90 लाख की राशि से पुलिस लाइन पोखर का जीर्णोद्धार कार्य शुरू

पुलिस लाइन स्थित पोखर का 90 लाख की राशि से मुख्यमंत्री समग्र विकास योजना के तहत बुडको द्वारा जीर्णोद्धार के कार्य का क्रियान्वयन शुरू हो गया है.

बेगूसराय. पुलिस लाइन स्थित पोखर का 90 लाख की राशि से मुख्यमंत्री समग्र विकास योजना के तहत बुडको द्वारा जीर्णोद्धार के कार्य का क्रियान्वयन शुरू हो गया है. इस योजना के तहत पोखर के सतह से 15 मीटर लंबा और 30 मीटर चौड़ी सीढ़ी घाटका निर्माण करना है. साथ ही दक्षिणी तरफ फुटपाथ पर ब्लाक भी लगाना है. ग्रिल गेट भी लगाना है. सीढियों में टाइल्स का उपयोग करना है. पूर्व से उक्त पोखर के पूरब तथा उत्तर किनारा का ही पक्कीकरण है. दक्षिण व पश्चिम किनारा कच्ची था. जिससे लोगों को काफी कठिनाई होती थी. शहर के लोग लोग वर्षों से पुलिस लाइन पोखर के जीर्णोद्धार की वाट जोह रहे थे. पोखर का सिर्फ वैज्ञानिक उपयोग ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक व धार्मिक क्रियाकलाप के लिए भी काफी महत्वपूर्ण है.छठ पूजा के अवसर पर इस पास के विभिन्न वार्ड के लोग इस पोखर पर छठ पूजा करने पहुंचते थे जिससे कुछ कठिनाइयों का सामना करना पड़ जाता था. अब पोखर के जीर्णोद्धार शुरु हो जाने से लोगों में खुशी है.शहर में और भी कई ऐसे तालाब है जो कच्ची हैं. कई पोखरों का सौंदर्यीकरण का कार्य तो नगर निगम के द्वारा पूरी कर ली गयी. परंतु विभिन्न कारणों से एनओसी नहीं मिल पाने के कारण तीन पोखर आज तक पूरी तरह कच्ची है. जिसमें एक पोखर विष्णु शुक्कन टोला स्थित पोखर भी शामिल हैं. उक्त पोखर बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद के अधीन है. उक्त पोखर की भी पक्कीकरण को लेकर जिला प्रशासन समेत संबंधित विभागों को आवश्यक कदम उठाने का लोग लंबे समय से इंतजार कर रहें हैं.

तालाबों को बचाना आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित रखने का है प्रभावी तरीका

पोखर और तालाबों का संरक्षण जलवायु संतुलन, जल सुरक्षा और अर्थव्यवस्था के लिए भी अत्यंत आवश्यक है.पोखर सिर्फ पानी का भंडार नहीं होता बल्कि यह जीवनदायी पारिस्थितिकी तंत्र भी हैं.पोखर भूजल का पुनर्भरण करने की महत्वपूर्ण माध्यम है.तालाब वर्षा जल को संचित करते हैं और उसे धीरे-धीरे जमीन के अंदर रिसने देते हैं, जिससे आसपास के कुओं और ट्यूबवेलों का जल स्तर बना रहता है. सूखे के दिनों में तालाब पेयजल और निस्तार (घरेलू उपयोग) के लिए पानी का एकमात्र स्रोत होते हैं. यह खेती में काफी सहायक होते हैं. किसान अपनी फसलों की सिंचाई के लिए तालाबों के पानी का उपयोग करते हैं. जिससे उत्पादकता बढ़ती है. पोखरों से जैव विविधता का भी संरक्षण होता है. तालाब विभिन्न प्रकार के जलीय पौधों, मछलियों, कीड़ों और पक्षियों के लिए आवास प्रदान करते हैं. जो पारिस्थितिकी तंत्र को समृद्ध बनाते हैं. तालाब भारी वर्षा के दौरान अतिरिक्त पानी को रोककर रखते हैं, जिससे आसपास के इलाकों में बाढ़ की स्थिति कम होती है. पर्यावरण संतुलन और तापमान नियंत्रण में पोखरों का महत्वपूर्ण योगदान है.तालाब स्थानीय तापमान को कम रखते हैं और गर्मियों में आसपास के वातावरण को ठंडा रखने में मदद करते हैं. तालाबों के पौधे पानी से हानिकारक पोषक तत्वों को अवशोषित करते हैं और पानी को प्राकृतिक रूप से साफ करते हैं.

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By MANISH KUMAR

MANISH KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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