भागलपुर : मायागंज अस्पताल के आइसीयू में एडमिट मरीज की मौत दोपहर के समय ही हो गयी, लेकिन इस बात की खबर परिजनों को एक घंटे के बाद दी गयी. जब परिजनों ने लाश को वहां से बाहर करने का आग्रह किया, तो नर्स उन्हें रोकती रही.
जबकि, इसी दौरान आइसीयू के बाहर हार्ट अटैक की शिकार हुई एक महिला जिंदगी-मौत से जूझती रही और उसे तकरीबन घंटेभर से भी ज्यादा देर तक यहां एक मात्र बेड खाली होने का इंतजार करना पड़ा.
इस दौरान बेड न मिलने से हर्ट अटैक की शिकार महिला के परिजन परेशान रहे. अंत में काफी हंगामे के बाद आइसीयू में दो घंटे बाद डॉक्टर पहुंचे और लाश को बाहर निकलवाया, जिसके बाद हार्ट की शिकार हुई महिला को आइसीयू में बेड मिल पाया. अस्पताल अधीक्षक ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और जांच के बाद इसके लिए दोषी डॉक्टर पर कार्रवाई की बात कही है.
पूरी व्यवस्था रही नर्स के हवाले, डॉक्टर थे नदारद नर्स से मिन्नत करते रहे परिजन
आइसीयू के डी ब्लॉक बेड नंबर चार पर भर्ती सुलतानगंज कमरगंज के मरीज रहिमल यादव की मौत दोपहर करीब दो बजे हो चुकी थी. वह एमडीआर टीबी से ग्रस्त थी. बाहर परिजन अपने मरीज को लेकर चिंतित थे. दोपहर दो बजे शिफ्ट परिवर्तन होने के बाद यहां कोई भी डॉक्टर नहीं आये.
उनके भाई जयमल यादव ने बताया कि आइसीयू में कोई भी डॉक्टर नहीं थे. यहां की पूरी व्यवस्था नर्स के हवाले थी. करीब दो बजे मेरे भाई की मौत यहां हुई. जब हम लाश निकालने के लिए अंदर गये, तो नर्स ने रोक दिया.
कहा गया डॉक्टर जब तक नहीं कहेंगे तब तक लाश नहीं ले जा सकते. हम लोग डॉक्टर का इंतजार करते रहे. कई बार फोन करने के बाद भी डॉक्टर ने फोन नहीं उठाया. करीब पांच बजे के बाद डॉक्टर आये, तब लाश को बाहर निकाला गया.
घंटेभर जिंदगी और मौत से जूझती रही तुलसी
इसी दौरान यहां बरारी निवासी तुलसी देवी को लाया गया. उन्हें माइनर हार्ट अटैक आया था. रविवार दोपहर करीब 12 बजे इनको इमरजेंसी के मेडिसिन विभाग में भर्ती कराया गया था.
इसके बाद डॉक्टरों ने तत्काल उन्हें आइसीयू में भर्ती करने को कहा. काफी हंगामे के बाद अस्पताल प्रबंधन ने मामला शांत करने के लिए रहिमन काे एंबुलेंस उपलब्ध कराया.
बेड खाली होने के बाद तुलसी देवी को बेड दिया गया और यहां उनका इलाज शुरू हो सका. इस दौरान तकरीबन तीन घंटे तक आइसीयू नर्स के हवाले रहा.
प्रधान सचिव अमृतलाल ने दी खुशखबरी
