गंगा की लहरों के आगे सरेंडर हुआ सिस्टम, बाढ़ से पहले जागा महकमा

Bhagalpur Ganga Katav: बिहार के भागलपुर प्रक्षेत्र में मानसून की दस्तक से पहले प्रशासनिक कप्तानों की नींद अचानक टूट गई है. गंगा नदी के रौद्र रूप और कड़क कटाव से हर साल जमींदोज होने वाले नवगछिया अनुमंडल में चल रहे सुरक्षा प्रोजेक्ट्स की जमीनी हकीकत देखकर जल संसाधन विभाग के सबसे बड़े अधिकारी का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है.

भागलपुर (गोपालपुर) से विपिन ठाकुर की विशेष रिपोर्ट

Bhagalpur Ganga Katav: कोसी और सीमांचल के सीमावर्ती प्रक्षेत्रों में बाढ़ और कटाव की विसंगतियों से कली-मजदूरों और प्रबुद्ध नागरिकों को बचाने के लिए चलाए जा रहे सरकारी दावों की पोल एक बार फिर खुल गई है. भागलपुर जिला अंतर्गत नवगछिया अनुमंडल के अति संवेदनशील रंगरा चौक प्रखंड और इस्माईलपुर से बिंद टोली प्रक्षेत्र में गंगा नदी के कटाव निरोधी कार्यों का लाइव जायजा लेने पहुंचे जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता ई. जयप्रकाश पासवान ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है. मानसून के सिर पर होने के बावजूद जमीनी स्तर पर कनिष्ठ ठेकेदारों की सुस्त रफ्तार और विभागीय कप्तानों की लापरवाही को देखकर मुख्य अभियंता ने भरी बैठक में पूरी टीम को कड़क फटकार लगाई है और निर्धारित समय सीमा के भीतर कमान संभालने का अल्टीमेटम दिया है.

ज्ञानीदास टोला में आधा काम भी अधूरा, ठेकेदार की सुस्ती पर भड़के मुख्य अभियंता

बाढ़ पूर्व तैयारियों को लेकर विभाग द्वारा हर साल करोड़ों रुपए पानी की तरह बहाए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत हमेशा डराने वाली होती है. मुख्य अभियंता जब रंगरा चौक प्रखंड के ज्ञानीदास और झल्लूदास टोला पहुंचे, तो वहां का दृश्य देखकर वे हतप्रभ रह गए. इस अति संवेदनशील पॉकेट में कटाव निरोधी प्रोजेक्ट की वास्तविक प्रगति मात्र 45 प्रतिशत संधारित की गई थी.

नदी की लहरें लगातार मुख्य भूभाग को निगलने के लिए मुस्तैद दिख रही हैं, लेकिन निर्माण एजेंसी के कनिष्ठ कप्तानों की लापरवाही के कारण यहां सुरक्षा दीवार और स्पर बनाने की कड़ियां पूरी तरह सुस्त पड़ी थीं. मुख्य अभियंता ने इस घोर लापरवाही पर कड़ा एतराज जताते हुए संबंधित एजेंसी और फील्ड में तैनात कनिष्ठ अभियंताओं को साफ तौर पर चेतावनी दी है कि अगर बरसात की पहली बौछार से पहले यह काम पूरा नहीं हुआ, तो विभागीय संबल वापस लेकर सीधे ब्लैकलिस्ट करने की विधिक कमान कसी जाएगी.

स्परों के बीच कहीं संतोषजनक रफ्तार तो कहीं अब भी फंसा है पेंच

इस बड़े निरीक्षण अभियान के दौरान गंगा नदी के तटीय इलाकों में बने विभिन्न स्परों की तकनीकी कड़ियों को भी खंगाला गया. राहत की बात यह रही कि स्पर संख्या सात और आठ के बीच चल रहे सुरक्षात्मक कार्यों की प्रगति लगभग 95 प्रतिशत पाई गई है, जिसे पूर्णता की कगार पर माना जा सकता है. इस हिस्से के मजबूत होने से आसपास के ग्रामीणों को एक बड़ा सुरक्षा संबल मिलेगा.

इसके ठीक उलट, स्पर संख्या आठ और नौ के बीच की कहानी थोड़ी अलग मिली, जहां अब तक केवल 75 प्रतिशत कार्य ही संधारित किया जा सका है. मुख्य अभियंता ने कनिष्ठ अभियंताओं की टीम को निर्देश दिया है कि वे दिन-रात कमान संभालकर इस बचे हुए 25 प्रतिशत के गैप को अगले एक सप्ताह के भीतर हर हाल में पाट दें, ताकि नदी का जलस्तर बढ़ते ही पानी गांवों की तरफ न रुख कर सके.

ग्रामीणों की शिकायत पर सीधे नपेंगे अफसर, सीट पाइलिंग पर टिकी है नजर

जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता ई. जयप्रकाश पासवान ने मीडिया कर्मियों और स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों के समक्ष स्पष्ट शब्दों में कहा कि गंगा कटाव से प्रभावित प्रक्षेत्रों की सुरक्षा और कली-मजदूरों के आशियानों को बचाना नीतीश सरकार की मुख्य प्राथमिकता में शामिल है. निर्माण कार्यों में किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता, तकनीकी विसंगति या गुणवत्ता में कमी को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

उन्होंने स्थानीय ग्रामीणों से सीधा संवाद स्थापित करते हुए कहा कि यदि सीट पाइलिंग या जियो बैग की फिलिंग को लेकर किसी भी प्रकार की तकनीकी गड़बड़ी की लाइव शिकायत मिलती है और जांच में वह सत्य पाई जाती है, तो संबंधित संवेदक प्रतिनिधि के साथ-साथ दोषी कनिष्ठ व वरिष्ठ विभागीय अधिकारियों के विरुद्ध भी तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर कड़क दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी.

बरसात के मौसम को देखते हुए 24 घंटे मॉनिटरिंग के कड़े आदेश

इस हाई-प्रोफाइल निरीक्षण के अंतिम सत्र में सहायक अभियंता ई. ब्रजकिशोर भारती और संवेदक प्रतिनिधियों की मौजूदगी में एक कड़क रोस्टर तैयार किया गया. मुख्य अभियंता ने साफ कहा कि उत्तर-पूर्वी बिहार में मानसून कभी भी दस्तक दे सकता है, इसलिए अब दफ्तरों में बैठकर फाइलों को संधारित करने का समय पूरी तरह समाप्त हो चुका है.

सभी तकनीकी कप्तानों को निर्देश दिया गया है कि वे हर रोज सुबह-शाम खुद साइट पर रहकर कार्यों की लाइव कमान संभालें. बरसात के मौसम की अप्रत्याशित विसंगतियों को देखते हुए निर्माण स्थलों पर पर्याप्त मात्रा में बोल्डर, फ्लड फाइटिंग मटेरियल और कली-मजदूरों की मुस्तैदी चौबीसों घंटे रहनी चाहिए, ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति में गंगा के भीषण कटाव को तुरंत नियंत्रित किया जा सके.

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लेखक के बारे में

Published by: Divyanshu Prashant

दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में Prabhat Khabar डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा से पत्रकारिता में परास्नातक तथा टी. एन. बी. कॉलेज भागलपुर से हिंदी साहित्य में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। हिंदी साहित्य की पृष्ठभूमि होने के कारण उन्हें पढ़ने, लेखन और कविता-सृजन में विशेष रुचि है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे Dainik Jagran में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।

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