-पिछले दो साल से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कभी बांग्लादेश, तो कभी पाकिस्तान, तो अभी इरान-बेनुजुएला, एक ओर जहां भागलपुर से अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा देने के लिए कतरनी, जर्दालू आदि को जीआई टैग देकर ब्रांडिंग की जा रही है, वहीं दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय उथल-पुथल होने पर लगातार पांच साल से जिले के सिल्क का करोड़ों का कारोबार प्रभावित हो रहा है. पहले पाकिस्तान – बांग्लादेश अब इरान, बेनेजुएला, अमेरिका, रूस आदि देशों में तनावपूर्ण स्थिति के कारण बुनकरों को मिले ऑर्डर भी कैंसिल हो रहे हैं. कुल मिलाकर 25 करोड़ का कारोबार प्रभावित है.
अमेरिका, इरान, बेनेजुएला व बांग्लादेश के ताजा घटनाक्रम पर सिल्क सिटी के बुनकर सशंकित हैं. बांग्लादेश में लिनेन साड़ी की डिमांड जरूर होती है. नाथनगर के रहने वाले बिहार राज्य बुनकर कल्याण समिति सदस्य अलीम अंसारी ने बताया कि बांग्लादेश से सिल्क सिटी का सीधा कारोबार होता है. दरअसल, बांग्लादेश में कपड़े पर डिजाइन की टेक्नोलॉजी अधिक विकसित है. ऐसे में यहां के तसर व तसर कटिया कपड़े की डिजाइन बांग्लादेश में होती है. इसके बाद अन्य देशों में निर्यात होता है. इसके अलावा भागलपुरी सिल्क के लेडीज व जेंट्स के कुर्ता के कपड़े की भी डिमांड है. पूरे माह में चार से पांच करोड़ तक का कारोबार होता है. वहीं इरान व बेनेजुएला में स्कार्फ, दुपट्टा आदि की डिमांड होती है.
बुनकर संघर्ष समिति के महासचिव अशफाक अंसारी ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय उथल-पुथल के कारण यहां के बुनकरों को रोजगार मिलना बंद हो गया है. फिर से बुनकरों का पलायन शुरू हो गया है. नरगा के युवा सिल्क कारोबारी तहसीन सवाब ने बताया कि भागलपुर में बने स्कार्फ की मांग बांग्लादेश से अधिक होती है. अभी ऐसे ही ठंड में ऐसे ही बुनकरों का काम ठप पड़ा हुआ है. बुनकर सिकंदर आजम ने बताया कि भागलपुर से इरान, बांग्लादेश आदि का कारोबार सीधा जुड़ा हुआ है. चाहे यहां का दुपट्टा हो या मटका, बांग्लादेश में काफी डिमांड रहती है. बांग्लादेशी लुंगी की भी भागलपुर के लोगों में काफी डिमांड होती है. 6000 रुपये तक की लुंगी आती है.
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