लॉकडाउन में छूटा रोजगार, गेंदा फूलों ने बदली जिंदगी, अमरपुर के सुबोध बने आत्मनिर्भरता की मिसाल

Success Story of Farmer : लॉकडाउन ने लाखों लोगों की जिंदगी बदल दी. किसी का रोजगार छिन गया, तो किसी ने हालात से लड़कर सफलता की नयी कहानी लिख दी. बांका के अमरपुर निवासी सुबोध मालाकार भी ऐसे ही किसानों में शामिल हैं, जिन्होंने महानगर छोड़ गांव की मिट्टी में मेहनत का बीज बोया और आज गेंदा फूलों की खेती से आत्मनिर्भर बनने की राह पर हैं. हालांकि सफलता के इस सफर में बाजार, सुरक्षा और सरकारी सहायता की कमी अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है.

अमरपुर (बांका) से प्रीतम कुमार की रिपोर्ट

Banka News : अमरपुर नगर पंचायत के नवटोलिया गांव निवासी किसान सुबोध मालाकार ने कोरोना लॉकडाउन के बाद गांव लौटकर गेंदा फूलों की खेती शुरू की और आज क्षेत्र के लिए प्रेरणा बन गए हैं. पश्चिम बंगाल के कोलकाता में फूलों के कारोबार से जुड़े रहे सुबोध ने विपरीत परिस्थितियों को अवसर में बदलते हुए दो बीघा भूमि पर पुष्प खेती की शुरुआत की. उनकी मेहनत रंग लाई और खेतों में खिले हजारों गेंदा फूल अब आत्मनिर्भरता की नई कहानी बयां कर रहे हैं. हालांकि स्थायी बाजार, सरकारी अनुदान और सुरक्षा व्यवस्था के अभाव में उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है.

लॉकडाउन के बाद गांव लौटकर शुरू की नयी राह

सुबोध मालाकार वर्षों तक कोलकाता में रहकर फूलों के व्यापार से जुड़े रहे. कोरोना महामारी के दौरान लागू लॉकडाउन ने उनके रोजगार को प्रभावित कर दिया, जिसके बाद उन्हें अपने पैतृक गांव नवटोलिया लौटना पड़ा. गांव आने के बाद उन्होंने रोजगार के नए विकल्प तलाशने शुरू किए. शुरुआत में वे कोलकाता से फूल मंगाकर स्थानीय बाजारों में बेचने लगे, लेकिन अधिक परिवहन खर्च और कम लाभ के कारण यह व्यवसाय ज्यादा दिन तक नहीं चल सका. इसके बाद उन्होंने स्वयं फूलों की खेती करने का निर्णय लिया और इसी फैसले ने उनकी जिंदगी को नई दिशा दे दी.

दो बीघा खेत से शुरू हुई सफलता की कहानी

सुबोध मालाकार ने लीज पर दो बीघा भूमि लेकर गेंदा फूल की खेती शुरू की. इस कार्य में उनके पुत्र देबू मालाकार भी पूरी निष्ठा के साथ सहयोग कर रहे हैं. पिता-पुत्र की मेहनत का परिणाम है कि आज बुच्ची मोड़ के समीप उनके खेतों में दूर-दूर तक पीले और नारंगी रंग के गेंदा फूल लहलहा रहे हैं. खेतों की खूबसूरती राहगीरों को अपनी ओर आकर्षित करती है और लोग रुककर खेती के बारे में जानकारी भी लेते हैं. यह खेती न केवल उनकी आय का स्रोत बनी है, बल्कि क्षेत्र में पुष्प खेती की संभावनाओं को भी नई पहचान दे रही है.

फूलों की खुशबू के बीच चुनौतियों का सफर

सफलता के बावजूद सुबोध मालाकार की राह आसान नहीं है. उनकी सबसे बड़ी चिंता फसल की सुरक्षा को लेकर है. खेतों की घेराबंदी नहीं होने के कारण उन्हें रातभर जागकर फसल की निगरानी करनी पड़ती है. आवारा पशुओं और अन्य कारणों से फसल को नुकसान पहुंचने का खतरा हमेशा बना रहता है. इसके अलावा खेती में होने वाले अतिरिक्त खर्च भी किसानों की चिंता बढ़ाते हैं. सुबोध का कहना है कि यदि सुरक्षा और आधारभूत सुविधाएं बेहतर हों तो वे और अधिक क्षेत्र में फूलों की खेती कर सकते हैं.

स्थायी मंडी नहीं, उचित कीमत के लिए संघर्ष

फूल तैयार होने के बाद उसकी बिक्री भी किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन जाती है. अमरपुर और आसपास के क्षेत्रों में फूलों की कोई स्थायी मंडी नहीं है. ऐसे में सुबोध को अपनी उपज लेकर भागलपुर की मंडियों तक जाना पड़ता है. वहां भी कई बार उन्हें उचित मूल्य नहीं मिल पाता और मजबूरी में कम कीमत पर फूल बेचने पड़ते हैं. परिवहन खर्च अलग से उठाना पड़ता है, जिससे मुनाफा काफी कम हो जाता है. उनका मानना है कि स्थानीय स्तर पर मंडी की व्यवस्था होने से किसानों को बड़ा लाभ मिल सकता है.

सरकारी सहयोग मिले, तो बदल सकती है तस्वीर

सुबोध मालाकार का कहना है कि यदि सरकार की ओर से अनुदान, तकनीकी सहायता और विपणन की बेहतर व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए तो क्षेत्र में पुष्प खेती का तेजी से विस्तार हो सकता है. उनका मानना है कि अमरपुर और आसपास के इलाकों की भूमि तथा जलवायु फूलों की खेती के लिए पूरी तरह अनुकूल है. उचित मार्गदर्शन और प्रोत्साहन मिलने पर बड़ी संख्या में किसान पारंपरिक खेती के साथ-साथ पुष्प खेती अपनाकर अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं.

अब और बढ़ायेंगे खेती का दायरा

गेंदा फूल की खेती से मिले सकारात्मक परिणामों से उत्साहित होकर सुबोध मालाकार ने दो बीघा अतिरिक्त भूमि भी लीज पर ले ली है. यहां जल्द ही नई फसल लगाने की तैयारी चल रही है. उनका यह कदम दर्शाता है कि वे कठिनाइयों के बावजूद भविष्य को लेकर आशावादी हैं और खेती को बड़े स्तर पर विकसित करना चाहते हैं. उनकी सफलता आसपास के किसानों और युवाओं को भी नई दिशा दे रही है.

ग्रामीण युवाओं के लिए प्रेरणा बने सुबोध

स्थानीय लोगों का मानना है कि सुबोध मालाकार जैसे किसान ग्रामीण युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं. उनका उदाहरण बताता है कि खेती और उससे जुड़े व्यवसायों में भी बेहतर भविष्य बनाया जा सकता है. ग्रामीणों का कहना है कि यदि सरकार पुष्प खेती को बढ़ावा देने के लिए विशेष योजनाएं शुरू करे, किसानों को अनुदान उपलब्ध कराए और विपणन की मजबूत व्यवस्था करे तो अमरपुर क्षेत्र भविष्य में फूल उत्पादन के बड़े केंद्र के रूप में उभर सकता है. सुबोध की कहानी यह साबित करती है कि मेहनत, नवाचार और दृढ़ संकल्प के बल पर गांव की मिट्टी में भी सफलता की नई इबारत लिखी जा सकती है.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Author: AMIT KUMAR SINH

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.

Read More

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >