बहस बाजी में बाधित नहीं करें शहर का विकास, सबको मिले बोलने का मौका: डॉ संजय

नगर निगम के सभागार में बुधवार को महापौर गरिमा देवी सिकारिया की अध्यक्षता में हुई सामान्य बोर्ड की बैठक में जमकर हंगामा हुआ.

बेतिया. नगर निगम के सभागार में बुधवार को महापौर गरिमा देवी सिकारिया की अध्यक्षता में हुई सामान्य बोर्ड की बैठक में जमकर हंगामा हुआ. एक तरफ जहां महापौर पर भेदभाव बरतने का आरोप लगाकर पार्षद संघ के अध्यक्ष एनामुल हक व सचिव कुणाल राज सर्राफ की अगुवाई में प्रदर्शन करते हुए पहुंचें पार्षदों के एक गुट ने जमीन पर बैठकर अपना विरोध प्रकट किया. वहीं दूसरी तरफ मेयर के खिलाफ की गई कथित टिप्पणियों को लेकर दूसरा गुट आक्रोशित दिखा. इसी बीच बैठक में पहुंचें सांसद डॉ संजय जायसवाल ने दोनों गुटों को समझा बुझाकर बैठक की कार्रवाई शुरू कराई. एमएलसी सौरभ कुमार व उप मेयर गायत्री देवी की मौजूदगी में हुई बैठक में सांसद डॉ संजय ने साफ शब्दों में कहा कि बेवजह बहसबाजी में शहर के विकास को बाधित नहीं करें. इससे दूसरे वार्ड पार्षदों को बोलने का मौका नहीं मिलेगा और यह नाइंसाफी होगी. इसलिए क्रम संख्या 1 से लेकर 46 तक सबको अपनी बात रखने का मौका मिलना चाहिए. उनके हस्तक्षेप पर हंगामा शांत हुआ और वार्ड एक से पार्षद अपनी समस्याओं को रखने लगे. इस क्रम में कतिपय महिला और पुरूष पार्षदों ने बीच में हंगामा किया कि दर्शक दीर्घा में कतिपय 20 लोगों को मेयर के हस्ताक्षर से पास देकर बुला लिया गया है. इसमें कुछ लोग पार्षदों के सगे संबंधी भी शामिल हैं. इस पर सांसद ने कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए नगर आयुक्त से दर्शन दीर्धा में बैठे लोगों की सूची मांगी. दो-तीन बार नगर आयुक्त से सूची मांगने के बाद जब सूची उन्हें नहीं मिली तो उन्होंने पदाधिकारी को फटकार लगाते हुए कहा कि उन्हें जल्द सूची दी जाए. सूची की मांग एमएलसी इंजीनियर सौरभ ने भी की. बार-बार उन्हें बैठक में शामिल होने का पत्र दिखाया जा रहा था. मेयर ने पत्र को पढ़कर सुनाया, लेकिन संसद का कहना था कि उन्हें ऑफिस कॉपी चाहिए. अंत में नगर उपयुक्त गोपाल कुमार ने कहा कि कार्यालय के पास सूची उपलब्ध नहीं है. जिस पर संसद भड़क गए और उन्होंने कहा कि बिना कार्यालय की सूचना के कैसे 20 लोग पहुंच गए हैं. यह जानकारी होते ही कई इसमें कई पार्षद प्रतिनिधि शामिल है. सांसद ने कहा कि फिर आरक्षण का क्या लाभ रह जाएगा. जब पार्षद के पति और उनके बच्चे बैठक में शामिल होंगे. इसके बाद दर्जनों पार्षदों ने जोरदार हंगामा किया. जिस पर कई पार्षद प्रतिनिधि वापस लौट गए. सांसद ने कहा कि इसमें कार्यालय की गलती है अगर कोई घटना घटती है तो इसमें मेयर फंस जाएंगी और कार्यालय पल्ला झाड़ लेगा. कार्यालय को हर बात की सूचना और इसकी कॉपी रहनी चाहिए. इसके बाद सांसद व एमएलसी बैठक से निकल गये. हालांकि उनके जाने के बाद बैठक की कार्यवाही चलती रही. बता दें कि बोर्ड की बैठक शुरू होते ही कई पार्षद जमीन पर तख्ती लेकर बैठ गए. इनका आरोप था कि उनके साथ भेदभाव किया जा रहा है इसलिए वह चेयर पर नहीं बैठेंगे. हालांकि सांसद के समझाने पर सभी माने और बैठक की कार्रवाई शुरू हुई. सांसद ने पिछले 8 स्थायी सशक्त समिति की बैठकों की संपुष्टि पर सवाल खड़े किये और नगर निगम प्रशासन ने इन सभी बैठकों की वीडियो रिकार्डिंग तलब की.

