राघोपुर-काजीकोरैया बांध में 400 मीटर तक बढ़ा कटाव: फ्लड फाइटिंग सामग्री और खर्च पर उठे सवाल, सांसद ने मांगी ऑडिट रिपोर्ट

करोड़ों की फ्लड फाइटिंग योजनाएं कागजों पर ही सिमट गईं. राघोपुर-काजीकोरैया तटबंध में भारी भ्रष्टाचार की आशंका है. सांसद पप्पू यादव ने विभाग से वर्क ऑर्डर और भुगतान का हिसाब मांगा है. अब पारदर्शिता के लिए ऑडिट की मांग उठ रही है.

नवगछिया अनुमंडल के गोपालपुर अंतर्गत राघोपुर-काजीकोरैया जमींदारी तटबंध पर इस साल हुआ फ्लड फाइटिंग अभियान भारी विवादों में घिर गया है. जल संसाधन विभाग ने तटबंध को सुरक्षित रखने के नाम पर पानी की तरह पैसा बहाया, लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात रहा.

जुलाई में 110 मीटर का कटाव हुआ, 24 अगस्त की रात बांध टूटा और सितंबर की शुरुआत तक यह दरार (ब्रीच) बढ़कर 400 मीटर से ज्यादा हो गई. अब बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब करोड़ों की योजनाएं और संसाधन नदी में झोंक दिए गए, तो बांध बचा क्यों नहीं? और इस पूरे अभियान में खर्च हुई भारी-भरकम राशि का हिसाब सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा?

कागजों पर 686 करोड़ खर्च, पर धरातल पर हर साल वही बर्बादी

राघोपुर-काजीकोरैया तटबंध के इतिहास पर नजर डालें, तो यह क्षेत्र लंबे समय से भारी बजट की योजनाओं का केंद्र रहा है:

  • ऐतिहासिक खर्च: वर्ष 2005-06 में यहां स्थायी कटावरोधी कार्य के नाम पर लगभग 13 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे.
  • 686 करोड़ का रिकॉर्ड: वर्ष 2006 से 2019 के बीच पूरे नवगछिया अनुमंडल में स्थायी कटावरोधी और फ्लड फाइटिंग कार्यों पर करीब 686 करोड़ रुपये खर्च होने का आधिकारिक रिकॉर्ड मिलता है.
  • इस साल की विफलता: इसी साल करीब 5 करोड़ रुपये की नई योजना स्वीकृत की गई थी, फिर भी जुलाई से लेकर सितंबर तक बांध को टूटने और 400 मीटर तक बहने से नहीं रोका जा सका.

सवा लाख बोरे और 2,800 मेगा जियो बैग: उपलब्धता या वास्तविक खपत?

प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार 3 सितंबर तक मौके पर:

  • 2,800 मेगा जियो बैग और 1.25 लाख बालू भरी बोरियां उपलब्ध कराने की बात कही गई थी.
  • पड़ोसी प्रमंडलों से 2 लाख अतिरिक्त बोरियां मंगवाने का दावा किया गया था.
  • बड़ा सवाल: क्या यह सामग्री वास्तव में पानी में डाली गई या केवल स्टॉक रजिस्टर और बिलों तक सीमित रही? हाथी पांव, बंबू रोल, पोकलेन, जेसीबी और नावों के किराए की वास्तविक खपत और स्वीकृत मात्रा का मिलान होना अभी बाकी है.

सांसद पप्पू यादव का तीखा हमला: वर्क ऑर्डर और MB सार्वजनिक करे विभाग

प्रभात खबर से विशेष बातचीत में सांसद पप्पू यादव ने इस पूरे अभियान में बड़े खेल की आशंका जताते हुए सीधे सवाल दागे:

  • संवेदकों की लिस्ट: पूरे अभियान में कुल कितने संवेदकों को काम मिला और प्रत्येक को कितने रुपये का वर्क ऑर्डर (कार्यादेश) जारी किया गया?
  • सत्यापन की जवाबदेही: 24 अगस्त से 11 सितंबर के बीच किन-किन अभियंताओं ने मौके पर कैंप किया और मेजरमेंट बुक (MB) पर किस सक्षम अधिकारी ने हस्ताक्षर कर भुगतान का सत्यापन किया?
  • नाव हादसा और सुरक्षा चूक: संवेदक राजकुमार सिंह के माध्यम से काम कराने के दौरान नाव पलटने और मजदूरों के लापता होने की घटना ने सुरक्षा दावों की पोल खोल दी. इस पर डीएम ने कार्यपालक अभियंता को शोकॉज भी थमाया था.

पारदर्शिता के लिए इन 5 बिंदुओं पर ऑडिट जरूरी

स्थानीय ग्रामीणों और जागरूक नागरिकों की मांग है कि जल संसाधन विभाग तुरंत एक श्वेतपत्र जारी कर निम्नलिखित आंकड़े सार्वजनिक करे:

  • कुल स्वीकृत राशि बनाम अब तक हुआ वास्तविक भुगतान.
  • संवेदकों के नाम और उन्हें आवंटित कार्यादेश (Work Order) की प्रति.
  • बालू भरी बोरियों, जियो बैग और मेगा जियो बैग की खरीद बनाम वास्तविक खपत का स्टॉक रजिस्टर.
  • पोकलेन, नावों, ट्रैक्टरों और मजदूरों के दैनिक मस्टर रोल का ब्योरा.
  • तटबंध सुरक्षा में लापरवाही बरतने वाले दोषी अधिकारियों पर दर्ज कार्रवाई की स्थिति.

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By Vipin Thakur

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