Banka Vigilance Action: बांका जिले में सरकारी कामकाज में रिश्वतखोरी के खिलाफ निगरानी विभाग की कार्रवाई ने पिछले तीन माह में लगातार सुर्खियां बटोरी हैं. एक के बाद एक ट्रैप और छापेमारी की कार्रवाई से सरकारी तंत्र में खलबली मची हुई है. जून से सितंबर के बीच निगरानी टीम ने जिले से जुड़े मामलों में सात बड़ी कार्रवाइयां की हैं. कहीं अधिकारी रिश्वत की रकम लेते पकड़े गये, तो कहीं आय से अधिक संपत्ति के मामले में एक साथ कई ठिकानों पर छापेमारी हुई.
इन कार्रवाइयों में बिजली विभाग के एसडीओ से लेकर अंचल अमीन और सीओ तक निगरानी के निशाने पर आये. जिला परिषद कार्यालय में रिश्वत के बड़े लेनदेन का मामला सामने आया, वहीं लघु सिंचाई विभाग के कार्यपालक अभियंता से जुड़े ठिकानों पर भी एक साथ कार्रवाई की गयी. सबसे हालिया कार्रवाई चांदन सीओ रविकांत कुमार की गिरफ्तारी है.
1 जून : 20 हजार रुपये लेते विद्युत एसडीओ गिरफ्तार
एक जून को रजौन में पदस्थापित बिजली विभाग के एसडीओ विजेंद्र कुमार को 20 हजार रुपये रिश्वत लेते निगरानी टीम ने गिरफ्तार किया था. एसडीओ के खिलाफ रिश्वत मांगने की शिकायत मिलने के बाद निगरानी टीम ने शिकायत का सत्यापन कराया और योजनाबद्ध तरीके से ट्रैप की कार्रवाई की.
रिश्वत की राशि लेते ही टीम ने एसडीओ को पकड़ लिया. इस कार्रवाई के बाद जिले में सरकारी काम के बदले रिश्वत लेने वाले कर्मियों के बीच निगरानी की सक्रियता चर्चा में रही.
2 जून : जमीन की पैमाइश के नाम पर अमीन गिरफ्तार
पहली कार्रवाई के अगले ही दिन दो जून को भूमि से जुड़े मामले में चांदन अंचल के अमीन आदित्य कुमार को निगरानी टीम ने साढ़े आठ हजार रुपये घूस लेते गिरफ्तार किया.
शिकायत के अनुसार जमीन की पैमाइश और अंचल से जुड़े कागजी काम के बदले रिश्वत की मांग की जा रही थी. शिकायत के बाद निगरानी टीम ने कार्रवाई की और अमीन को रिश्वत की राशि लेते पकड़ लिया.
30 जुलाई : कार्यपालक अभियंता के पैतृक गांव में छापेमारी
30 जुलाई को आय से अधिक संपत्ति जमा करने के मामले में सासाराम के लघु जल संसाधन विभाग के कार्यपालक अभियंता अरविंद कुमार चौधरी से जुड़े मामले में कार्रवाई हुई. निगरानी टीम ने रजौन प्रखंड स्थित उनके पैतृक गांव पीपराडीह में छापेमारी की.
यह कार्रवाई सीधे रिश्वत लेते पकड़ने के बजाय आय से अधिक संपत्ति से जुड़े मामले में की गयी, जिससे निगरानी जांच का दायरा सामने आया.
3 अगस्त : जिला परिषद कार्यालय में 1.26 लाख का ट्रैप
तीन अगस्त को बांका जिला परिषद कार्यालय में निगरानी टीम ने अचानक दबिश दी. यहां 1.26 लाख रुपये के रिश्वत लेनदेन के दौरान सेवानिवृत्त जेई ओमप्रकाश मंडल और उनके भाई नाइट गार्ड जागेश्वर मंडल को रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया.
बताया गया कि रिश्वत की राशि नाइट गार्ड के माध्यम से ली जा रही थी. जिला परिषद कार्यालय में हुई इस कार्रवाई ने सरकारी कार्यालयों में बिचौलियों और माध्यम के जरिये होने वाले कथित लेनदेन पर भी सवाल खड़े किये.
11 अगस्त : बांका, पटना और वैशाली के चार ठिकानों पर छापेमारी
11 अगस्त को निगरानी की विशेष टीम ने बांका में पदस्थापित लघु सिंचाई विभाग के कार्यपालक अभियंता हरेंद्र कुमार से जुड़े बांका, पटना और वैशाली के चार अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की.
