पार्सल से लेकर स्मार्ट मीटर तक... नवगछिया में साइबर ठगों ने बदला अपना पैंतरा, पैसे गायब होते ही तुरंत डायल करें यह नंबर

नवगछिया में साइबर ठगों ने 8 महीनों में 586 लोगों से 2.17 करोड़ रुपये ठगे। स्मार्ट मीटर और पार्सल के नाम पर हो रही ठगी से बचने के लिए जानें जरूरी सावधानियां।

नवगछिया. पुलिस जिला नवगछिया में साइबर अपराध का जाल लगातार फैलता जा रहा है. मोबाइल, ऑनलाइन बैंकिंग और डिजिटल भुगतान के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर ठगों ने गांवों तक अपनी पहुंच बना ली है. उपलब्ध जानकारी के अनुसार पिछले आठ माह में 586 लोग साइबर ठगी के शिकार हुए हैं और करीब 2.17 करोड़ रुपये की राशि गंवा चुके हैं.

बैंक खाते से आगे बढ़ा साइबर ठगों का जाल

साइबर ठगों के निशाने पर अब केवल बैंक खाते और एटीएम कार्ड नहीं हैं. स्मार्ट मीटर अपडेट, बिजली कनेक्शन काटने, पार्सल फंसने, बैंक खाता बंद होने, लोन दिलाने और ऑनलाइन निवेश जैसे अलग-अलग बहानों से लोगों को जाल में फंसाया जा रहा है. साइबर अपराधी तकनीकी जानकारी से अधिक लोगों के डर और जल्दबाजी का फायदा उठा रहे हैं. बिजली कनेक्शन काटने या बैंक खाता बंद होने की बात कहकर तत्काल कार्रवाई का दबाव बनाया जाता है.

स्मार्ट मीटर के नाम पर 48,800 रुपये की ठगी, एक गिरफ्तार

साइबर ठगी के बदलते तरीकों का ताजा मामला 28 अगस्त को सामने आया. स्मार्ट मीटर का बिल अपडेट कराने और बिजली कनेक्शन काटने का डर दिखाकर एक व्यक्ति से 48,800 रुपये की ठगी की गयी. नवगछिया साइबर थाना पुलिस ने अनुसंधान के बाद इस मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया है. पुलिस के अनुसार ठगी का मामला वर्ष 2025 में दर्ज हुआ था और जांच के दौरान आरोपी की संलिप्तता सामने आई.

पार्सल से बिजली बिल तक बदल रहे ठगी के तरीके

कभी फोन कर लोगों को बताया जाता है कि उनका पार्सल संदिग्ध है, तो कभी बैंक खाता बंद होने की बात कही जाती है. बिजली बिल या स्मार्ट मीटर के नाम पर कनेक्शन काटने की धमकी देकर तत्काल भुगतान करने का दबाव बनाया जाता है. इसके बाद साइबर ठग लिंक भेजते हैं या किसी एप को डाउनलोड कराने के बहाने बैंक खाते से जुड़ी जानकारी हासिल करने की कोशिश करते हैं. अनजान लिंक और संदिग्ध एप लोगों के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं.

ग्रामीण और बुजुर्ग लोगों को बनाया जा रहा आसान निशाना

ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन बैंकिंग का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है. ऐसे में साइबर ठगों को नए लोगों तक पहुंचने का अवसर मिल रहा है. खासकर बुजुर्ग और कम डिजिटल जानकारी रखने वाले लोग आसानी से ठगों के झांसे में आ जाते हैं.

एक गलत लिंक पर क्लिक करना या किसी अनजान व्यक्ति को गोपनीय बैंकिंग जानकारी देना भारी नुकसान का कारण बन सकता है.

पुलिस कार्रवाई के बावजूद चुनौती बनी साइबर ठगी

नवगछिया में साइबर थाना के स्तर पर मामलों की जांच और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है. हालिया स्मार्ट मीटर ठगी मामले में गिरफ्तारी इसका उदाहरण है. हालांकि साइबर अपराधियों के लगातार बदलते तरीके पुलिस के सामने चुनौती बढ़ा रहे हैं. साइबर ठगी की रकम कुछ ही मिनटों में कई बैंक खातों के माध्यम से दूसरे खातों तक पहुंचा दी जाती है. ऐसे में शिकायत करने में देरी होने पर ठगी की रकम को रोकना या वापस कराना मुश्किल हो सकता है.

ठगी होते ही 1930 पर करें शिकायत

साइबर ठगी का शिकार होने पर पीड़ित को तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत करनी चाहिए. साथ ही नवगछिया साइबर थाना को भी तुरंत सूचना देनी चाहिये. लोगों को किसी अनजान व्यक्ति के साथ ओटीपी, यूपीआई पिन, एटीएम या डेबिट कार्ड की जानकारी तथा बैंक से जुड़ी अन्य गोपनीय जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए. किसी अनजान लिंक पर क्लिक करने और संदिग्ध एप डाउनलोड करने से भी बचना चाहिये.

जागरूकता और त्वरित कार्रवाई से बच सकता है पैसा

साइबर ठगी के मामलों में जागरूकता सबसे बड़ा बचाव है. किसी फोन कॉल, मैसेज या लिंक पर भरोसा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच जरूरी है. ठगी होने के बाद तुरंत शिकायत करने से रकम को आगे ट्रांसफर होने से रोकने की संभावना बढ़ सकती है. एक फोन कॉल पर जल्दबाजी में लिया गया फैसला आर्थिक नुकसान का कारण बन सकता है. इसलिए सतर्कता, सत्यापन और समय पर शिकायत साइबर अपराध से बचाव के सबसे महत्वपूर्ण उपाय हैं.

इसे भी पढ़ें: सितंबर में नहीं थमेगी मानसून की रफ्तार, अगले 72 घंटे के दौरान इन जिलों में होगी भयंकर बारिश

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Vipin Thakur

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >