ग्रीन जोन का लगातार कम होना जीव जगत के लिए खतरनाक : डॉ. नागेश

महारानी जानकी कुंवर महाविद्यालय के भूगोल विभाग के द्वारा "विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस " और डिग्री कोर्स सत्र 2025- 29 के सत्रारंभ के उपलक्ष्य में एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन सोमवार को किया गया.

बेतिया. महारानी जानकी कुंवर महाविद्यालय के भूगोल विभाग के द्वारा “विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस ” और डिग्री कोर्स सत्र 2025- 29 के सत्रारंभ के उपलक्ष्य में एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन सोमवार को किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे महाविद्यालय प्राचार्य प्रो.(डॉ) रवींद्र कुमार चौधरी ने सभी विद्यार्थियों को प्रकृति की रक्षा मां के रूप में करने और नियमित कक्षा करने की शपथ दिलाई. इसके बाद उन्होंने पर्यावरण संरक्षण की महत्ता पर प्रकाश डाला. प्रो. चौधरी कहा कि आप विद्यार्थी जब सुशिक्षित होंगे तभी सतत विकास और प्राकृतिक संसाधनों का उचित उपयोग हो पाएंगे.इसी कड़ी में उन्होंने राज्य के हर जिले में विश्वविद्यालय खुलने की भी बात कही. 28 जुलाई को विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस के अवसर पर भूगोल विभाग के द्वारा एक दिवसीय संगोष्ठी प्राचार्य ने बेहद उपयोगी और सार्थक बताया. मुख्य वक्ता रहे आरएलएसवाई कॉलेज के भूगोल विभागाध्यक्ष डॉ. राम नागेश प्रसाद ने पश्चिमी चंपारन ज़िले के प्राकृतिक संसाधनों के क्षरण को एक मानचित्र के द्वारा सरल शब्दों में बताया.उन्होंने उदयपुर जंगल, वाल्मीकि व्याघ्र परियोजना व पूरे जिला में प्राकृतिक संसाधनों के क्षरण और ग्रीन जोन का लगातार कम होना जीव जगत के लिए खतरनाक हैं. इसका प्रतिकूल प्रभाव हमारे पर्यावरण और जीव जगत के संतुलन पर भी पड़ रहा है. विशिष्ट वक्ता रहे सहायक प्राध्यापक अजय पासवान ने जीव जगत संरक्षा और प्राकृतिक संसाधनों सतत विकास से जुड़ी बुनियादी पहलुओ पर प्रकाश डाला. कार्यक्रम संयोजिका एवं संचालनकर्ता और कॉलेज के भूगोल विभागाध्यक्ष डॉ तृप्ति कुमारी ने प्राकृतिक संसाधनों का विकास तभी सार्थक है जब वह प्रकृति का विनाश नहीं संरक्षण करे. वही कार्यक्रम का आरंभ डॉ योगेन्द्र सम्यक के स्वागत भाषण से हुआ. महाविद्यालय के छात्र छात्राओं शशांक,अनस, सुशांत, पलक, निधि, अंतिमा, राजकुमार ने विषय पर अपने विचार रखे. अंत में डॉ बरखा चपलोत ने पर्यावरण संरक्षण के लिए भूगोल विभाग द्वारा चल रहे भूगोल इको क्लब की जानकारी दी एवं धन्यवाद ज्ञापन दिया. कार्यक्रम में डॉ राजेश कुमार चंदेल, डॉ उपेन्द्र कुमार, डॉ पूजा कुमारी, डॉ विद्या सागर, डॉ विकास आदि की सहभागिता रही.

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Author: SATISH KUMAR

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