तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (टीएमबीयू) प्रशासन ने नवस्थापित डिग्री कॉलेजों में संविदा के आधार पर नियुक्त होने वाले सहायक प्राध्यापकों के योगदान को लेकर एक अहम और राहत भरा दिशा-निर्देश जारी किया है. राजभवन (लोकभवन) से प्राप्त पत्र के आलोक में विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी नवनियुक्त संविदा सहायक प्राध्यापक के पास तत्काल पीएचडी से संबंधित कागजात उपलब्ध नहीं हैं, तो इस आधार पर उनका योगदान किसी भी सूरत में नहीं रोका जाएगा. इस नये आदेश से राज्य के विभिन्न डिग्री कॉलेजों में अपनी सेवाएं देने जा रहे दर्जनों नवयुवा प्राध्यापकों और शोधार्थियों को बड़ी सहूलियत मिलने की उम्मीद है.
कागजात नहीं होने पर अंडरटेकिंग लेकर दिया जाएगा समय
विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रोफेसर रामाशीष पूर्वे ने राज्यपाल सचिवालय के पत्र का हवाला देते हुए सभी नवस्थापित डिग्री कॉलेजों के प्रधानाचार्यों को इस संबंध में सख्त और स्पष्ट निर्देश जारी किये हैं. आधिकारिक पत्र में कहा गया है कि दिशा-निर्देशों के अनुपालन में यदि किसी अभ्यर्थी द्वारा योगदान के समय आवश्यक कागजात प्रस्तुत नहीं किये जाते हैं, तो उसे वांछित दस्तावेज जमा करने के लिए उचित समय प्रदान किया जाए. संबंधित अभ्यर्थी से इस संबंध में एक औपचारिक अंडरटेकिंग (वचनबद्धता) प्राप्त करने के बाद ही उसका योगदान तत्काल प्रभाव से स्वीकार किया जाना चाहिए. केवल कागजात की तत्काल अनुपलब्धता को आधार बनाकर किसी भी अभ्यर्थी को वापस लौटाना या संविदा सहायक प्राध्यापक के रूप में उसके योगदान को अस्वीकार करना अनुचित माना जाएगा.
फेलोशिप और रेजिडेंसी पूरी कर चुके शोधार्थियों के लिए स्पष्ट नियम
लोकभवन द्वारा टीएमबीयू सहित सूबे के सभी विश्वविद्यालयों को भेजे गए इस पत्र में पीएचडी कर रहे अभ्यर्थियों को लेकर भी विस्तृत और स्पष्ट प्रावधान किये गए हैं. दिशा-निर्देशों में बताया गया है कि जिन पंजीकृत पीएचडी शोधार्थियों को वर्तमान में फेलोशिप मिल रही है, उनके लिए संबंधित नियमों के अनुसार विशेष विकल्प उपलब्ध रहेंगे. ऐसे शोधार्थी निर्धारित प्रक्रिया के तहत संविदा सहायक प्राध्यापक के पद पर अपना योगदान दे सकते हैं और साथ ही नियमों का पालन करते हुए अपनी पीएचडी भी जारी रख सकते हैं. इसके अतिरिक्त, जिन पंजीकृत शोधार्थियों की फेलोशिप की अवधि पूरी हो चुकी है या जिनकी निर्धारित रेजिडेंसी अवधि समाप्त हो गई है, उन्हें भी पद पर योगदान करने की पूरी अनुमति दी गई है. ऐसे सभी अभ्यर्थियों को अपनी पीएचडी की शेष औपचारिकताओं को संबंधित विश्वविद्यालय के नियमों के अनुसार पूरा करना होगा.
पर्यवेक्षक और विभागाध्यक्ष के प्रमाणन पर मिलेगी रेजिडेंसी से छूट
ऐसे शोधार्थियों के मामले में, जिनके पीएचडी नियमों में किसी निश्चित रेजिडेंसी अवधि का स्पष्ट प्रावधान नहीं है, उन्हें भी आवश्यक शर्तों के अनुपालन के साथ योगदान की अनुमति दी जाएगी. इसके लिए शोधार्थी को अपने शोध पर्यवेक्षक (गाइड) और संबंधित विभागाध्यक्ष की ओर से प्रमाणित एक आधिकारिक घोषणा पत्र जमा करना होगा. इस घोषणा पत्र में यह प्रमाणित होना चाहिए कि शोधार्थी ने अपने शोध से जुड़ा आवश्यक प्रयोगशाला कार्य, फील्ड वर्क या डेटा संग्रह का पर्याप्त और महत्वपूर्ण हिस्सा पूरा कर लिया है. इस प्रक्रिया के बाद शोध केंद्र में उसकी लगातार भौतिक उपस्थिति अनिवार्य नहीं रह जाएगी. अभ्यर्थी अपना शेष शोध कार्य उपलब्ध समयावधि के भीतर पूरा कर सकेगा, बशर्ते पूरी पीएचडी निर्धारित अधिकतम समयावधि के भीतर ही संपन्न कर ली जाए. उच्च शिक्षा विभाग के इस दूरदर्शी कदम से न केवल योग्य शिक्षकों की कमी दूर होगी, बल्कि शोधार्थियों को रोजगार के साथ-साथ अपना शोध पूरा करने का एक सुरक्षित और तनावमुक्त वातावरण भी मिल सकेगा.
