आर्ट ऑफ लिविंग की ओर से विश्व ध्यान दिवस 21 दिसंबर को मनाया जायेगा. इसे लेकर तैयारी हो गयी है. गुरुवार को आनंदराम ढांढानिया सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में प्रशिक्षक स्मृति मिश्रा ने ध्यान सत्र कराया गया. बताया कि पिछले वर्ष की भांति इस वर्ष भी लाखों लोग गुरुदेव श्री श्री रविशंकर के साथ लाइव ध्यान रात्रि 8:30 बजे करेंगे. इसकी तैयारी के तहत आर्ट ऑफ लिविंग के प्रशिक्षक जगह-जगह जाकर लोगों को नियमित ध्यान के लाभ के प्रति सजग कर रहे. स्कूल में सभी शिक्षकों व विद्यार्थियों को ध्यान सत्र कराया गया. इसमें बच्चों, बड़ों सभी को ध्यान के लाभ से अवगत कराया. उन्होंने बताया कि नियमित ध्यान हमें शारीरिक और मानसिक विश्राम देने के साथ ही हमारी अन्य क्षमताओं और रचनात्मकता को भी बढ़ाता है. उन्होंने सभी को 21 दिसंबर को गुरुदेव के साथ ध्यान करके विश्व के सबसे बड़े ध्यान कार्यक्रम का हिस्सा बनने का आह्वान किया. कार्यक्रम में वालंटियर के रूप में शशिकांत उपस्थित थे. कहलगांव स्थित प्राचीन विक्रमशिला विश्वविद्यालय में भी 20 दिसंबर को ऐसा ही एक कार्यक्रम लोगों में जागरूकता बढ़ाने के लिए कराया जायेगा.
श्रीमद्भागवत मानव समाज के लिए एक श्रेष्ठ मार्गदर्शक
श्रीमद्भागवत मानव समाज के लिए एक श्रेष्ठ मार्गदर्शक है. इसके स्वाध्याय से मनुष्य का जीवन बदल जाता है. भागवत एक अनुपम जीवनोपयोगी महान ग्रंथ है. उक्त बातें पंडित पंकजाचार्य ने गुरुवार को न्यू शिवपुरी न्यू विक्रमशिला काॅलोनी शिव मंदिर के समीप श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान महायज्ञ के पांचवें दिन गुरुवार को प्रवचन करते हुए कही. कथा आयोजन में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी. उन्होंने श्रीकृष्ण के बाल लीलाओं का वर्णन किया. आयोजन में समिति के डॉ शिशिर पंजिकार, शशि शेखर झा, डॉ मदन कुमार पाठक, राजाराम गुप्ता, निभाष झा, संकेत झा, आशुतोष मिश्रा, भवेश कुमार, दिवाकर मिश्रा, अंजनी यादव, रतन सिंह, हेमन्त सिंह, संजीत पाण्डेय, मुकेश मिश्रा, बमबम पोद्दार, स्वर्ण लता देवी, कंचन देवी, बबीता देवी, आशा देवी, पुष्पा देवी आदि उपस्थित थे.
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