जाम व अतिक्रमण से नहीं िमली मुक्ति

बेगूसराय : जाम की समस्या को लेकर जिला प्रशासन बंद एसी कमरों में योजनाएं तो खूब बनाती है परंतु उसके कार्यान्वयन में बरती जा रही शिथिलता की भी कोई मिसाल नहीं. ऐसा कोई दिन नहीं जब मुख्य मार्ग से लेकर बाइपास रूट पर भी गाड़ियों का रेंगना तो दूर पैदल निकल पाना दूभर न हो […]

बेगूसराय : जाम की समस्या को लेकर जिला प्रशासन बंद एसी कमरों में योजनाएं तो खूब बनाती है परंतु उसके कार्यान्वयन में बरती जा रही शिथिलता की भी कोई मिसाल नहीं. ऐसा कोई दिन नहीं जब मुख्य मार्ग से लेकर बाइपास रूट पर भी गाड़ियों का रेंगना तो दूर पैदल निकल पाना दूभर न हो पा रहा है.
ट्रैफिक व्यवस्था के लिये जिम्मेदार लोग सिर्फ दो-चार चौक,चौराहों पर एकाध पुलिस कर्मी की तैनाती कर अपने कर्तव्य का खूब निर्वहण कर रहे हैं. ट्रैफिक व्यवस्था के लिए तैनात पुलिस कर्मी भी ट्रैफिक संचालन के बजाय पान,गुटखा की दुकानों पर या फिर कुछ अवैध वसूली की चाह में अपने मुख्य कर्तव्य से भटके रहते हैं. प्रत्येक चौक-चौराहों पर जाम की वजह से राहगीरों से आपस में कहासुनी से लेकर मारपीट का नौबत आ जाना शहर का आम दिनचार्य हो गया है.
प्रशासन का अतिक्रमण से मुक्ति की पहल महज कोरा वादा :बीते 04 जुलाई को सदर अनुमंडलाधिकारी की अध्यक्षता में यातायात डीएसपी, सदर डीएसपी, उप नगर आयुक्त और परिवहन विभाग के अधिकारियों की एक बैठक बुलायी गयी थी. बैठक में अतिक्रमण मुक्ति व जाम से निजात को राय मसवीरे भी खूब हुए.
योजना भी बनी,और मीडिया के माध्यम से आम जनमानस को यह जानकारी दी गयी कि दो दिनों के अंदर ट्रैफिक चौक से बस स्टैंड तक को अतिक्रमण व जाम से मुक्त कर दिया जायेगा. एक सप्ताह के अंदर शहर के अंदर वन वे रूटों का निर्धारण कर दिया जायेगा .परंतु दो सप्ताह बीत चुके हैं और जिला प्रशासन अभी भी अपनी चीर निद्रा में ही प्रतीत दिख रही है.
वर्ष में एकाध बार चलता है अतिक्रमण मुक्ति अभियान : समाचार पत्रों द्वारा जाम व अतिक्रमण का मुद्दा बनाये जाने पर वर्ष में एकाध बार अतिक्रमण मुक्ति के नाम पर फुटकर विक्रेताओं की दुकानें हटा दी जाती है और समाचार पत्रों में इस अभियान को वाहवाही मिलते ही हफ्ते दस दिन बाद पुनः शुरू हो जाता है सड़कों पर दुकानों का सजना.और जिला प्रशासन कुछ दिनों पहले के किये गये प्रयासों पर ही अपनी पीठ ठपथपाता रह जाता है.
बस पड़ाव से सुव्यवस्थित नहीं होता है बस का परिचालन :आये दिन शहर का राष्ट्रीय राजमार्ग ट्रैफिक चौक से पावर हाउस चौक तक प्रतिदिन जाम की समस्या बनी रहती है. इस वजह से प्रतिदिन मरीजों को डॉक्टर के पास ले जा रही एंबुलेंस गाड़ी जाम में फंसी दिख जाती है.
एनएच पर जाम की मुख्य वजह सड़क के दोनों किनारे अवैध अतिक्रमण के साथ-साथ बस पड़ाव से निकलने वाली बसें व छोटे वाहन का सुव्यवस्थित ढंग से परिचालन नहीं होना है.
अक्सर ऐसा देखा जाता है कि बस पड़ाव से निकलने वाली बसें सड़क किनारे वाहन खड़ी कर मुसाफिरों को गाड़ी में बैठाने की फिराक में दिखते हैं तो वहीं अन्यत्र स्थानों से आने वाली बसें सड़कों पर ही गाड़ी खड़ी कर सवारी उतारने लगते हैं इस वजह से एनएच जाम की स्थिति उत्पन्न हो जाती है.यदि बस पड़ाव से वाहनों का परिचालन व सड़क किनारे का अतक्रिमण समाप्त कराया जाय तो निश्चित रूप से एनएच पर लगने वाली जाम की समस्या समाप्त हो जायेगी.
जाम में फंसा जनजीवन, मरीज रहे हलकान
जिले के दूरदराज व अन्य जिलों से आने वाले रोगी शहर की सीमा में प्रवेश तो कर जाते हैं परंतु उसके बाद डॉक्टर के क्लिनिक तक पहुंचने के लिये ट्रैफिक व्यवस्था की हालत देख परिजनों की परेशानी बढ़ जाती है.
जाम में फंसे एंबुलेंस सायरन देते हुए विवश नजर आते हैं. वहीं फुटकर विक्रेता भी सड़क के फ्लेंक तक पर ठेला और टोकरी लिये कब्जा किये रहते हैं. पुलिस प्रशासन की आती -जाती गाड़ियों का भी इन लोगों में भय नहीं दिखायी देता .
जाम में फंसा जनजीवन सिस्टम को कोसते हुए किसी भी तरह अपने मंजिल की तरफ पहुंचने को बेताब नजर आते हैं. शहर के कालीस्थान चौक, टेढ़ीनाथ मंदिर चौक, कर्पूरी स्थान चौक, कचहरी चौक, मेन मार्केट, विष्ष्णुपुर बाजार तथा ट्रैफिक चौक से पावर हाउस चौक तक के क्षेत्र से गुजरने वाले राहगीरों को एकाध किलोमीटर की दूरी तय करने में घंटों लग जाना आम बात हो गयी है.

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