——————————

विभागीय मंत्री से करूंगा शिकायत: सांसद

बेतिया नगर निगम देश का एकमात्र नगर निगम है. जहां सामान्य बोर्ड की बैठक में महिला वार्ड पार्षदों के बेटे और पति बैठते हैं. कारण यह दिया जा रहा है कि नगर निगम की मेयर को यह अधिकार है कि वह नगर के बीस सामान्य नागरिकों को प्रोसिडिंग देखने का अधिकार दे सकती हैं. इसी कानून के आड़ में जो वार्ड पार्षद किसी खास के चहते हैं उनके पति और पुत्र न केवल भीतर बैठे थे बल्कि उनके रिश्तेदार, ड्राइवर तक बैठक के भीतर मौजूद थे. मुख्यमंत्री ने देश में सबसे पहले 50 फीसदी आरक्षण पंचायत एवं नगर में महिलाओं को दिया, जो कि ऐतिहासिक है. परंतु उनके आरक्षण का इतना बड़ा मजाक उड़ते मैंने अपने 16 साल के संसदीय जीवन में कभी नहीं देखा है. मैं इसकी शिकायत विभागीय मंत्री और अपर मुख्य सचिव से करूंगा. डॉ संजय जायसवाल, सांसद पश्चिम चंपारण

——-

नहीं मिलती प्रोसेडिंग की कॉपी: एमएलसी

दर्शक पास जारी करने में नियम की धज्जियां उड़ाई जा रही है. इसके अलावें बैठक में जो भी कार्यवाही हो रही है, उसके प्रोसेडिंग की कोई भी कॉपी किसी भी सदस्य को नहीं दी जा रही है. इससे किसी भी सदस्य को योजना की जानकारी नहीं हो पा रही है. ऐसे में वह संपुष्टि कैसे करेंगे. मुझे अखबारों से जानकारी हुई कि मेयर को अपने ही कार्यालय में आने के लिए सुरक्षा व्यवस्था की मांग करनी पड़ रही है, यह कितना हास्यास्पद है. मैं इन सभी मामलों को लेकर सदन में आवाज उठाऊंगा.

इंजीनियर सौरभ, एमएलसी

——————–

विभाग से मिला है पास जारी करने का अधिकार: मेयर

नगर विकास एवं आवास विभाग से जारी निर्देश के मुताबिक 20 आम और खास लोगों को बैठक की कार्यवाही दर्शकदीर्घा में बैठकर देखने का अधिकार महापौर को प्राप्त है. आगे भी आवेदन प्राप्ति के आधार पर किसी भी आम और खास आवेदक के लिए ऐसा किया जायेगा. इसे मुद्दा बनाया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है. जहां तक नगर निगम बोर्ड और सशक्त समिति द्वारा पारित प्रस्तावों की पूरी प्रोसिडिंग नहीं प्राप्त होने की बात है तो दोनों माननीय के यहां प्रोसिडिंग की रिसीविंग दिखाई गई है. संभव है कि इस मामले में किसी भी स्तर पर कोई मानवीय भूल हुई हो. मैने सभी को कार्यवाही की प्रति उपलब्ध कराने पर विशेष ताकीद का निर्देश नगर प्रशासन को दिया है. गरिमा देवी सिकारिया, महापौर

—————–

छह करोड़ के सैरातों के बंदोबस्ती की बोर्ड ने दी स्वीकृति

इधर, भारी गहमा गहमी, तनातनी और आरोप प्रत्यारोप के बीच बुधवार को संपन्न नगर निगम बोर्ड की बैठक में अनेक महत्वपूर्ण प्रस्तावों को नगर निगम बोर्ड द्वारा पारित कर दिया गया. महापौर ने बताया कि बीते वर्ष मात्र एक लाख की जमा राशि वाले नजर बाग पार्क की वर्ष 2025- 26 के लिए होने वाली बंदोबस्ती की सुरक्षित जमा राशि को बढ़ाकर छः लाख कर दिया गया है. वही महापौर ने यह भी बताया कि कुल करीब छः करोड़ राजस्व प्राप्ति वाले नगर निगम क्षेत्र के करीब एक दर्जन सैरातों के बंदोबस्ती संबंधी प्रस्तुत प्रारूप को बोर्ड के द्वारा स्वीकृति देते हुए अगले दिन ही इसकी निविदा जारी करने की कार्रवाई का आदेश दिया है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar News Desk

यह प्रभात खबर का न्यूज डेस्क है। इसमें बिहार-झारखंड-ओडिशा-दिल्‍ली समेत प्रभात खबर के विशाल ग्राउंड नेटवर्क के रिपोर्ट्स के जरिए भेजी खबरों का प्रकाशन होता है।

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >