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कोरोना के कारण पिता के अंतिम संस्कार में नहीं पहुंच पाया पुत्र

By Radheshyam Kushwaha
Updated Date
Prabhat khabar Digital desk

बेगूसराय. बिहार के बेगूसराय जिले में प्रखंड क्षेत्र के रुदौली पंचायत के भरौल गांव निवासी शिक्षाविद सह समाजसेवी हरिश्चंद्र ईश्वर की हृदय गति रुकने से आकस्मिक मौत शुक्रवार को हो गयी. उनके बेटा अमेरिका में रहता है. कोरोना का दहशत देश के कोने-कोने में इतना फैल चुका है कि विदेश से आने वाले लोगों से डर लग रहा है. इसकी कारण अपने ही पिता के अंतिम संस्कार में पुत्र शामिल नहीं हो सका. ईश्वर के मौत से गांव में मातम छा गया. मौत की खबर सुनते ही क्षेत्र के शिक्षाविद, समाजसेवी, जनप्रतिनिधियों ने उनके आवास पर पहुंच कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी. शिक्षक का पुत्र अमेरिका में पिछले 40 वर्षों से रह रहे हैं.

बताते दें कि मौत की खबर सुनने के बावजूद भी एक भी पुत्र व पुत्री अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो सके. भारत सरकार द्वारा कोरोना महामारी से बचाव के लिए उठाये गये कदम के कारण अंतरराष्ट्रीय उड़ानों रद्द कर दिये जाने तथा अमेरिका सरकार द्वारा उठाये गये सहयोगात्मक कदम के कारण बंद उड़ानों के कारण मुखाग्नि कार्यक्रम में पुत्र शामिल नहीं हो सका. जिस कारण दिवंगत ईश्वर को अंतिम संस्कार में मुखाग्नि भतीजा पंकज ईश्वर ने दी. मौके पर सुभाष कुमार ईश्वर उर्फ कंगन, रामाकांत ईश्वर, संजीव ईश्वर, गौरीशंकर ईश्वर, यशवंत ईश्वर, संजीत कुमार मुन्ना, राकेश कुमार ईश्वर सहित अन्य लोग मौजूद थे.

विदेश से आने वाले लोगों को 15 दिनों तो किसी से मिलने नहीं दिया जाएगा

कोरोना को लेकर राज्य सरकार पूरी तरह से अलर्ट है. विदेश से आने वाले लोगों की जांच की जा रही है. वही 15 दिनों तक लोगों से दूर रखा जाएगा. उनकी पहले जांच की जा रही है. कोरोना वायरस को महामारी घोषित कर दी गई है. इसे संबंधित विभिन्न बिंदुओं की जानकारी लोगों को दी जा रही है. विदेश से लौटने वालों पर नजर रखने के लिये विशेष मॉनिटरिंग से का गठन किया गया है. विदेश से आने वाले लोगों से दूरी बनाकर रहने के लिये लोगों को जागरूक किया जा रहा है. साथ ही उन लोगों से यह भी कहा जा रहा है कि किसी भी गांव में अगर कोई भी व्यक्ति विदेश से आ रहा है तो उसकी सूचना प्रशासन को तत्काल दें, और उसकों घर से बाहर नहीं निकलने की सलाज दें. तिरहुत प्रमंडल के तहत स्वास्थ्य विभाग की ओर से पिछले एक सप्ताह में नेपाल से आने वाले आठ हजार से अधिक लोगों की इंडो-नेपाल बॉर्डर पर स्क्रीनिंग की गई है. इसमें सबसे अधिक रक्सौल बॉर्डर पर स्क्रीनिंग हुई है. आरपीएम प्रशांत कुमार ने बताया कि एक दिन में रक्सौल बॉर्डर पर 15 सौ अधिक लोगों की स्क्रीनिंग करने के साथ बचाव की जानकारी दी जा रही है.

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