लोक संस्कृति और अटूट आस्था के प्रतीक बिहुला-विषहरी महापर्व की शुरुआत भागलपुर में अत्यंत भव्य और पारंपरिक उल्लास के साथ हुई. सोमवार की सुबह से ही जिले भर के पूजा पंडालों और मंदिरों में माता मनसा विषहरी के दर्शन व डलिया चढ़ाने के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा. शाम को वैदिक व पारंपरिक रीति से भगत पूजन होगा, जिसके बाद देर रात गाजे-बाजे के साथ बाला लखेंद्र की बरात निकाली जाएगी और लोकगाथा के अनुसार सती बिहुला संग विवाह की सभी रस्में पूरी की जाएंगी.
जिले में 182 और शहरी क्षेत्र में 116 स्थानों पर विराजीं माता विषहरी
अंग क्षेत्र के प्रमुख लोकपर्व बिहुला-विषहरी को लेकर इस वर्ष भागलपुर जिले में कुल 182 स्थानों पर माता विषहरी की प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं, जिनमें अकेले शहरी क्षेत्र के 116 पूजा स्थल शामिल हैं. चंपानगर स्थित मनसा विषहरी स्थान, परबत्ती, इशाकचक, भीखनपुर, खंजरपुर, बरारी रिफ्यूजी कॉलोनी, गौशाला, दीपनगर और जोगसर सहित तमाम प्रमुख क्षेत्रों में माता के दरबार को आकर्षक रूप से सजाया गया है. सुबह से ही महिलाएं व श्रद्धालु हाथ में पूजन की डलिया लिए कतारबद्ध होकर माता के चरणों में अपनी आस्था निवेदित करते नजर आए.
भगत लीला और मनौन का दौर, रात में निकलेगी बरात
विषहरी स्थानों पर दिनभर भगत लीला का दौर जारी रहा, जहां भगत पारंपरिक वेशभूषा में झूमते हुए मनौन गाते और गंगा स्नान कर पूजा संपन्न कराते दिखे. महाशय ड्योढ़ी स्थित ऐतिहासिक लोहा बास घर में सेवायत विजय प्रकाश झा के नेतृत्व में पूजन हुआ, जिसमें देवाशीष बनर्जी और काकुली बनर्जी सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे. वहीं मोहद्दीनगर कागजी टोला से रात 8:30 बजे चांदो सौदागर के पुत्र बाला लखेंद्र की बरात निकाली जाएगी, जो मोहद्दीनगर दुर्गा स्थान रोड होते हुए पुनः स्थल पर पहुंचेगी. परबत्ती में देर रात 11 बजे सती बिहुला और बाला लखेंद्र का विवाह कराया जाएगा. इसके अलावा इशाकचक बुढ़िया विषहरी स्थान से रात 8 बजे और मिरजानहाट रोड से रात 9 बजे बैंड-बाजों के साथ बरात निकाली जाएगी.
चंपानगर व बड़ी खंजरपुर में सजी आकर्षक झांकियां
चंपानगर और बड़ी खंजरपुर पूजा स्थलों पर लोकगाथा पर आधारित जीवंत झांकियां श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं. यहाँ नाग कलश लिए महिला श्रद्धालुओं का जत्था 'विषहरी माय की जय' के जयकारों के साथ भक्ति में लीन नजर आया. दीपनगर चौक स्थित विषहरी मंदिर से निकलने वाली बरात बूढ़ानाथ चौक, नया बाजार, कोतवाली, खलीफाबाग और खरमनचक होते हुए पुन: मंदिर पहुंचेगी. इस दौरान केंद्रीय पूजा समिति के अध्यक्ष भोला कुमार मंडल, कार्यकारी अध्यक्ष प्रदीप कुमार और महासचिव शशि शंकर राय समेत कई पदाधिकारियों ने विभिन्न पूजा स्थलों का दौरा कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया.
19 अगस्त को होगा भव्य प्रतिमा विसर्जन
आदमपुर स्थित रानी चंद्रावती अहाता में स्थापित स्थायी प्रतिमा की भी विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई. निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार दूसरे दिन प्रातः 6:00 बजे सभी पूजा स्थलों से कलश का विसर्जन किया जाएगा, जबकि माता विषहरी की मुख्य प्रतिमाओं का विसर्जन 19 अगस्त को पूरे पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ संपन्न होगा.
