bhagalpur news. घर से लेकर बाजार तक शुरू हुई वट सावित्री व्रत की तैयारी

भागलपुर में वट सावित्री व्रत की तैयारी.

– 26 को वट सावित्री व्रत पर सोमवती अमावस्या का संयोगवरीय संवाददाताा, भागलपुर

वट-सावित्री व्रत को लेकर सुहागिनों ने तैयारी शुरू कर दी है. इसे लेकर बाजार से लेकर घर तक तैयारी चल रही है. वट-सावित्री व्रत को लेकर बाजार में डलिया, पंखा, शृंगार सामान की दुकानें सज गयीं हैं. मुख्य बाजार के लोहापट्टी, पंसारी गली व मारवाड़ी टोला लेन में डलिया, पंखा, शृंगार के सामान की खरीदारी को लेकर सुहागिन महिलाएं आने लगी हैं. इस बार 26 मई को होने वाली वट-सावित्री व्रत पर सोमवती अमावस्या का संयोग है.बाजार में अभी 60 से 80 रुपये जोड़ा तक पंखा, लीची 200 रुपये सैकड़ा तक, पीला केला 40 से 50 रुपये दर्जन, खीरा 25 से 30 रुपये किलो, नारियल 40 रुपये पीस तक बिक रहे हैं.

पंडित अंजनी शर्मा ने बताया कि इस बार वट सावित्री व्रत 26 मई को मनायी जायेगी. ज्येष्ठ कृष्ण मास की अमावस्या को यह व्रत रखने की मान्यता है. इस बार सोमवती अमावस्या का शुभ संयोग वट-सावित्री व्रत के दिन बन रहा है. सुहागिन महिलाओं के लिए अधिक फलदायी है. सुहागिन महिलाएं अपने अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए व्रत रखती हैं.

वट-सावित्री व्रत की विधि व महत्व

पंडित आनंद मिश्रा ने बताया कि वट देव वृक्ष है. वट वृक्ष के मूल में भगवान ब्रह्मा, मध्य में विष्णु और अग्र भाग में देवाधिदेव महादेव स्थित रहते हैं. देवी सावित्री भी वट वृक्ष में प्रतिष्ठित रहती हैं. इसी अक्षय वट के पत्र पुटक पर प्रलय के अंतिम चरण में भगवान श्रीकृष्ण ने बालक रूप में मार्केण्डय ऋषि को प्रथम दर्शन दिया था. डाॅ झा बताते हैं कि वट वृक्ष की परिक्रमा करते समय 108 बार सौभाग्यवती महिलाओं को सूत लपेटना चाहिए. महिलाएं अपने अखंड सौभाग्य व कल्याण के लिए वट वृक्ष में कच्चा सूत लपेट कर 108 बार परिक्रमा करती हैं. महिलाओं द्वारा सौभाग्य पेटारी व पूजन सामग्री जैसे सिंदूर, दर्पण, मौली, काजल, मेहंदी, चूड़ी, साड़ी, हिंगूल, स्वर्ण-आभूषण आदि वस्तुएं एक बांस की टोकरी में रखती हैं और वट वृक्ष के नीचे कच्चा सूत लपेट कर पूजा करती हैं

शहर के प्रमुख बरगद पेड़

शहर में आदमपुर चौक समीप सब्जी मंडी परिसर, बरारी बड़गाछ चौक, बड़ी खंजरपुर बड़गाछ चौक, विश्वविद्यालय बड़गाछ चौक, कोतवाली चौक स्थित बरगद पेड़, तिलकामांझी चौक स्थित बरगद का पेड़, परबत्ती काली स्थान समीप बरगद पेड़ हैं.

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By KALI KINKER MISHRA

KALI KINKER MISHRA is a contributor at Prabhat Khabar.

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