गांधी शांति प्रतिष्ठान केंद्र की ओर से अंग प्रदेश में गांधी जी के आगमन को लेकर 7, 8 और 9 अगस्त को होने वाले राष्ट्रीय समारोह में महिलाओं की अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित करने का निर्णय लिया गया. तीन दिनों के समारोह के दूसरे दिन महिला शक्ति संकल्प सम्मेलन किया जायेगा. इसमें हजारों शहरी और ग्रामीण महिलाओं की उपस्थिति सुनिश्चित की जायेगी. यह निर्णय गांधी शांति प्रतिष्ठान केंद्र के अध्यक्ष प्रकाशचंद गुप्ता की अध्यक्षता में गांधी आगमन शताब्दी समारोह की तैयारी समिति की बैठक में लिया गया. बैठक में समारोह के सभी समितियों के सदस्य शामिल हुए. संचालन प्रसून लतांत, डॉ सुधीर मंडल और संजय कुमार ने किया. धन्यवाद ज्ञापन सुनील अग्रवाल ने किया. महिला शक्ति संकल्प सम्मेलन में बाल विवाह रोकने और महिला आरक्षण की विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की जायेगी. सम्मेलन में देशभर से महिला अधिकार कार्यकर्ता, पत्रकार और लेखिकाएं भाग लेंगी. बैठक में महिला शक्ति संकल्प सम्मेलन की संयोजक छाया पांडे, उषा सिंह, अनीता शर्मा , मृदुला सिंह और रेणु सिंह सर्व सहमति से चुनी गयीं. इसी के साथ यह निर्णय भी किया गया कि समारोह के संरक्षण, वित्त, स्वागत, संचलन, स्मारिका और कला आदि के लिए गठित सभी समितियां में महिलाओं को अधिकतम भागीदारी दी जायेगी. समारोह के पहले दिन उद्घाटन समारोह में गांधी विचारों पर लिखने वाले विख्यात लेखकों में राजमोहन गांधी, डॉ पुरुषोत्तम अग्रवाल, सुधीर चंद्र कुमार प्रशांत, पुष्यमित्र और केशु भाई देसाई को आमंत्रित किया गया है. नौ अगस्त को शांति सद्भावना यात्रा का आयोजन किया जायेगा. इसमें देशभर से गांधी जनों के साथ गांधीवादी लेखक, विचारक, कार्यकर्ता कलाकार पत्रकार के साथ बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं भी शामिल होंगे. बैठक में स्मारिका के प्रकाशन के लिए एक समिति गठित की गयी. युवाओं की भागीदारी को सुनिश्चित करने के लिए एक युवा समिति का गठन किया गया. इसमें करण कुमार राम, मनीष आर्य, प्रभाकर कुमार आदि सदस्य बनाये गये. डॉ मनोज कुमार, कमल जायसवाल, डॉ विनोद कुमार, डॉ उमेश प्रसाद नीरज, ईं अमन कुमार, डॉ फारूक अली, डॉ जयंत , ताकि अहमद जावेद, दीपक दिनकर आदि ने बहुमूल्य सुझाव दिये.
bhagalpur news. गांधीजी के आगमन के सौ वर्ष पूरे होने पर आयोजन सात अगस्त से
गांधी शांति प्रतिष्ठान केंद्र की ओर से अंग प्रदेश में गांधी जी के आगमन को लेकर 7, 8 और 9 अगस्त को होने वाले राष्ट्रीय समारोह में महिलाओं की अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित करने का निर्णय लिया गया.
