है.
एक ही कमरे में चलती हैं चार कक्षाएं
सहार : जिले में स्कूलों की स्थिति काफी दयनीय है. हर जगह कुव्यवस्था का आलम है. वहीं संसाधनों की कमी से विद्यालय जूझ रहे हैं. वर्षों से सरकार शिक्षा के स्तर में सुधार करने के प्रयास का दावा कर रही है पर अब भी धरातल पर सुधार नहीं दिखायी दे रहा है. इससे छात्रों के […]

वहीं विद्यालयों में छात्रों की शत-प्रतिशत उपस्थिति के लिए शिक्षकों को आदेश दिया है. फिर भी जिले में प्राथमिक शिक्षा की दर काफी नीचे है. अब भी अधिकतर बच्चे विद्यालय का मुंह नहीं देख रहे हैं. इस कारण सरकार के प्रयास पर ग्रहण लगा हुआ है. शिक्षा से छल अभियान के तहत प्रभात खबर की टीम जब उत्क्रमित मध्य विद्यालय, कुशवाहा टोला, बरूही में पहुंची तो वहां सरकार के प्रयास की धज्जी उड़ती दिखायी दी. विद्यालय कई संसाधनों के अभाव से जूझ रहा है. सरकार के स्वच्छता अभियान की धज्जी उड़ायी जा रही है. वहीं विद्यालय भवन में कमरों की कमी से छात्रों की पढ़ाई पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है.
वहीं छात्रों को प्रोत्साहित करने के लिए दी जानेवाली पोशाक राशि तथा छात्रवृत्ति की राशि भी काफी कम दी गयी है. सभी छात्र-छात्राओं को इसकी राशि नहीं मिल पायी है. वहीं मध्याह्न भोजन योजना में भी गड़बड़ी की जाती है.
एक कमरे में होती है चार कक्षाओं की पढ़ाई : उत्क्रमित मध्य विद्यालय का भवन पांच कमरों का है. उसमें एक कमरा कार्यालय के रूप में उपयोग किया जाता है. वहीं एक कमरे में तालाबंद रहता है. 400 छात्र-छात्राओं की पढ़ाई महज तीन कमरों में की जाती है. एक कमरे में ही कक्षा पांच, छह, सात व आठ की पढ़ाई की जाती है. वहीं दूसरे कमरे में तीसरे व चौथे कक्षा की पढ़ाई तथा तीसरे कमरे में पहली और दूसरी कक्षा की पढ़ाई की जाती है. इससे छात्र-छात्राओं की पढ़ाई पर बुरा असर पड़ रहा है. एक कमरे में चार वर्गों की पढ़ाई कैसे होती है. इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है.
शौचालय का उपयोग नहीं करते हैं छात्र-छात्राएं : विद्यालय में दो शौचालयों का निर्माण कराया गया है पर एक शौचालय में हमेशा ताला बंद रहता है. वहीं दूसरे शौचालय में गंदगी भरी रहती है. इस कारण छात्र-छात्राएं शौचालय का उपयोग नहीं करते हैं. इससे सरकार के स्वच्छ भारत मिशन योजना पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है. शौचालय के निर्माण का उद्देश्य पूरा नहीं हो पा रहा है. जबकि इसके निर्माण पर काफी राशि खर्च की गयी है.
400 छात्र-छात्राओं पर हैं सात शिक्षक : विद्यालय में 400 छात्र-छात्राओं का नामांकन है. इनको पढ़ाने के लिए महज सात शिक्षक ही पदस्थापित हैं, जो सरकार के द्वारा निर्धारित मानक से कम हैं. सरकारी नियम के अनुसार छात्र-शिक्षक का अनुपात 40 : 1 है.
इसके अनुसार विद्यालय में 10 शिक्षकों की आवश्यकता है. पर शिक्षा विभाग की लापरवाही का आलम यह है कि किसी विद्यालय में मानक से अधिक शिक्षक हैं, तो किसी विद्यालय में मानक से कम हैं. इस कारण पठन-पाठन पर काफी बुरा प्रभाव पड़ रहा है.
क्या कहते हैं एचएम
विद्यालय में शिक्षकों की कमी है. वहीं कमरों की भी कमी है. इस कारण पढ़ाई में व्यवधान उत्पन्न होता है. फिर भी प्रयास किया जाता है कि छात्रों को अच्छी पढ़ाई दी जाये.
विजय कुमार सिंह, प्रधानाध्यापक