Bhagalpur Flood: भागलपुर में गंगा का जलस्तर बढ़ने के साथ अब शहर के निचले इलाकों में पानी का असर साफ दिखने लगा है. गुरुवार को सखीचंद घाट की पुलिया तक गंगा का पानी पहुंच गया. बूढ़ानाथ मार्ग में पानी भर गया, जबकि बूढ़ानाथ मंदिर के नीचे मशानी काली परिसर और पार्क में पानी जमा होने से तालाब जैसा दृश्य बन गया.
हालात के बीच बूढ़ानाथ मंदिर के सामने पुराने भवन से युवाओं की टोली पानी में छलांग लगाती नजर आयी. जिस जगह पर लोगों के लिए धार्मिक और सार्वजनिक गतिविधियां होती थीं, वहां अचानक पानी भरने से पूरा दृश्य बदल गया है. हालांकि पानी में इस तरह छलांग लगाना जोखिम भरा है, क्योंकि पानी की गहराई और नीचे की स्थिति स्पष्ट नहीं है.
सखीचंद घाट पुलिया तक पहुंचा पानी, मान मंदिर के पास भी बढ़ा असर
गंगा का जलस्तर बढ़ने का असर शहर के घाटों और आसपास के निचले इलाकों में दिखाई देने लगा है. सखीचंद घाट की पुलिया को पानी छूने लगा है. मान मंदिर के समीप भी गंगा का पानी पहुंच गया है.
बूढ़ानाथ मार्ग में पानी जमा होने से स्थानीय लोगों की परेशानी बढ़ गयी है. मशानी काली परिसर और बूढ़ानाथ पार्क में भी पानी भर गया है.
हालांकि आदमपुर घाट बैंक कॉलोनी मुख्य मार्ग पर अभी पानी नहीं पहुंचा है. सीएमएस स्कूल परिसर भी फिलहाल सुरक्षित है. इससे आसपास रहने वाले लोगों को थोड़ी राहत मिली है.
लेकिन पेयजल और सड़ांध की समस्या बढ़ने लगी है. पानी के जमाव के साथ नालियों की गंदगी और बदबू ने स्थानीय लोगों की परेशानी बढ़ा दी है.
निचले इलाकों में मवेशियों की चिंता, जहरीले जीवों का डर
गंगा का पानी बढ़ने का सबसे अधिक असर नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों पर पड़ रहा है. सखीचंद घाट, दीपनगर, मानिक सरकार घाट, आदमपुर घाट, किलाघाट और नाथनगर के लालूचक, श्रीरामपुर तथा शंकरपुर दियारा क्षेत्र में पानी ऊपर चढ़ने लगा है.
इन इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता सिर्फ घरों तक पानी पहुंचने की नहीं है. मवेशियों को सुरक्षित रखने की चुनौती भी सामने है. इसके अलावा पानी बढ़ने के साथ सांप, बिच्छू और दूसरे जहरीले जीवों के घरों और आसपास आने का डर भी बढ़ गया है.
सखीचंद घाट निवासी बमबम ठाकुर ने बताया कि गंगा किनारे रहने वालों को सांप-बिच्छू का डर बना रहता है. पानी और बढ़ा तो यह खतरा और बढ़ सकता है.
‘अभी अगस्त ही है’, पिछले साल सितंबर में आया था पानी
बूढ़ानाथ मंदिर प्रबंधक वाल्मीकि सिंह ने बताया कि पिछले वर्ष भी जलस्तर बढ़ने पर मंदिर परिसर में पानी जमा हुआ था. इस बार चिंता इसलिए ज्यादा है क्योंकि अभी अगस्त का महीना ही चल रहा है.
उनके अनुसार पिछले वर्ष सितंबर में पानी आया था, जबकि इस बार अगस्त में ही गंगा का पानी निचले हिस्सों तक पहुंचने लगा है.
दीपनगर के सामाजिक कार्यकर्ता मनोज गुप्ता ने बताया कि नाले में पानी बढ़ने के साथ बदबू की समस्या गंभीर हो गयी है. रात में भी परेशानी होती है और जहरीले जीवों का भय बना रहता है.
घाटों पर सीढ़ियों पर ही स्नान करने की मजबूरी
गंगा का पानी बढ़ने के बावजूद लोग रोजमर्रा की जरूरतों के लिए घाटों पर पहुंच रहे हैं. एसएम कॉलेज सीढ़ी घाट, बरारी सीढ़ी घाट, हनुमान घाट और मुसहरी घाट पर पानी बढ़ने से लोगों को सीढ़ियों पर ही स्नान करना पड़ रहा है.
जलस्तर लगातार बढ़ने की स्थिति में घाटों पर सुरक्षा को लेकर भी सतर्कता जरूरी हो गयी है. खासकर बच्चों और युवाओं के पानी के नजदीक जाने पर अभिभावकों को सावधानी बरतने की जरूरत है.
चचरी पुल डूबा, दियारावासियों का संपर्क टूटा
गंगा का बढ़ता पानी अब आवागमन को भी प्रभावित करने लगा है. किलाघाट के दो चचरी पुल और बूढ़ानाथ घाट का एक चचरी पुल पानी में डूब गया है.
चचरी पुल डूबने के बाद शंकरपुर दियारा के लोगों के लिए गांव आने-जाने का प्रमुख सहारा अब नाव रह गयी है. इससे रोजमर्रा की आवाजाही मुश्किल हो गयी है.
वार्ड 17 के पार्षद अशोक पटेल ने कहा कि गंगा का पानी लगातार बढ़ना दियारावासियों के लिए चिंता का विषय है. पानी और बढ़ने पर आवागमन की समस्या गंभीर हो सकती है.
दियारा की फसलें डूबीं, किसानों की बढ़ी चिंता
शंकरपुर दियारा से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता विकास कुमार रजक ने बताया कि दियारा क्षेत्र में सब्जी समेत अन्य फसलें पूरी तरह डूब चुकी हैं.
दियारा के किसानों के लिए जलस्तर बढ़ना सिर्फ आवागमन की समस्या नहीं है. खेतों में पानी भरने से तैयार और खड़ी फसलों को नुकसान होने का खतरा बढ़ गया है. लंबे समय तक पानी जमा रहने पर किसानों की आर्थिक स्थिति पर भी इसका असर पड़ सकता है.
Bhagalpur Flood: शहर के लिए राहत भी, चिंता भी
भागलपुर शहर में अभी सभी निचले इलाके जलमग्न नहीं हुए हैं. आदमपुर घाट बैंक कॉलोनी मुख्य मार्ग और सीएमएस स्कूल परिसर में पानी नहीं पहुंचना स्थानीय लोगों के लिए राहत की बात है.
लेकिन सखीचंद घाट से लेकर दीपनगर और दियारा क्षेत्रों में बढ़ता पानी प्रशासन और स्थानीय लोगों के लिए चेतावनी भी है. जलस्तर बढ़ने के साथ सुरक्षित नाव परिचालन, घाटों पर निगरानी, निचले इलाकों में रहने वाले लोगों और मवेशियों की सुरक्षा तथा जहरीले जीवों से बचाव पर विशेष ध्यान देने की जरूरत बढ़ गयी है.
