बेगूसराय. जनवादी लेखक संघ, जिला इकाई, बेगूसराय के द्वारा जनपद के युवा कवि अवध बिहारी का एकल काव्य पाठ- सह समीक्षा गोष्ठी का आयोजन किया गया. यह कार्यक्रम स्थानीय कचहरी चौक स्थित बिहार राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के जिला कार्यालय भवन में किया गया. इसकी अध्यक्षता संगठन के जिलाध्यक्ष डॉ राजेंद्र साह ने की. संचालन सचिव राजेश कुमार ने किया. इस अवसर पर युवा कवि अवध बिहारी ने अपनी पंद्रह कविताओं और तीन गीतों का सस्वर पाठ किया. जिनमें घर और राष्ट्र, घाव, आम की मिठास, रूस-यूक्रेन तथा इजरायल- फिलिस्तीन युद्धों के परिप्रेक्ष्य में प्रेम तुम्हें जाना होगा, प्रेम, परिन्दे, बेटियां, अपने हिस्से का चांद, एकलव्य, हमारा आपस का झगड़ना, ताड़ के पेड़, जलकुम्भी, बाहर बहुत तेज़ गर्मी है, दमकल, खेला होता है, किसान आदि कविताएं और गीत प्रमुख हैं. पठित कविताओं की समीक्षा करते हुए स्थानीय गणेश दत्त महाविद्यालय के हिन्दी प्राध्यापक डॉ अभिषेक कुंदन ने कहा कि जनवादी कविताएं सत्यान्वेषी, तथ्यपूर्ण और जीवन-जगत से सम्बद्ध होती हैं। इस कसौटी पर अवध बिहारी की कविताएं खरी उतरती हैं. इनकी रचनाएं हमें मानवीय मूल्यों को प्रतिष्ठित करने, अपनी विचारधारा के प्रति इमानदार बनने, सादगीपूर्ण जीवन जीने, विनोदप्रिय बनने, मानसिक रूप से स्वस्थ और बौद्धिक रूप से सजग रहने को प्रेरित करती है.. इसी महाविद्यालय के अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो जिक्रुल्लाह खान ने कहा कि अवध बिहारी जी की कविताओं और गीतों में अंतर्राष्ट्रीयता का बोध होता है. इनकी कविताएं स्पष्ट रूप से बताती हैं कि राष्ट्रीयता के केंद्र में मनुष्य होना चाहिये.
अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के जिला कार्यालय में एकल काव्य पाठ सह समीक्षा गोष्ठी आयोजित
जनवादी लेखक संघ के राज्य सचिव कुमार विनीताभ ने कहा कि अवध बिहारी की रचनाएं मौजूदा दौर में दरपेश चुनौतियों के मुकाबले साहस दिखाती हैं और भारतीय संस्कृति में निहित विविधता में एकता के मूल्यों को स्थापित करती हैं. कार्यक्रम के अध्यक्ष और जीडी कॉलेज के हिन्दी विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ राजेंद्र साह ने अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में कहा कि वर्तमान समय साहित्य, समाज, राजनीति और व्यवस्था के संक्रमण का दौर है. राजनीतिक सत्ता का दरबारी साहित्यकार जनपक्षीय शब्द- सर्जक नहीं होता है. अवध बिहारी जी की रचनाओं में जन-पक्षधरता का भाव प्रबल है. सभी रचनाएं अनुभव जनित हैं. इनकी कविताएं मानवीय मूल्यों को स्थापित करती और झूठ- फरेब को उजागर करती हैं. पत्रकार व साहित्यकार प्रवीण प्रियदर्शी, जनवादी लेखक संघ के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ चन्द्रशेखर चौरसिया, वरिष्ठ उपाध्यक्ष अभिनन्दन झा, उमेश कुंवर ””””””””कवि””””””””, अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ के केन्द्रीय कोषाध्यक्ष शशिकांत राय समेत अन्य ने भी समीक्षात्मक टिप्पणी की. इस अवसर पर भुवनेश्वर सिंह, डा० ललिता कुमारी, पुष्पा कुमारी, नवनीता कुमारी, मोहन मुरारी, रामानंद सागर, संजीव फिरोज, मुकेश कुमार, मिथिलेश कान्ति, बब्लू कमल वत्स सहित कई साहित्यप्रेमी मौजूद थे. बिहार राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के जिला मंत्री मोहन मुरारी ने धन्यवाद ज्ञापित किया.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
