लाखों की लागत से स्थापित मिनी ग्रामीण जलापूर्ति ठप

संदेश : प्रखंड क्षेत्र के रामासांढ़ गांव में लगभग तीन वर्ष पूर्व लाखों की लागत से स्थापित सोलर ऊर्जा से संचालित मिनी ग्रामीण जलापूर्ति योजना फेल है. तीन वर्ष पूर्व चालू होने के महज कुछ दिनों बाद ही लोगों को पेयजल मिलना बंद हो गया था. इसके लिए लाखों रुपये खर्च कर जगह-जगह बनी पानी […]

संदेश : प्रखंड क्षेत्र के रामासांढ़ गांव में लगभग तीन वर्ष पूर्व लाखों की लागत से स्थापित सोलर ऊर्जा से संचालित मिनी ग्रामीण जलापूर्ति योजना फेल है. तीन वर्ष पूर्व चालू होने के महज कुछ दिनों बाद ही लोगों को पेयजल मिलना बंद हो गया था. इसके लिए लाखों रुपये खर्च कर जगह-जगह बनी पानी की टंकियों में कहीं जानवर बांधे जा रहे हैं, तो कहीं गोबर ठोकने का काम हो रहा है.

इस भीषण गर्मी में लोगों को पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है. ऐसे में सवाल उठता है कि लाखों खर्च करने का क्या फायदा हुआ. इसके लिए जिम्मेदार कौन है. इस संबंध में पूर्व मुखिया बिजेंद्र कुमार मिश्र कहते हैं कि पंचायत का भू-जल स्तर काफी नीचे चला गया है, जिससे लोगों के समक्ष पेयजल की समस्या दिनों दिन गंभीर होती जा रही है.
सरकारी चापाकल मरम्मत के अभाव में बंद पड़े हैं. इस स्थिति में हमारे गांव में सरकार द्वारा लाखों रुपये खर्च कर लगाये सोलर ऊर्जा संचालित मिनी ग्रामीण जलापूर्ति योजना विभागीय लापरवाही के कारण कई वर्षों से बंद है. वहीं उप प्रमुख अतुल रंजन आनंद ने बताया कि ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मिनी ग्रामीण जलापूर्ति योजना के तहत कार्य कराया गया है लेकिन उससे आजतक ग्रामीणों को कुछ लाभ नहीं मिला. यहां सरकारी राजस्व की लूट हुई है, जिसकी जांच होनी चाहिए.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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