bhagalpur news. 350 करोड़ से बन रही हाइवे किनारे न नाला और न स्लोपिंग, घर से निकलते ही गिर रहे लोग

जीरो माइल से रानी तालाब जाने में बढ़ी परेशानी.

जीरोमाइल टू रानी तालाब: एनएच विभाग की लापरवाही से गलियां बंद, मुश्किल में लोग शहर में जीरोमाइल से रानीतालाब तक बन रही एनएच-80 सड़क लोगों के लिए परेशानी का सबब बन गयी है. हाईवे से सटी संपर्क गलियों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. पहले नाले के लिए गड्ढा खोदकर छोड़ दिया गया, अब पीसीसी निर्माण के बाद स्लोपिंग नहीं देने से स्थिति और भी बदतर हो गयी है. हालात ये हैं कि लोग न तो बाइक निकाल पा रहे हैं, न पैदल ही सुरक्षित चल पा रहे हैं. कछुआ मोड़ के रवींद्र कुमार ने बताया कि कुछ लोगों की मदद से बाइक लेकर जैसे-तैसे चढ़े, लेकिन अधूरा पीसीसी कार्य और स्लोपिंग नहीं रहने पर फिसलकर गिर पड़े और चोटिल हो गये. उन्होंने कहा कि यह सिर्फ उनके साथ नहीं, बल्कि जो भी प्रयास कर रहा है, वह गिर रहा है. इस संबंध में एनएच कार्यालय, जूनियर ठेका एजेंसी और इंजीनियर से शिकायत की गयी, लेकिन किसी ने गंभीरता से नहीं लिया. उनका कहना है कि लोगों का ऑफिस और बाजार जाना मुश्किल हो गया है और ऐसा लग रहा है मानों वे घरों में कैद होकर रह गये हैं. बिना नाला, बिना स्लोपिंग, कीचड़ और जाम ने बढ़ाई मुश्किलें सड़क पर कीचड़, जलजमाव और अधूरे कार्यों के कारण पूरे रास्ते में जाम की स्थिति बनी रहती है. एंबुलेंस और स्कूली बच्चों की गाड़ियां अक्सर इस जाम में फंस जाती हैं, जिससे आपात स्थिति में परेशानी और बढ़ जाती है. इसके बावजूद संबंधित अधिकारी आंख मूंदे हुए हैं. एनएच-80 पर जीरोमाइल से मिर्जाचौकी तक 350 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से सड़क निर्माण हो रहा है, लेकिन रानीतालाब के पास सड़क का हिस्सा सबसे अंत में शुरू हुआ और महीनों से बेहद धीमी गति से काम चल रहा है. सबसे गंभीर बात यह है कि इस हिस्से में बिना नाला बनाये ही सड़क बनायी जा रही है, जिससे जगह-जगह पानी जमा हो रहा है और सड़क फिसलन भरी व दुर्घटना संभावित बन गयी है. स्थानीय लोगों ने इस लापरवाही पर तुरंत कार्रवाई की मांग की है और जिला प्रशासन से ध्यान देने की अपील की है. बॉक्स मैटर 9 महीने के टाइम एक्सटेंशन अब बचा सिर्फ तीन महीना, काम अधूरा हाइवे को बनाकर तैयार करने की दो साल की अवधि छह माह पूर्व की खत्म हो गयी है. बावजूद, इसके यह सड़क अबतक नहीं बन सकी है. काम अधूरा है. कार्य प्रगति धीमी है. दिलचस्प बात यह है कि एजेंसी को 9 माह का टाइम एक्सटेंशन मिला है, जिसमें सिर्फ 3 माह शेष बचा है. कार्य की रफ्तार को देख कर नहीं लगता है कि अगले तीन महीने में यह पूरा हो सकेगा. वहीं, इस कार्य की मॉनीटरिंग भी नहीं हो रही है. इस संबंध में अधीक्षण अभियंता का कहना है कि यह तो कार्यपालक अभियंता बता सकता है. उनसे ही बात करना सही रहेगा.

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By KALI KINKER MISHRA

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