बांका में तेलडीहरा शक्तिपीठ : यहां सच्चे मन से मांगी हर मन्नत होती है पूरी, नवरात्र में उमड़ता है आस्था का सैलाब

Published by : AMIT KUMAR SINH Updated At : 24 May 2026 8:49 AM

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Banka News : बांका का प्रसिद्ध तेलडीहा दुर्गा मंदिर सिर्फ आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि तांत्रिक सिद्धियों का भी बड़ा शक्तिपीठ माना जाता है. यहां नवरात्र में लाखों श्रद्धालु माथा टेकने पहुंचते हैं.

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बांका से चंदन कुमार की रिपोर्ट : बांका जिले का सुप्रसिद्ध तांत्रिक शक्तिपीठ तेलडीहा दुर्गा मंदिर श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र बना हुआ है. बिहार ही नहीं, बल्कि झारखंड, पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में भक्त यहां पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं. खासकर शारदीय नवरात्र के दौरान मंदिर परिसर भक्तों की भीड़ से पूरी तरह गुलजार हो उठता है. मान्यता है कि इस सिद्धपीठ में सच्चे मन से मांगी गई हर मन्नत पूरी होती है, जिसके बाद श्रद्धालु यहां पाठा बलि देकर माता के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट करते हैं.

तांत्रिक विधि से स्थापित है मंदिर

तेलडीहा दुर्गा मंदिर को जिले का प्रमुख तांत्रिक शक्तिपीठ माना जाता है. मंदिर की स्थापना तांत्रिक विधि से मुंड पर की गई थी, जिस कारण इसकी विशेष धार्मिक मान्यता है. तांत्रिक अष्टमी के दिन दूर-दराज से साधक यहां तंत्र-मंत्र की सिद्धि प्राप्त करने पहुंचते हैं. मंदिर के पुजारी श्याम आचार्य के अनुसार प्रतिदिन सुबह मेढ़पति परिवार द्वारा विशेष पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालुओं के लिए मंदिर का पट खोला जाता है. दिनभर भक्त माता भगवती और भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करते हैं, जबकि शाम की आरती के बाद मंदिर का पट बंद कर दिया जाता है.

नवरात्र में अलग-अलग विधियों से होती है पूजा

शारदीय नवरात्र के दौरान यहां बंग्ला पद्धति से विशेष तांत्रिक पूजा की जाती है. नवरात्र के पहले दिन से शुरू होकर अंतिम दिन तक अलग-अलग धार्मिक अनुष्ठान चलते हैं. महाअष्टमी और महानवमी के दिन माता के मेढ़ पर पाठा बलि दी जाती है, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. पूरे नवरात्र में मंदिर परिसर भक्ति, मंत्रोच्चार और श्रद्धा के माहौल से गूंजता रहता है.

शहर के मंदिरों में भी विशेष आयोजन

नवरात्र और विशेष पूजा के अवसर पर शहर के पुरानी ठाकुरबाड़ी, भयहरण स्थान, बाबूटोला स्थित पंचमुखी मंदिर और विजयनगर शनि मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना एवं संध्या महाआरती का आयोजन होगा. विजयनगर शनि मंदिर का पट सुबह 5 बजे श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया जाएगा. वहीं मंदार मधुसूदन मंदिर में भगवान का पंचामृत स्नान, भोग और भव्य आरती का आयोजन किया जाएगा. दोपहर एक बजे से श्रद्धालु भगवान के दर्शन कर सकेंगे.

विजयनगर शनि मंदिर में सुबह-शाम विशेष आरती

विजयनगर स्थित शनि मंदिर का पट श्रद्धालुओं के लिए सुबह 5 बजे खोल दिया जाएगा. यहां सुबह विशेष पूजा-अर्चना के बाद शाम में संध्या महाआरती का भव्य आयोजन होगा. बड़ी संख्या में श्रद्धालु शनि देव के दर्शन और पूजा के लिए पहुंचेंगे. मंदिर परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया है.

शहर के मंदिरों में सुबह से दर्शन शुरू

पुरानी ठाकुरबाड़ी, भयहरण स्थान और बाबूटोला स्थित पंचमुखी मंदिर सहित शहर के अन्य प्रमुख मंदिरों के पट भी सुबह 5 बजे श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे. श्रद्धालु दिनभर पूजा-अर्चना और दर्शन कर सकेंगे. मंदिरों में भक्तों की सुविधा को लेकर विशेष व्यवस्था की गयी है.

मंदार मधुसूदन मंदिर में विशेष धार्मिक अनुष्ठान

मंदार स्थित मधुसूदन मंदिर में भगवान की विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी. सुबह 7:30 बजे पुजारी बिंदेश्वरी उर्फ पटल झा और लक्ष्मण झा द्वारा भगवान का पंचामृत स्नान कराया जाएगा. इसके बाद दोपहर 12 बजे भगवान को भोग लगाया जाएगा. शाम 6 बजे श्रृंगार पूजा और भव्य आरती का आयोजन होगा. वहीं दोपहर 1 बजे मंदिर के पट श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोल दिए जाएंगे.

श्रद्धालुओं में उत्साह का माहौल

विशेष पूजा और आरती को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह देखा जा रहा है. सुबह से ही मंदिरों में भक्तों की आवाजाही शुरू होने की संभावना है. धार्मिक आयोजनों को लेकर मंदिर समितियों ने तैयारी पूरी कर ली है.

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