कार्रवाई के दौरान बेनामी संपत्तियों, बैंक खातों और अचल संपत्ति से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किये गये. एक साथ कई स्थानों पर हुई इस कार्रवाई से जांच की गंभीरता का अंदाजा लगाया गया.
1 सितंबर : फुल्लीडुमर सीओ और मामा गिरफ्तार
एक सितंबर को निगरानी टीम ने फुल्लीडुमर सीओ अमित प्रताप सिंह को 75 हजार रुपये घूस लेते गिरफ्तार किया. घूस की रकम लेते हुए उनके मामा बच्चन कुमार, ग्राम झपनियां-बौंसी, को भी गिरफ्तार किया गया.
इस कार्रवाई में रिश्वत की रकम अधिकारी तक पहुंचाने में कथित तौर पर परिवार के सदस्य की भूमिका सामने आयी, जिसके बाद दोनों को निगरानी टीम ने गिरफ्तार किया.
9 सितंबर : चांदन सीओ 20 हजार की पहली किश्त लेते गिरफ्तार
निगरानी विभाग की सबसे ताजा कार्रवाई नौ सितंबर बुधवार शाम चांदन में हुई. पटना से पहुंची विशेष निगरानी टीम ने चांदन सीओ रविकांत कुमार को तय रिश्वत की पहली किश्त के रूप में 20 हजार रुपये लेते गिरफ्तार कर लिया.
यह कार्रवाई रैयत सियाराम यादव, ग्राम मौरवे टोला झाझा, की ओर से दर्ज शिकायत के आलोक में की गयी. गिरफ्तारी के बाद निगरानी टीम सीओ को अपने साथ पटना ले गयी.
चांदन अंचल में तीन माह में दूसरी कार्रवाई
बांका की सात कार्रवाइयों में चांदन अंचल की दो कार्रवाई खास तौर पर चर्चा में हैं. पहले दो जून को अंचल अमीन आदित्य कुमार को रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया था. अब नौ सितंबर को चांदन सीओ रविकांत कुमार भी निगरानी के ट्रैप में पकड़े गये.
यानी एक ही अंचल में करीब तीन महीने के भीतर निगरानी की दो कार्रवाई सामने आयी हैं. इससे अंचल स्तर पर सरकारी कामकाज में रिश्वत संबंधी शिकायतों को लेकर निगरानी की सक्रियता का अंदाजा लगाया जा सकता है.
शिकायत से ट्रैप तक, निगरानी की कार्रवाई पर नजर
पिछले तीन माह की इन कार्रवाइयों में रिश्वत मांगने की शिकायतों के बाद ट्रैप, कार्यालय में दबिश और आय से अधिक संपत्ति से जुड़े मामलों में छापेमारी जैसे अलग-अलग तरीके अपनाये गये हैं. इससे सरकारी काम के बदले रिश्वत मांगने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों पर निगरानी विभाग की कार्रवाई का दबाव बढ़ा है.
हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि जिले के विभिन्न विभागों में अभी भी लेन-देन की शिकायतें सामने आती रहती हैं. ऐसे में लोगों की नजर अब इस बात पर है कि निगरानी विभाग आने वाले दिनों में किन मामलों पर कार्रवाई करता है और क्या इन कार्रवाइयों का असर सरकारी कार्यालयों में आम लोगों के कामकाज पर पड़ता है.
Banka Vigilance Action: लगातार कार्रवाई से क्या संदेश?
तीन महीने में सात कार्रवाई का सिलसिला सरकारी तंत्र के लिए स्पष्ट संदेश माना जा रहा है कि रिश्वतखोरी की शिकायतों को नजरअंदाज नहीं किया जा रहा है. खासकर ट्रैप की कार्रवाई में अधिकारियों और कर्मचारियों की गिरफ्तारी से यह भी सामने आया है कि शिकायत मिलने के बाद निगरानी विभाग सत्यापन और कार्रवाई की प्रक्रिया अपना रहा है.
अब स्थानीय लोगों की उम्मीद है कि इन कार्रवाइयों के साथ सरकारी कार्यालयों में पारदर्शिता और जवाबदेही भी मजबूत होगी, ताकि जरूरी काम के लिए आम लोगों को कथित रूप से रिश्वत या बिचौलियों का सहारा न लेना पड़े.
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