भागलपुर: बेटी की असामयिक मौत का दर्द और फिर उसके शव के लिए दर-दर की ठोकरें खाना. इस यातना को एक पिता भोग रहे थे. यह स्थिति सोमवार को जवाहर लाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल में देखने को मिली.
मिरजानहाट निवासी सुबोध गुप्ता की बेटी श्रुति कुमारी (17 वर्ष) रविवार की रात अपने घर में ही बुरी तरह से झुलस गयी थी. परिजनों ने उसे गंभीर हालत में मायागंज अस्पताल में दाखिल कराया, जहां इलाज के दौरान देर रात करीब 12 बजे उसकी मौत हो गयी. मौत के बाद वहां डय़ूटी पर तैनात एक चिकित्सक ने उसकी रिपोर्ट में मौत का कारण छत से गिरना लिख दिया और अस्पताल में बनी पुलिस चौकी में भिजवा दिया.
सोमवार सुबह जब श्री गुप्ता अपनी बेटी का शव ले जाने के लिए पुलिस के पास गये तो पुलिस कर्मियों ने शव को ले जाने से रोक दिया. पुलिस का कहना था कि जिस शव के बारे में श्री गुप्ता बता रहे हैं कि वही उसकी बेटी का शव है, उसकी मौत तो जलने से हुई है, लेकिन चिकित्सक की रिपोर्ट के आधार पर श्री गुप्ता की बेटी की मौत छत से गिरने की वजह से हुई है. पुलिस ने सुबोध को चिकित्सक से इस रिपोर्ट को ठीक करवा कर लाने की सलाह दी. पुलिस का कहना था कि रिपोर्ट सही होने के बाद ही शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा जा सकेगा या उन्हें सौंपा जायेगा. यहीं से शुरू हुई एक पिता की दर्द भरी दास्तान.
