शुभंकर, सुलतानगंज
वर्षों से लंबित सुलतानगंज को अनुमंडल का दर्जा दिलाने की मांग एक बार फिर बिहार विधानसभा में मजबूती से उठी है. जदयू विधायक प्रो ललित नारायण मंडल ने गुरुवार को सदन में सुलतानगंज को अनुमंडल घोषित करने का मुद्दा उठाते हुए क्षेत्र की प्रशासनिक, शैक्षणिक और विकास संबंधी समस्याओं को प्रमुखता से रखा. विधानसभा में यह मांग उठने के बाद सुलतानगंज के लोगों में नई उम्मीद जगी है.
अनुमंडल नहीं बनने से रोजाना झेलनी पड़ रही परेशानीविधायक ने कहा कि सुलतानगंज आज भी अनुमंडल का दर्जा नहीं मिलने के कारण प्रशासनिक रूप से पिछड़ा हुआ है. आम लोगों को न्यायालय, राजस्व, भूमि विवाद, प्रमाण पत्र और अन्य सरकारी कार्यों के लिए भागलपुर का चक्कर लगाना पड़ता है. इससे समय और धन दोनों की बर्बादी होती है. यदि सुलतानगंज को अनुमंडल बनाया जाता है, तो आमजन को स्थानीय स्तर पर ही अधिकांश सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी. सरकार से अनुरोध किया है.
धार्मिक-पर्यटन महत्व के बावजूद उपेक्षा
विधायक ने कहा कि सुलतानगंज अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त अजगैबीनाथ धाम का प्रवेश द्वार है. श्रावणी मेला सहित वर्षभर लाखों श्रद्धालु यहां आते हैं. बावजूद इसके प्रशासनिक ढांचे का विस्तार नहीं हो पाया है. अनुमंडल का दर्जा मिलने से अजगैबीनाथ धाम और पूरे क्षेत्र के विकास को नई गति मिलेगी. इसके लिए सरकार से पहल की मांग की गयी है. नए प्रखंड बनाने की मांगउन्होंने सदन में रतनगंज, करहरिया और अकबरनगर को नए प्रखंड के रूप में गठित करने की मांग सरकार के समक्ष रखी.कहा कि क्षेत्र का विस्तार और जनसंख्या बढ़ने के बावजूद प्रशासनिक इकाइयों का पुनर्गठन नहीं हुआ है. नए प्रखंड बनने से योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन और प्रशासन की पकड़ मजबूत होगी.
संघर्ष समिति ने जताया संतोष
सुलतानगंज विकास संघर्ष समिति के संयोजक वीरेंद्र कुमार यादव ने विधायक के प्रयास का स्वागत किया. कहा कि अनुमंडल को लेकर वर्षों से आंदोलन चल रहा है और कई बार धरना-प्रदर्शन भी किए गए हैं. अब विधानसभा में मुद्दा उठने से उम्मीद बढ़ी है कि सरकार इस दिशा में ठोस फैसला लेगी. मुरारका कॉलेज में पीजी पढ़ाई की जरूरतशिक्षा के क्षेत्र में विधायक ने मुरारका कॉलेज, सुलतानगंज में स्नातकोत्तर (पीजी) की पढ़ाई शुरू कराने की मांग शिक्षा मंत्री से की है. कहा कि कॉलेज में कला, विज्ञान और वाणिज्य संकाय में ऑनर्स स्तर तक पढ़ाई होती है, लेकिन पीजी की सुविधा नहीं है. उच्च शिक्षा के लिए विद्यार्थियों को दूर जाना पड़ता है, जो आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए मुश्किल साबित होता है. पीजी की पढ़ाई शुरू होने से स्थानीय छात्रों को बड़ा लाभ मिलेगा.
