1. home Hindi News
  2. state
  3. bihar
  4. bettiah
  5. artisans returning from punjab showed new path to small scale industry started construction of modern pebber block in village bihar asj

पंजाब से लौटे कारीगरों ने दिखायी लघु उद्योग की नयी राह, गांव में शुरू किया आधुनिक पेबर ब्लॉक का निर्माण

By Prabhat Khabar Print Desk
Updated Date
आधुनिक पेबर ब्लॉक प्लांट
आधुनिक पेबर ब्लॉक प्लांट
प्रभात खबर

रवि रंक, बेतिया : योगापट्टी अंचल के दियारावर्ती क्षेत्र में गंडक की बाढ़ व कटाव से त्रस्त हो पलायन को विवश दर्जनों परिवार हुनर िदखा कामयाबी हासिल करने लगे हैं. तीन से पांच साल तक हरियाणा के कैथल जिले में बिताने वाले रमेश मुखिया, राधेश्याम पटेल, उमेश मुखिया, धुरंधर मुखिया, रघुनी मुखिया, घुघली बीन, धनंजय यादव, संजय यादव,धर्मेंद्र बीन, संजय कुशवाहा, अमलेश बीन, हरिहर कुशवाहा समेत पेबर ब्लॉक बनाने में दक्ष करीब तीन दर्जन कुशल कारीगर अपने गृह प्रखंड के गोरा गांव में बीते करीब एक माह से जेब्रा, डम्बल, चिड़िया और चेकर जैसे आधुनिक प्रकार व आकार पेबर ब्लॉक का निर्माण दिन-रात एक करके करने लगे हैं. गंडक के कहर व कटाव पीड़ित होने के बाद अपेक्षाकृत सस्ते दर पर मिली बंगलादेशी शरणार्थियों को आवंटित जमीन (हरपुरवा शरणार्थी कॉलोनी के समीप) और भवानीपुर पंचायत के जगदम्बापुर में भी बसे हैं.

पंजाब में रोजाना मिलती थी पांच से सात सौ तक पगार

इन्हीं कारीगरों में शामिल शैलेश चौधरी, कृपा यादव, चंदन पटेल आदि ने बताया कि हरियाणा व पंजाब में रोजाना पांच से सात सौ तक पगार मिल जाती थी. बस इसी कमाई के लिये दशहरा, दीपावली व छठ जैसे त्योहारों में अपने बच्चे, परिवार व मां बाप से मिल पाते थे. कोरोना काल में घर आकर फंस जाने पर कोई चारा नहीं दिख रहा था. बहुरअवा पंचायत के गोरा निवासी संजय उर्फ गुड्डू कुशवाहा, लालबाबू प्रसाद को हम लोगों ने कम पूंजी में पेबर ब्लॉक निर्माण की तरकीब बतायी. फिर तो उन्होंने अपने बगलगीर मित्र लालबाबू प्रसाद, सिरिसिया के अजय कुशवाहा व पिपरपाती के रमेश प्रसाद जैसे मित्रों से विमर्श कर के बिना देर किये काम शुरू कर दिया. महज दो सप्ताह की तैयारी और पंजाब जाकर मशीन व सांचों को लाने में भी करीब 10 दिन में ही ट्रायल शुरू हो गया.

टीम या परिवार की तरह कर रहे हैं काम

हरियाणा के आठ घंटों की शिफ्ट के बराबर पेबर ब्लॉक बनाने का काम यहां सात घंटे में ही पूरा हो जाता है. उद्यमी गुड्डू कुशवाहा ने बताया कि 10-10 कारीगर व मजदूरों की टीम 7 -7 घंटे काम करती है. इन्हीं के बताए दर के अनुसार 10 कारीगरों के टीम की पगार 5400 से 6300 बनती है. सभी लोग एक टीम या परिवार की तरह से काम करते हैं. इतना भुगतान के बावजूद किसी प्रकार से नुकसान हमें भी नहीं है. अपने कारोबार का जीएसटी व पैन भी बनवा लिया है. बिजली का इंडस्ट्रियल कनेक्शन लेने की कार्रवाई प्रोसेस में है. तब तक जेनेरेटर के सहारे काम चल रहा है.

बीडीओ ने कारीगरों और उद्यमी को दी शाबाशी

योगापट्टी के बीडीओ संजीव कुमार उम्दा दर्जे का पेबर ब्लॉक बहुअरवा पंचायत के गोरा गांव में बन रहे होने की चर्चा सुन पहुंचे तो आश्चर्यचकित रह गये. कारीगरों का उत्साह, कार्य व अनुभव की विस्तार से जानकारी ली. उसके बाद उद्यमी संजय कुशवाहा व उनकी टीम को ऐसे रोजगारपरक कार्य व उद्यमी सोच की सराहना की. कामगारों को उचित भुगतान देकर दर्जनों परिवारों के भरण पोषण में सहयोगी बनने को पुण्य का कार्य बताया. लगे हाथ उद्यम में सरकारी सहायता पाने के लिये विहित तरीके से आवेदन करने का भी बीडीओ ने अनुरोध किया.

posted by ashish jha

Share Via :
Published Date
Comments (0)
metype

संबंधित खबरें

अन्य खबरें