बेगूसराय. महिला एवं बाल विकास निगम बेगूसराय एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को न्याय सखी (नारी अदालत) विषयक उन्मुखीकरण, प्रशिक्षण कार्यक्रम के आयोजन का शुभारंभ जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव करुणानिधि आर्य ने किया. इस अवसर पर उन्होंने कहा कि समाज एवं परिवार स्तर पर उत्पन्न होने वाले कई छोटे-छोटे विवादों का समाधान आपसी संवाद एवं समझ से संभव है, जिसके लिये न्यायालयीन प्रक्रिया में जाने की आवश्यकता नहीं होती. ऐसे समाधान से समय एवं धन की बचत होती है तथा लोग शीघ्र ही समस्याओं से निजात पा सकते हैं. उन्होंने यह भी बताया कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा संचालित सुलह केंद्र के माध्यम से महिलाओं को निःशुल्क विधिक सलाह उपलब्ध कराई जाती है तथा बलात्कार, मानव तस्करी एवं घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं को आर्थिक सहायता भी प्रदान की जाती है. महिला एवं बाल विकास निगम, बेगूसराय के जिला परियोजना प्रबंधक गौरव हैदर अली खान ने कहा कि महिलाओं के विरुद्ध होने वाली लैंगिक हिंसा को रोकने के लिये परिवार एवं समाज की सक्रिय सहभागिता आवश्यक है. उन्होंने बताया कि बिहार सरकार द्वारा संचालित मिशन शक्ति योजना के अंतर्गत बेगूसराय जिले के पांच पंचायतों धबौली, राजापुर, रतनपुर, पगड़ा एवं सालिमचक में नारी अदालत का गठन किया गया है. नारी अदालत के सदस्य सामाजिक कार्यकर्ता होते हैं, जो लैंगिक हिंसा की रोकथाम, लैंगिक भेदभाव के समाधान, जागरूकता कार्यक्रमों के आयोजन एवं पीड़ित महिलाओं को सहायता प्राप्त करने के लिये मार्गदर्शन प्रदान करते हैं. कार्यक्रम में मणि भूषण मिश्र, केस वर्कर, वन स्टॉप सेंटर, बेगूसराय द्वारा महिला एवं बाल विकास निगम, बिहार की विभिन्न योजनाओं जिला हब फॉर एम्पावरमेंट ऑफ वीमेन, वन स्टॉप सेंटर, शक्ति सदन, पालनाघर, सामाजिक पुनर्वास कोष एवं बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ की विस्तृत जानकारी दी.
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