भागलपुर: राशन कार्ड को लेकर मची अफरा-तफरी को समाप्त करने के लिए एक बार फिर से दावा-आपत्ति लेने का सिलसिला शुरू किया गया है. सरकार के निर्देश पर इस दावा-आपत्ति का निष्पादन हर हाल में जुलाई के अंत तक करना है.
पिछले वर्ष नवंबर-दिसंबर माह में सामाजिक आर्थिक व जातिगत जनगणना (एसइसीसी) के प्रारूप प्रकाशन के बाद भी दावा-आपत्ति लिया गया था, जिसका निष्पादन अब तक नहीं हो पाया है. छह माह बीत जाने के बाद भी पुराने आपत्तियों का निष्पादन नहीं होने से इस बार लिये जा रहे आपत्तियों के निष्पादन को लेकर लोग अभी से ही सशंकित हैं. सामाजिक आर्थिक जनगणना के आधार पर लागू खाद्य सुरक्षा योजना के तहत बने राशन कार्ड को लेकर लगातार हंगामा हो रहा है.
पदाधिकारियों यही राग अलाप कर अपनी जिम्मेवारी से भागते रहे कि यदि किसी को जनगणना को लेकर शिकायत है तो वह प्रारूप प्रकाशन के बाद दावा-आपत्ति दायर कर सकते हैं. इसमें सुधार कर दिया जायेगा. प्रारूप प्रकाशन के बाद सभी प्रखंडों में आपत्ति देने वालों की भीड़ उमड़ गयी और 262652 आपत्तियां दायर की गयी. अधिकांश लोगों ने जनगणना नहीं होने या नाम छूट जाने की शिकायत दी. नियमत: सभी आपत्तियों का निबटारा करने के बाद फाइनल सूची का प्रकाशन होना था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. खाद्य सुरक्षा योजना लागू होने व राशन कार्ड के लिए सूची बनने के बाद लोगों ने हंगामा शुरू किया तो प्रशासन जागा. आपत्तियों का निष्पादन शुरू कराया गया. अब तक इनमें से करीब 115000 आवेदन का निष्पादन कर दिया गया है.
शेष बचे आवेदनों में से जांच के बाद 74555 आवेदन को कुछ खामियों या अधूरी जानकारी के चलते अस्वीकृत कर दिया गया है. अभी भी दावा-आपत्ति के करीब 75000 आवेदनों का निष्पादन किया जाना शेष है. दूसरी ओर, लगातार हो रहे हंगामा को देखते हुए एक से 10 जुलाई तक आपत्ति लेने की तिथि तय की गयी है. पहले दो दिनों के अंदर जिला के सभी प्रखंडों में औसतन एक सौ से आवेदन प्राप्त हो रहे हैं. इस हिसाब से जिला के सभी 16 प्रखंड व चार नगर निकाय को मिला कर रोजाना दो हजार के करीब आवेदन प्राप्त हो रहे हैं. लोग इसी बात को लेकर सशंकित हैं कि जब छह माह में दो लाख आवेदनों का निष्पादन नहीं हो पाया तो अब एक माह में एक लाख से अधिक आवेदनों का (पुराने बचे करीब 75 हजार व नये आने वाले प्रतिदिन दो हजार आवेदन) निष्पादन कैसे हो पायेगा.
सभी प्रखंड में आपत्ति लेने के लिए काउंटर खोले गये हैं. एसइसीसी की तरह ही बीडीओ एनजीओ, शिक्षक, विकास मित्र आदि को प्रगणक नियुक्त कर प्राप्त आपत्तियों की जांच करायेंगे और संबंधित व्यक्ति से फॉर्म भरवाएंगे. फिर बीडीओ इस फार्म को अपने हस्ताक्षर से मुख्यालय भेजेंगे. यह सही हो इसकी प्राथमिक जवाबदेही बीडीओ की ही है.
डॉ चंद्रशेखर सिंह, उप विकास आयुक्त
