गंगा का रौद्र रूप जारी, राघोपुर के बाद शंकरपुर बांध पर भीषण कटाव, रेलवे बांध पर मंडराया खतरा

गंगा नदी के बढ़ते कटाव ने खरीक प्रखंड में चिंता बढ़ा दी है. राघोपुर बांध का बड़ा हिस्सा कटने के बाद अब शंकरपुर बांध पर खतरा मंडरा रहा है, जिससे रेलवे बांध के भी प्रभावित होने की आशंका है. अधिकारी कटाव रोकने के प्रयास कर रहे हैं, लेकिन तेज धारा के सामने प्रयास बेअसर साबित हो रहे हैं.

नवगछिया. खरीक प्रखंड में गंगा नदी का कटाव लगातार गंभीर होता जा रहा है. राघोपुर बांध का करीब 200 मीटर से अधिक हिस्सा गंगा की तेज धारा में कटकर विलीन हो चुका है. इसके बावजूद नदी का रौद्र रूप थमने का नाम नहीं ले रहा है. अब शंकरपुर बांध पर भीषण कटाव शुरू हो गया है. कटाव की रफ्तार इसी तरह जारी रही तो शंकरपुर रेलवे बांध के भी प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है.

राघोपुर के बाद शंकरपुर बांध पर बढ़ा संकट

गंगा की तेज धारा लगातार तटवर्ती इलाके को अपनी चपेट में ले रही है. राघोपुर बांध का बड़ा हिस्सा नदी में समा जाने के बाद अब शंकरपुर बांध पर कटाव तेज हो गया है. स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जल्द कटाव पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हुआ तो स्थिति और गंभीर हो सकती है. कटाव के कारण शंकरपुर रेलवे बांध के प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है. इससे क्षेत्र के महत्वपूर्ण रेल और सड़क संपर्क को लेकर भी लोगों की चिंता बढ़ गयी है. स्थानीय स्तर पर विक्रमशिला सेतु की सुरक्षा को लेकर भी आशंका जताई जा रही है.

अधिकारी कटाव स्थल पर कर रहे कैंप

कटाव की गंभीर स्थिति को देखते हुए अनुमंडल पदाधिकारी, खरीक अंचलाधिकारी और जल संसाधन विभाग के पदाधिकारी कटाव स्थल पर कैंप कर रहे हैं. प्रशासन और विभाग की ओर से स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है. कटाव रोकने के लिए नदी की तेज धारा में बालू भरी बोरियां डाली जा रही हैं. इसके अलावा बांस का उपयोग कर भी नदी के कटाव को नियंत्रित करने का प्रयास किया जा रहा है.

तेज धारा के सामने बेअसर हो रहे कटाव निरोधी प्रयास

हालांकि गंगा की तेज धारा के सामने कटाव निरोधी कार्य अपेक्षित रूप से प्रभावी साबित नहीं हो रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि नदी में डाली जा रही बालू भरी बोरियां और अन्य कटाव निरोधी सामग्री तेज बहाव में बह जा रही है.

लोगों के अनुसार नदी की धारा इतनी तेज है कि कटाव रोकने के लिए किया जा रहा प्रयास पर्याप्त साबित नहीं हो रहा. इससे तटवर्ती गांवों में रहने वाले लोगों की चिंता लगातार बढ़ रही है.

तटवर्ती परिवारों में घर और जमीन बचाने की चिंता

गंगा के लगातार बढ़ते कटाव से तटवर्ती क्षेत्र में रहने वाले परिवार सहमे हुए हैं. लोगों को अपने घर और जमीन के नदी में समा जाने का डर सताने लगा है. ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन और जल संसाधन विभाग की ओर से कटाव रोकने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन नदी की तीव्र धारा के कारण अभी तक उन्हें राहत नहीं मिल पा रही है. लोगों की मांग है कि कटाव रोकने के लिए और प्रभावी तथा स्थायी उपाय किए जाएं.

गंगा मैया से कटाव रुकने की प्रार्थना

कटाव निरोधी कार्य का अपेक्षित असर नहीं होता देख स्थानीय महिलाएं अब गंगा मैया को मनाने में जुट गयी हैं. शंकरपुर बांध पर पीपल के पेड़ के नीचे महिलाओं ने पूजा-पाठ शुरू कर दिया है.

महिलाएं गंगा मैया की पूजा-अर्चना कर कटाव रुकने और अपने घर-परिवार की सुरक्षा की प्रार्थना कर रही हैं. महिलाओं का कहना है कि प्रशासन अपने स्तर से कटाव रोकने का प्रयास कर रहा है, लेकिन जब तक गंगा का प्रकोप शांत नहीं होगा, तब तक क्षेत्र पर खतरा बना रहेगा.

प्रशासन के प्रयास और ग्रामीणों की प्रार्थना के बीच कटाव पर टिकी नजर

राघोपुर बांध के बाद शंकरपुर बांध पर शुरू हुए कटाव ने खरीक प्रखंड के तटवर्ती इलाकों में चिंता बढ़ा दी है. अधिकारी मौके पर कैंप कर रहे हैं और कटाव रोकने का प्रयास जारी है. अब ग्रामीणों की नजर इस बात पर टिकी है कि गंगा की धारा कब शांत होती है और कटाव निरोधी कार्य कितना प्रभावी साबित होता है. फिलहाल तटवर्ती परिवार अपने घर, जमीन और बांध की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं.

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By Rashid alam

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