बेतिया. नगर निगम बोर्ड की बैठक में हुए हंगामे के बाद अब आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है. बोर्ड की बैठक के दौरान नगर निगम की कार्यशैली पर सवाल उठाये गये थे. इसको लेकर अब मेयर ने पलटवार किया है. जारी प्रेस विज्ञप्ति में मेयर ने कहा है कि बैठक के दर्शक दीर्धा में बैठे लोगों को लेकर मुद्दा बनाया गया, जबकि सच्चाई यह है कि निरक्षर व अति वृद्ध पार्षदों के ही अनुरोध पर उनके विधायी कार्यों के सहयोग के लिए उनके परिजनों को पास जारी किया गया था. इसको अवैध बताना महापौर को मिले अधिकारों का हनन है. जबकि खुद ही पूर्व से बैठक में प्रतिनिधि शामिल होते रहे हैं. महापौर ने प्रेस बयान में कहा कि दर्शक दीर्धा में बैठे लोगों पर सवाल उठाया गया लेकिन अपने साथ आये पर्सनल असिस्टेंट और बॉडीगार्ड को किस नियम के तहत सदन की कार्यवाही का वीडियोग्राफी करने का अधिकार दे दिया गया. महापौर ने कहा कि मेरी अध्यक्षता में हुई बैठक के दौरान मुझे अधिकार है कि मैं सदन में हंगामा कर कार्यवाही में अवरोध पैदा कर रहे एक पार्षद को बाहर जाने का आदेश दे सकती हूं, लेकिन मेरे आदेश को पलट देना क्या यह महापौर को अपने वैधानिक अधिकार का हनन और दायित्व का निर्वहन करने से रोकना नहीं है. बिना किसी पुख्ता प्रमाण के नगर आयुक्त को बार बार लज्जित करना और उन्हें कर्तव्यहीन ठहराना कहां तक जायज है. उन्होंने कहा कि कोई भी पीठासीन पदाधिकारी उस सदन का सर्वोच्च होता है. बावजूद इसके महापौर को सदन के अंदर बोलने से बार बार रोका गया. उन्होंने प्रेस बयान में कहा है कि वें विभाग के मंत्री के साथ-साथ मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री से न्याय की गुहार लगाऊंगी.
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