bhagalpur news. काफी सरल है पेनलेस विधि का लेजर ऑपरेशन, चश्मे से मिलेगी मुक्ति

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, भागलपुर शाखा की ओर से आइएमए सभागार में एनुअल कॉन्फ्रेंस 2026 का आयोजन हुआ.

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, भागलपुर शाखा की ओर से आइएमए सभागार में एनुअल कॉन्फ्रेंस 2026 का आयोजन हुआ. इसके साइंटिफिक सत्र में देश भर के वरीय चिकित्सकों ने शिरकत कर जटिल बीमारियों के समाधान वक्तव्य प्रस्तुत किया. कोलकाता से नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ हिमानी चटर्जी, जमशेदपुर से कैंसर विशेषज्ञ डॉ अमित कुमार, पटना से मूत्र रोग विशेषज्ञ डॉ प्रवीण कुमार सिन्हा, कोलकाता नारायण सुपर स्पेशियलिटी के गेस्ट्रोइंटस्टाइनल सर्जन डॉ पंकज सोनार एवं भागलपुर की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ इमराना रहमान ने अलग-अलग बीमारी के लक्षण व समाधान पर चर्चा की. मंच का संचालन डॉ आशीष सिन्हा ने किया. अतिथियों का स्वागत सचिव डॉ आरपी जायसवाल व डॉ अजय सिंह ने किया. आइएमए की अध्यक्ष डॉ रेखा झा, डाॅ कुमार रत्नेश, डॉ वर्षा सिन्हा, डॉ राजन सिन्हा आदि उपस्थित थे. लेसिक व स्माइल विषय पर चर्चा कोलकाता से नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ हिमानी चटर्जी ने लेसिक व स्माइल विषय के क्रम में चश्मा हटाने की विधि के अवेयरनेस पर चर्चा की. उन्होंने कहा कि पेनलेस विधि लेजर ऑपरेशन काफी सरल है. ऑपरेशन के बाद चश्मे की जरूरत नहीं होती है. पुराने टेक्निक से ड्रायनेस की समस्या अधिक थी. अभी लेसिक-लेजर के नये टेक्निक आये हैं, जिसमें ड्रायनेस की कम समस्या है. उम्र के साथ खासकर 40 साल से अधिक उम्र के लोगों में नजदीक दृष्टि वाला प्रोब्लम आया है. अब लेजर से इसका भी ट्रिटमेंट संभव है. इसमें भी चश्मा की जरूरत नहीं है. इसे प्रेसबायऑन्ड कहते हैं. लाइफ स्टाइल से पेशाब नहीं रुकने की बीमारी पर पा सकते हैं नियंत्रण : डॉ प्रवीण कुमार पटना से आये मूत्र रोग विशेषज्ञ डॉ प्रवीण कुमार सिन्हा ने अधिक उम्र में पेशाब नहीं रुकने की बीमारी के समाधान से अवगत कराया. उन्होंने कहा कि यूरिनरी लिकेज हो जाना बड़ी समस्या है. प्रोस्टेट बढ़ जाने के कारण फिमेल में आफ्टर प्रेग्नेंसी व डिलिवरी के कारण यूरिन को कंट्रोल रखने की क्षमता कमजोर पड़ जाती है. कई बार शुगर व ब्रेन स्ट्रोक भी इस कारण से हो जाता है. स्पाइन में इंज्यूरी, नर्व में प्रोब्लम, बच्चों का टॉयलेट ट्रेनिंग प्रोपर नहीं होना भी कारण है. दवा से इसे कंट्रोल किया जा सकता है. इससे पहले व्यायाम करके, फिजिकल ट्रेनिंग, लाइफ स्टाइल मोडिफिकेशन, मोटापा कम रखने से नियंत्रित किया जा सकता है. आखिरी में सर्जरी कराने से पेशाब के रास्ते को मजबूत किया जाता है. अत्यधिक मद्यपान से होती है क्रोनिक पेंक्रियाटाइटिस : डॉ पंकज सोनार कोलकाता नारायणा सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के गेस्ट्रोइंटस्टाइनल सर्जन डॉ पंकज कुमार सोनार ने क्रोनिक पेंक्रियाटाइटिस बीमारी पर चर्चा की. उन्होंने कहा कि यह बीमारी आमतौर पर अत्यधिक मद्यपान करने से होती है. इसमें पेट दर्द होता है. रोजाना के जीवन में काफी असर करता है. प्रारंभिक इलाज दवा से होता है, लेकिन सर्जरी की भी जरूरत पड़ सकती है. सबसे अधिक असरदार सर्जरी होती है. यह बीमारी आगे जाकर कैंसर में भी बदल सकता है. इस कारण समय पर सर्जरी कराना जरूरी है. नौ से 14 साल तक की लड़की टीकाकरण कराके रोक सकती है सर्वाइकल कैंसर : डॉ अमित कुमार जमशेदपुर के कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ अमित कुमार ने सर्वाइकल कैंसर के इलाज को लेकर चर्चा की और कहा कि जनवरी सर्वाइकल कैंसर अवेयरनेस मंथ है. यह ऐसा कैंसर है, जिसे होने से रोका जा सकता है. इसके लिए एक टीका आया है. यह टीका स्कूल जाने वाली नौ से 14 साल तक की लड़की को दो डोज जीरो और छह माह पर देना है. इससे यह होने का चांस बिल्कुल खत्म हो जाता है. अभी देश में हर आठ मिनट में एक महिला की मौत इस बीमारी से हो रही है. प्री कैंसर की अवस्था में डायग्नोस करके सौ फीसदी इलाज कराया जा सकता है. कैंसर शुरुआत में पकड़ में आ जाये, तो इलाज किया जा सकता है. डब्ल्यूएचओ 90-70-90 का नियम लाया है. इसमें 90 प्रतिशत लड़की को टीका देना है. 70 प्रतिशत की स्क्रिनिंग करना है. 90 प्रतिशत का पूर्ण इलाज करना है. 2030 तक पूरी तरह से नियंत्रित करने का लक्ष्य रखा गया है.

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By NISHI RANJAN THAKUR

NISHI RANJAN THAKUR is a contributor at Prabhat Khabar.

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