Vikramshila Setu Update: भागलपुर से ललित किशोर मिश्रा की रिपोर्ट. विक्रमशिला सेतु संकट के समाधान की कवायद के बीच मंगलवार को एक अच्छी खबर सामने आयी. विक्रमशिला सेतु के टूटे हुए 34 मीटर के भाग पर मंगलवार को बेली ब्रिज के स्ट्रक्चर को सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया गया.
पिछले एक सप्ताह से सीमा सड़क संगठन यानी बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन (बीआरओ) की टीम द्वारा इस दिशा में कड़ी मेहनत की जा रही थी. टीम की ओर से सेतु के टूटे हुए हिस्से पर लोहा का बेली ब्रिज लगाने को लेकर शुरू कार्य का मंगलवार को सफल परिक्षण हो गया. जिलाधिकारी डॉ नवल किशोर चौधरी ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि ब्रेली ब्रिज को पूरी सफलता से लॉन्च कर दिया गया है. इस सफलता से उम्मीद जगी है कि शीघ्र ही इस बड़े संकट का समाधान संभव हो पायेगा.
बीआरओ ने तैयार की अस्थायी वैकल्पिक मार्ग की योजना
उल्लेखनीय है कि बीते तीन मई की देर रात भागलपुर को कोसी, सीमांचल समेत नेपाल और पश्चिम बंगाल से जोड़ने वाले विक्रमशिला सेतु का स्लैब गंगा में समा गया था. इसके बाद आवाजाही पूरी तरह ठप हो गयी है. इस गंभीर संकट को ध्यान में रखते हुए चार मई को मुख्यमंत्री ने रक्षा मंत्री से बात कर सेना की मदद मांगी. 05 मई को बीआरओ की टीम भागलपुर पहुंची और घटनास्थल पर असेसमेंट शुरू किया. बीआरओ ने क्षतिग्रस्त हिस्से से हटकर अस्थायी वैकल्पिक मार्ग बनाने की योजना तैयार की.
प्रस्ताव के अनुसार, टूटे हिस्से से करीब सात मीटर पीछे सेतु पर बेली ब्रिज का निर्माण की योजना बनी, जिससे सीमित आवागमन शुरू कराया जा सके. बीआरओ की टीम ने अभियंताओं के साथ सेतु के ऊपरी और अंदरूनी हिस्सों का गहन निरीक्षण किया. भागलपुर और नवगछिया दोनों छोर पर मशीनों से सतह की जांच की गयी. जांच में यह बात सामने आयी कि क्षतिग्रस्त हिस्से से कुछ दूरी पर पुल की संरचना अपेक्षाकृत मजबूत है. इसी आधार पर बेली ब्रिज का डिजाइन तैयार किया गया. जांच के दौरान यह भी पाया गया कि स्लैब के अंदरूनी हिस्से की संरचना अभी मजबूत स्थिति में है.
क्या होता है बेली ब्रिज
बेली ब्रिज एक पोर्टेबल और पूर्वनिर्मित स्टील ट्रस पुल होता है, जिसे बेहद कम समय में जोड़कर तैयार किया जा सकता है. इसका इस्तेमाल आमतौर पर आपदा, युद्ध या किसी पुल के क्षतिग्रस्त होने की स्थिति में वैकल्पिक संपर्क बहाल करने के लिए किया जाता है. इस पुल का आविष्कार द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश इंजीनियर डोनाल्ड बेली ने किया था. खास बात यह है कि इसे छोटे-छोटे हिस्सों में तैयार कर आसानी से एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जा सकता है और मौके पर बिना भारी मशीनों के भी असेंबल किया जा सकता है. बेली ब्रिज हल्का होने के बावजूद मजबूत होता है और भारी वाहनों का भार सहने में सक्षम होता है.
यही वजह है कि सेना और बीआरओ जैसी एजेंसियां दुर्गम इलाकों या आपदा के समय इसका तेजी से इस्तेमाल करती हैं. भारत में बाढ़, भूस्खलन या पुल क्षतिग्रस्त होने की स्थिति में कई जगहों पर बेली ब्रिज बनाकर अस्थायी तौर पर आवागमन बहाल किया जाता है. जरूरत के अनुसार इसे कुछ समय के लिए या लंबे समय तक भी उपयोग में रखा जा सकता है.
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