कांवर यात्रा में शुद्धि-जल के छिड़काव से संपूर्ण कांवरिया पथ हुआ पवित्र

अजगैबीनाथ धाम से बाबाधाम तक बाबा की डगर यानि संपूर्ण कांवरिया पथ कांवर यात्रा में शुद्धि-जल के छिड़काव से पवित्र हो चुका है.

स्टैंड से कांवर उठाने से पहले सभी श्रद्धालु खुद पर छिड़कते हैं गंगाजल

दीपक चौधरी, कटोरिया

अजगैबीनाथ धाम से बाबाधाम तक बाबा की डगर यानि संपूर्ण कांवरिया पथ कांवर यात्रा में शुद्धि-जल के छिड़काव से पवित्र हो चुका है. चूंकि उत्तरवाहिनी गंगा से कांवर के दोनों गागर में जल भरने के साथ-साथ शिवभक्त कांवर में एक छोटे से पात्र में भी गंगाजल भरकर टांगे रखते हैं, जिसे शुद्धि-जल कहा जाता है. सुल्तानगंज से देवघर की करीब एक सौ किलोमीटर की संकल्प यात्रा के दौरान जब भी चाय, नाश्ता, भोजन, लघुशंका या रात्रि विश्राम के लिए स्टैंड या किसी स्वच्छ स्थल पर कांवर को रखते हैं, तो दुबारा कांवर उठाने से पहले खुद पर शुद्धि जल का छिड़काव भी करते हैं. श्रावणी मेला में प्रतिदिन लाखों की संख्या में कांवरिया मार्ग से होकर श्रद्धालु कांवर यात्रा कर रहे हैं. प्रत्येक श्रद्धालु द्वारा औसतन तीन दिनों की कांवर यात्रा के दौरान करीब बीस से तीस बार शुद्धि जल का छिड़काव किया जाता है. इस विधि से संपूर्ण कांवरिया मार्ग भी शुद्धि जल यानि गंगाजल से पवित्र होता जाता है. इस कारण भी कांवरिया मार्ग पर गंदगी फैलाना वर्जित होता है. ऐसी मान्यता भी है कि जिसके द्वारा भी फैलाए गए गंदगी को लांघकर कांवरिया गुजरते हैं, उसे इसका दोष भी इसी जीवन में भोगना पड़ता है. इधर श्रावणी मेला के ग्यारहवें दिन यानि सावन मास की दूसरी सोमवारी को भी संपूर्ण कांवरिया मार्ग केसरिया वस्त्रधारी भक्तों से गुलजार रहा. ‘बोलबम का नारा है, बाबा एक सहारा है’, ‘बोलबम, बढे कदम’ व ‘हर-हर महादेव’ के नारों व जयकारों से कांवरिया पथ का जंगली पहाड़ी व ग्रामीण इलाका भी गूंजायमान होता रहा.

प्राइवेट धर्मशालाओं व नि:शुल्क सेवा शिविरों में मिल रही राहत

कांवरिया पथ के विभिन्न स्वयं सेवी संगठनों व संस्थाओं द्वारा संचालित प्राइवेट धर्मशालाओं व नि:शुल्क सेवा शिविरों में भी ठहरने वाले कांवरियों की दिन-रात बेहतरीन सेवा की जा रही है. यहां कांवरियों को ठहरने की उत्तम व्यवस्था के अलावा पेयजल, शौचालय, स्नानागार, नींबू चाय, शरबत, ठंडा जल, गर्म पानी, प्राथमिक उपचार के अलावा नाश्ता व भोजन की सेवा भी नि:शुल्क उपलब्ध करायी जा रही है. जिसमें किशनगंज सेवा सदन, छत्तीसगढ़ धर्मशाला, मिथिला आश्रम, नथमल धर्मशाला, असम धर्मशाला, सीवान धर्मशाला, बोलबम सेवा समिति धर्मशाला टोनापाथर अबरखा, व्याहुत कलवार सेवा शिविर पाकुड़, जोगबनी-विराटनगर कांवरिया सेवा शिविर, नि:शुल्क पूर्णिया सेवा शिविर आदि शामिल हैं. विदित हो कि सुल्तानगंज से देवघर के बीच लगभग एक सौ चालीस की संख्या में नि:शुल्क सेवा शिविर व करीब एक दर्जन प्राइवेट धर्मशालाओं का संचालन पूरे सावन मास में होता है. कुछ जगहों पर सालों भर भी सेवा प्रदान की जाती है.

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By DEEPAK KUMAR CHOUDHARY

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