Bhagalpur Flood: गंगा समेत जिले की नदियों का जलस्तर बढ़ने के साथ ही भागलपुर में बाढ़ का खतरा बढ़ रहा है. संभावित बाढ़ और उससे प्रभावित इलाकों में लोगों की आवाजाही को सुरक्षित रखने के लिए जिला प्रशासन ने नावों के परिचालन को लेकर सख्त गाइडलाइन जारी की है. अब बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में चलने वाली सरकारी नावों की पहचान दूर से ही हो सकेगी. प्रत्येक सरकारी नाव पर लाल झंडा लगाया जाएगा और उस पर स्पष्ट रूप से ‘निःशुल्क सेवा’ लिखा रहेगा.
प्रशासन का मकसद सिर्फ लोगों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाना नहीं, बल्कि बाढ़ के दौरान नावों से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकना भी है. खासकर नावों में क्षमता से अधिक लोगों को बैठाने पर रोक लगाने और सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है.
लाल झंडे से होगी सरकारी नाव की पहचान
जिला प्रशासन के निर्देश के अनुसार बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में परिचालित सरकारी नावों पर लाल झंडा लगाना अनिवार्य होगा. नाव पर यह भी साफ तौर पर अंकित किया जाएगा कि यह राज्य सरकार की ओर से निःशुल्क सेवा है.
इस व्यवस्था से बाढ़ के समय लोगों को यह पहचानने में आसानी होगी कि कौन सी नाव प्रशासन की ओर से संचालित की जा रही है. इससे अवैध रूप से किराया वसूलने या सरकारी नाव के नाम पर लोगों को भ्रमित करने की संभावना को भी कम किया जा सकेगा.
नाव पर लिखी होगी उसकी क्षमता, वाटर लाइन भी रहेगी
प्रशासन ने नावों की क्षमता को लेकर भी स्पष्ट नियम तय किये हैं. हर नाव पर उसकी लदान क्षमता दर्ज करनी होगी. इसके साथ ही नाव पर वाटर लाइन से एक निशान बनाया जाएगा.
यह निशान यात्रियों के लिए भी स्पष्ट रूप से दिखाई देगा. जब तक पानी वाटर लाइन के नीचे रहेगा, तब तक नाव को निर्धारित सुरक्षा सीमा के भीतर माना जाएगा. इससे नाविक और यात्रियों दोनों को यह समझने में मदद मिलेगी कि नाव पर अतिरिक्त भार डालना कितना जोखिम भरा हो सकता है.
भीड़ बढ़ी तो एक घाट से चलेंगी कई नावें
बाढ़ के दौरान कई इलाकों में लोगों की आवाजाही अचानक बढ़ जाती है. ऐसे में एक ही नाव पर अधिक लोगों को बैठाने की स्थिति पैदा न हो, इसके लिए प्रशासन ने वैकल्पिक व्यवस्था भी तय की है.
अगर किसी घाट पर यात्रियों की भीड़ अधिक होती है तो वहां से एक से अधिक नाव चलायी जा सकती हैं. नावों में ओवरलोडिंग रोकने के लिए संबंधित अंचलाधिकारी और थाना स्तर के अधिकारी निगरानी रखेंगे. घाटों पर निगरानी के लिए स्थानीय चौकीदारों की तैनाती भी की जाएगी.
सूर्यास्त के बाद नाव चलाने पर रोक
बाढ़ के दौरान अंधेरे में नाव परिचालन को दुर्घटना की दृष्टि से बेहद जोखिमपूर्ण माना गया है. इसी वजह से प्रशासन ने सूर्यास्त के बाद नावों के संचालन पर पूरी तरह रोक लगाने का निर्देश दिया है.
नाव चलाने की जिम्मेदारी केवल वैध और निबंधित नाविकों को ही दी जाएगी. यानी कोई भी व्यक्ति मनमाने तरीके से सरकारी राहत या आवागमन के लिए नाव नहीं चला सकेगा.
लाइफ जैकेट से लेकर रस्सी और टॉर्च तक जरूरी
नावों में यात्रियों की सुरक्षा के लिए जरूरी उपकरण उपलब्ध रखना अनिवार्य किया गया है. प्रत्येक नाव में लाइफ जैकेट, लाइफ रिंग यानी सुरक्षा छल्ले, टॉर्च, रस्सी, लंगर और बांस की लग्गी उपलब्ध रहनी चाहिए.
बाढ़ के दौरान अचानक नाव का संतुलन बिगड़ने या किसी यात्री के पानी में गिरने जैसी स्थिति में यही सुरक्षा उपकरण जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं. इसलिए प्रशासन ने इनकी उपलब्धता को केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि अनिवार्य सुरक्षा व्यवस्था बनाया है.
हर नाव का बनेगा अलग लॉग बुक
नावों के परिचालन में पारदर्शिता और निगरानी के लिए प्रत्येक नाव का अलग लॉग बुक तैयार किया जाएगा. इसमें नाव के परिचालन से संबंधित जानकारी दर्ज रहेगी.
लॉग बुक का सत्यापन प्रत्येक तीन दिन पर राजस्व कर्मचारी या पर्यवेक्षक करेंगे. इससे प्रशासन को यह पता रखने में मदद मिलेगी कि कौन सी नाव कहां और किस रूट पर संचालित हो रही है.
घाटों पर चस्पा होगी रूट की पूरी जानकारी
प्रशासन की ओर से नावों के लिए शुरुआती स्थल और गंतव्य स्थल पहले से तय किये जाएंगे. स्वीकृत घाट और रूट की सूची संबंधित घाट, पंचायत भवन और अंचल कार्यालय के नोटिस बोर्ड पर प्रदर्शित की जाएगी.
इससे लोगों को यह जानकारी पहले से मिल सकेगी कि सरकारी नाव किस घाट से चलेगी और उसे कहां तक जाने की अनुमति है.
Bhagalpur Flood: अधिकारियों को सख्ती से पालन कराने का निर्देश
जिलाधिकारी ने अपर समाहर्ता आपदा प्रबंधन, जिला परिवहन पदाधिकारी, सदर, कहलगांव और नवगछिया के अनुमंडल पदाधिकारियों, पुलिस उपाधीक्षकों, सभी अंचलाधिकारियों और थानाध्यक्षों को निर्देश जारी किये हैं.
प्रशासन का जोर इस बात पर है कि बाढ़ के दौरान राहत और आवागमन की व्यवस्था के साथ लोगों की सुरक्षा से किसी तरह का समझौता न हो. खासकर ओवरलोडिंग, अवैध नाव परिचालन और सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर निगरानी बढ़ाने की तैयारी है.
