बीहट. जिला ओडीएफ घोषित है. अधिकतर पंचायतों से लेकर नगर परिषद निकाय के वार्ड भी ओडीएफ घोषित किये जा चुके हैं. खुले में शौच की शिकायत भी नहीं मिल रही है. बिहार सरकार के स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत नगर व प्रखंड के लगभग सभी घरों में शौचालय उपलब्ध कराये जा चुके हैं. लेकिन इन शौचालयों के सेप्टिक टैंक से निकलने वाले तरल अपशिष्ट पदार्थ के प्रबंधन ने एक गंभीर चुनौती उत्पन्न कर दी है. गांव और शहरों में सेप्टी टैंकर चालक सेप्टिक टैंक का तरल अपशिष्ट निकालकर सड़क किनारे खुले स्थलों पर गिरा देते हैं. इससे पर्यावरण तो दूषित हो ही रहा है, लोगों के स्वास्थ्य के लिए भी खतरा बढ़ने लगा है. यह हाल ग्रामीण से लेकर नगर क्षेत्र का है. इस ओर न तो जिला प्रशासन का ध्यान है न ही जनप्रतिनिधियों का. प्रभात खबर प्रतिनिधि ने नगर परिषद क्षेत्र से लेकर प्रखंड की विभिन्न मुख्य सड़कों की पड़ताल की. इसमें पाया गया कि एनएच 28 और 31 पर सड़क किनारे, खास करके जीरोमाइल ओवर ब्रिज और जीरोमाइल से बीहट के बीच सैप्टिक टैंक चालक शौचालय से निकाल कर अपशिष्ट पदार्थों को बेरोकटोक सड़क किनारे गड्ढों में बहाते हैं. पूछने पर चालक कहते हैं कि दर्जनाधिक में सैप्टिक टैंक हैं जिससे शौचालयों से अपशिष्ट निकाला जा रहा है. शौचालय से निकालने के लिए एक बार में 800 रुपये लेते हैं. कोई भी दिन ऐसा नहीं होता है कि किसी का भी सैप्टिक टैंक घर बैठता होगा. यह भी बात सामने आयी है कि गांव की गलियों से लेकर नगर परिषद के मोहल्लों में जब भी सैप्टिक टैंक पहुंचता है तो उन गलियों में उससे निकलने वाले दुर्गंध से लोग परेशान हो जाते हैं. इतना ही नहीं टैंक भरने के दौरान अपशिष्ट तरल पदार्थ सड़क पर गिरते हैं तो साफ करने की बजाय यूं ही चल देते हैं. विरोध करने पर चालक के साथ टैंक खाली कराने वाले ऑनर भी लडाई-झगडे के लिए तैयार हो जाते हैं. बताते चलें कि इस कार्य में नगर परिषद बीहट के अलावा दर्जनाधिक प्राइवेट सैप्टिक टैंक वाले भी जुड़े है जिन्हें खुलेआम मनमानी पूर्वक सड़क किनारे टंकी खाली करते देखा जा सकता है. जो भूजल और मिट्टी को दूषित तो करता ही है, इससे बीमारी भी फैल सकती है. अधिकारी चाहें तो इसके लिए कानूनी कार्रवाई के तहत खुले में गिराने पर जुर्माना और पंजीकरण अनिवार्य किया जा सकता है.तरल अपशिष्ट का वैज्ञानिक उपयोग कर खाद, बायोगैस और ऊर्जा उत्पादन पर काम की जरूरत : नाम नहीं छापने की शर्त पर एक सामाजिक कार्यकर्ता ने बताया कि प्रखंड और नगर के लगभग सभी घरों में शौचालय बन चुके हैं. लेकिन सेप्टिक टैंक खाली करने के बाद इस तरल अपशिष्ट को खुले में फेंकना स्वच्छता मिशन की सबसे बड़ी समस्या बन गयी है. उन्होंने जिला प्रशासन को इस समस्या से निबटने के लिए कुछ सुझाव दिया है. उनका कहना है कि सेप्टी टैंकर चालकों की बैठक आयोजित हो और तरल अपशिष्ट निस्तारण के लिए सुरक्षित और चिह्नित स्थल निर्धारित किये जाएं. नियमों का पालन करने वाले चालकों को सरकारी प्रोत्साहन और सम्मान देने की व्यवस्था हो. गरीब परिवारों को सुविधा देने के लिए सरकारी सेप्टी टैंकर सेवा शुरू हो. तरल अपशिष्ट का वैज्ञानिक उपयोग कर खाद,बायोगैस और ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा दिया जाये. उन्होंने कहा कि यदि सरकार इन सुझावों पर ध्यान देती है तो बिहार स्वच्छता प्रबंधन में एक नई मिसाल कायम कर सकता है.
स्वच्छता सर्वेक्षण में भारी अंक कटेंगे :
स्वच्छता सर्वेक्षण 2025-26 के नए दिशा निर्देशों और टूलकिट के अनुसार सेप्टिक टैंक से निकलने वाले तरल (सीवेज/स्लज) को सड़क किनारे, खुले नालों या जल निकायों (नदी, तालाब) में फेंकना गंभीर उल्लंघन माना जा रहा है. इस अनुचित निपटान के कारण संबंधित निकाय के स्वच्छता सर्वेक्षण में भारी अंक कटेंगे. सेप्टिक टैंक का तरल सीधे बाहर बहाना इस घटक के नियमों के खिलाफ है. यदि शहर को ओडीएफ या ओडीएफ (खुले में शौच मुक्त) का दर्जा मिला है, तो सेप्टिक टैंक का तरल खुले में बहाने से यह स्टेटस खतरे में पड़ सकता है, जिससे रैंकिंग गिरेगी.क्या कहते हैं बीडीओप्रखंड ओडीएफ घोषित है. ग्रामीण क्षेत्रों में शौचालयों से निकले तरल अपशिष्ट पदार्थ के निस्तारण का सुझाव बेहतर है. इस सुझाव से सरकार को अवगत कराया जायेगा.अनुरंजन कुमार, बीडीओ, बरौनीक्या कहती हैं मुख्य पार्षदनगर परिषद क्षेत्र से घरों के शौचालयों से तरल अवशिष्ट पदार्थ निकाले जाने की सूचना मिल रही है. नगर प्रशासन का प्रयास होगा कि किसी भी कीमत पर नगर क्षेत्र में शौचालयों से निकाले गये तरल अपशिष्ट पदार्थों को सड़क किनारे न गिराने दिया जाये.
बबीता देवी, मुख्य पार्षद, नगर परिषद, बीहट