जब मन होता था तब बढ़ाया करते थे फाइल, अब पूर्व डीईओ पवन कुमार की पेंशन से कटेगी राशि
बिहार सरकार के शिक्षा विभाग ने बांका के तत्कालीन जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) सह जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) पवन कुमार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है.
भागलपुर से संजीव झा की रिपोर्ट :
बिहार सरकार के शिक्षा विभाग ने बांका के तत्कालीन जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) सह जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) पवन कुमार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है. वे सेवानिवृत्त हो चुके हैं. कर्तव्यों के प्रति लापरवाही और मनमाने रवैये के दोषी पाये जाने के बाद विभाग ने उनकी पेंशन से कटौती करने का फैसला लिया है. शिक्षा विभाग के निदेशक (प्रशासन) मनोरंजन कुमार द्वारा जारी संकल्प के अनुसार, पवन कुमार के विरुद्ध बिहार पेंशन नियमावली, 1950 के नियम-43 (बी) के तहत दो वर्षों के लिए पांच प्रतिशत पेंशन राशि की कटौती दंड दिया है.
क्या हैं आरोप?
पवन कुमार के खिलाफ भागलपुर प्रमंडल के क्षेत्रीय शिक्षा उप निदेशक द्वारा मई, 2022 में आरोप पत्र गठित किया गया था. उन पर कई गंभीर आरोप थे. निर्धारित सुनवाइयों में बिना किसी अग्रिम सूचना के अनुपस्थित रहे. जनता दरबार के मामलों का समय पर निष्पादन नहीं करते थे. मनमाने तरीके से फाइलों का संचालन करते थे. निलंबित शिक्षकों पर समय से आरोप पत्र गठित न करते थे. सेवानिवृत्त कर्मियों के लाभ से जुड़े मामलों को लटकाये रखते थे. प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी द्वारा नियमों के खिलाफ किये गये शिक्षकों के प्रतिनियोजन (डिप्यूटेशन) पर कोई कार्रवाई न करते थे. उच्चाधिकारियों के आदेशों की लगातार अवहेलना करना और पदीय आचरण के विपरीत कार्य करना भी आरोपों में शामिल हैं.
जवाब देने का मौका गंवाया
विभाग द्वारा इन आरोपों पर कई बार स्मार पत्र (रिमाइंडर) भेजकर बचाव का मौका दिया गया, लेकिन पवन कुमार ने कोई जवाब नहीं दिया. इस बीच 30 नवंबर, 2025 को वह सेवानिवृत्त हो गये, जिसके बाद इस विभागीय कार्यवाही को स्वतः पेंशन नियमावली के तहत बदल दिया गया. जांच पदाधिकारी द्वारा सौंपे गये प्रतिवेदन में आरोप प्रमाणित होने के बाद जनवरी, 2026 में उनसे फिर लिखित स्पष्टीकरण मांगा गया, लेकिन निर्धारित समय सीमा बीतने तक उन्होंने कोई लिखित अभ्यावेदन दर्ज नहीं कराया. विभाग ने माना कि अधिकारी में कार्य के प्रति उदासीनता, शिथिलता और स्वेच्छाचारिता थी.
बीपीएससी से मिली मंजूरी
शिक्षा विभाग द्वारा तय की गयी इस सजा पर बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) से परामर्श मांगा गया था. आयोग ने 12 मई, 2026 को पत्र भेजकर इस दंड पर अपनी सहमति दे दी. बीपीएससी की मंजूरी मिलने के बाद शिक्षा विभाग ने अब इसका औपचारिक संकल्प जारी कर दिया है और इसे बिहार राजपत्र (गजट) में प्रकाशित करने का आदेश दिया है.