भीषण गर्मी में बढ़ी घड़ा-सुराही की मांग, डिजाइनर लुक का क्रेज

तपती गर्मी के बीच प्यास बुझाने के लिए देसी फ्रिज कहे जाने वाले मिट्टी के घड़े और सुराही की मांग अचानक बढ़ गयी है.

गौरव कश्यप, पंजवारा. तपती गर्मी के बीच प्यास बुझाने के लिए देसी फ्रिज कहे जाने वाले मिट्टी के घड़े और सुराही की मांग अचानक बढ़ गयी है. बाजारों में इन पारंपरिक बर्तनों की दुकानों पर फिर से रौनक लौट आई है. कुम्हार दिन-रात मेहनत कर घड़े और सुराही तैयार कर रहे हैं, लेकिन बढ़ती लागत उनके सामने बड़ी चुनौती बनकर खड़ी हो गयी है.

मिट्टी महंगी, लागत में हुई वृद्धि

कुम्हारों के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में कच्चे माल की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है. पहले जो मिट्टी 300 रुपये प्रति ट्रॉली मिलती थी, अब उसके लिए 600 से 800 रुपये तक चुकाने पड़ रहे हैं. इसके अलावा, लगभग 30 प्रतिशत मिट्टी सफाई में ही नष्ट हो जाती है. इसका सीधा असर कीमतों पर पड़ा है. जो घड़ा पहले 10 से 20 रुपये में मिलता था, अब 120 से 150 रुपये तक बिक रहा है, जबकि छोटी सुराही 70 से 80 रुपये में उपलब्ध है.

डिजाइनर और टोटी वाले घड़ों की बढ़ी मांग

बदलते समय के साथ कुम्हारों ने अपने उत्पादों में भी बदलाव किया है. अब बाजार में पेंटिंग वाले आकर्षक घड़े और टोटी लगे घड़ों की मांग अधिक हो गई है. 140 रुपये से 300 रुपये तक के विभिन्न डिजाइन और आकार के घड़े उपलब्ध हैं. विशेषकर दुकानों और कार्यालयों में टोटी वाले घड़े अधिक पसंद किए जा रहे हैं, क्योंकि इनमें से पानी निकालना आसान होता है.

फ्रिज के कारण कारोबार हो रहा प्रभावित

गांवों तक बिजली की बेहतर पहुंच और फ्रिज के बढ़ते उपयोग ने इस पारंपरिक व्यवसाय को बड़ा झटका दिया है. कुम्हारों का कहना है कि पहले की तुलना में उनका कारोबार 60 से 70 प्रतिशत तक घट गया है. आधुनिक सुविधाओं की ओर लोगों का झुकाव बढ़ने से मिट्टी के बर्तनों की मांग प्रभावित हुई है.

स्वास्थ्य जागरूकता बना सहारा

हालांकि गिरावट के बावजूद, स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोग अब भी घड़े के पानी को प्राथमिकता दे रहे हैं. मिट्टी के बर्तनों में रखा पानी प्राकृतिक रूप से ठंडा रहता है और इसे शरीर के लिए लाभकारी माना जाता है. यही कारण है कि बाजारों में अब भी घड़ा और सुराही खरीदने वालों की अच्छी संख्या देखी जा रही है. कुम्हारों को उम्मीद है कि गर्मी बढ़ने के साथ बिक्री में और तेजी आएगी.

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By GOURAV KASHYAP

GOURAV KASHYAP is a contributor at Prabhat Khabar.

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