बेमौसम बारिश के बाद अब फ्रूट फ्लाई का हमला, भागलपुर के आम बागवानों पर तिहरी मार

Published by : Pratyush Prashant Updated At : 09 Jun 2026 11:55 AM

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भागलपुर में आम के फसल पर फ्रूट फ्लाई का प्रकोप

Bhagalpur Mango Crisis: पहले कड़ाके की ठंड ने आम के मंजर को प्रभावित किया. फिर आंधी और बारिश ने टिकोलों को झाड़ दिया. अब जो फल पेड़ों पर बचे हैं, उन्हें फ्रूट फ्लाई यानी फल मक्खी नुकसान पहुंचा रही है. बिहार की आम नगरी कहे जाने वाले भागलपुर में इस बार आम उत्पादक किसानों की चिंता बढ़ गई है. बागवानों का कहना है कि हालात ऐसे रहे तो उत्पादन के साथ कमाई पर भी बड़ा असर पड़ सकता है.

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भागलपुर से दीपक राव की रिपोर्ट.

Bhagalpur Mango Crisis: भागलपुर के आम उत्पादक किसान इस बार मौसम और कीटों की दोहरी नहीं, बल्कि तिहरी मार झेल रहे हैं. लंबे समय तक बनी रही ठंड, उसके बाद आंधी-बारिश और अब फ्रूट फ्लाई के बढ़ते प्रकोप ने बागवानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. जिले के कई इलाकों में तैयार हो रहे आमों को फल मक्खी नुकसान पहुंचा रही है, जिससे उत्पादन और गुणवत्ता दोनों प्रभावित हो रहे हैं.

सुलतानगंज से कहलगांव तक बढ़ी चिंता

सुलतानगंज, शाहकुंड, कहलगांव और नाथनगर जैसे प्रमुख आम उत्पादक क्षेत्रों में किसान सबसे ज्यादा परेशान हैं. बागवानों का कहना है कि मौसम की मार के कारण इस वर्ष आम की फसल पहले से ही प्रभावित थी. ठंड की वजह से मंजर आने में देरी हुई और बाद में तेज आंधी एवं बारिश से बड़ी संख्या में टिकोले झड़ गए.

अब जो फल पेड़ों पर बचे हैं, उनमें फ्रूट फ्लाई छेद कर रही है. इससे फल काले पड़ रहे हैं, सड़ रहे हैं और बाजार में उनकी गुणवत्ता घट रही है. किसानों का कहना है कि इससे उन्हें 20 प्रतिशत से अधिक आर्थिक नुकसान होने की आशंका है.

अच्छी कीमत मिलने की उम्मीद भी कम

कहलगांव के किसान कृष्णानंद सिंह और नाथनगर के बागवान गुंजेश गुंजन बताते हैं कि फल की गुणवत्ता प्रभावित होने से बाजार में उचित मूल्य मिलना मुश्किल हो गया है. व्यापारियों की पहली पसंद अच्छे रंग और गुणवत्ता वाले आम होते हैं, लेकिन इस बार बड़ी संख्या में फल प्रभावित हो रहे हैं.

इसका सीधा असर किसानों की आमदनी पर पड़ सकता है.

आखिर क्यों बढ़ा कीटों का प्रकोप

पौधा संरक्षण विभाग के सहायक निदेशक सुजीत पाल के अनुसार इस वर्ष वातावरण में अधिक नमी रहने के कारण कीटों का प्रकोप बढ़ा है. फ्रूट फ्लाई आम के फलों में अंडे देती है, जिससे फल अंदर से खराब होने लगते हैं.

उन्होंने बताया कि यदि समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया तो नुकसान और बढ़ सकता है.

फेरोमैन ट्रैप से मिल सकता है बचाव

विभाग ने किसानों को फेरोमैन ट्रैप लगाने की सलाह दी है. विशेषज्ञों के अनुसार प्रति हेक्टेयर 15 से 20 फेरोमैन ट्रैप लगाने से फ्रूट फ्लाई की संख्या को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है.

इसके अलावा बागों की नियमित सफाई, सड़े हुए फलों का सुरक्षित निपटान और गर्मियों में गहरी जुताई करने की सलाह दी गई है. आवश्यकता पड़ने पर डाईमेथोएट दवा के छिड़काव का भी सुझाव दिया गया है, हालांकि विशेषज्ञ फेरोमैन ट्रैप को अधिक सुरक्षित और प्रभावी मानते हैं.

मैंगो मैन की भी चिंता

सुलतानगंज के प्रसिद्ध ‘मेंगो मैन’ अशोक चौधरी ने भी इस समस्या को गंभीर बताया है. उनका कहना है कि यदि अभी से नियंत्रण के उपाय नहीं किए गए तो पूरी फसल प्रभावित हो सकती है.

फिलहाल किसान फ्रूट कैप और फेरोमैन ट्रैप के जरिए फलों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन मौसम की अनिश्चितता ने उनकी चिंता बढ़ा दी है.

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Pratyush Prashant

लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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