बांका से मदन कुमार की रिपोर्ट.
Banka Mandi : बांका की मंडियों में खाद्यान्न के दाम फिलहाल स्थिर बने हुए हैं, लेकिन हरी सब्जियों, आलू, प्याज और मौसमी फलों के दामों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. व्यापारियों का कहना है कि बढ़ती परिवहन लागत और महंगाई का असर बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है. खासकर आम और लीची के दाम आवक के अनुसार प्रतिदिन बदल रहे हैं, जिससे खरीदार और विक्रेता दोनों असमंजस की स्थिति में हैं.
बढ़ती ढुलाई लागत ने बढ़ाई चिंता
बांका की मंडी में अधिकांश खाद्यान्न और अन्य जिंसों की आपूर्ति पूर्णिया के गुलाबबाग और कोलकाता की मंडियों से होती है. पिछले कुछ महीनों में डीजल की कीमत और लंबी दूरी के कारण परिवहन खर्च बढ़ा है. इसका सीधा असर बाजार में पहुंचने वाली वस्तुओं की कीमत पर पड़ रहा है.
व्यापारियों का कहना है कि खाद्यान्न की आवक सामान्य होने के कारण गेहूं, चावल और दालों के भाव में बड़ी बढ़ोतरी नहीं हुई है, लेकिन परिवहन और मजदूरी खर्च बढ़ने से कीमतों में कमी की संभावना भी फिलहाल नहीं दिख रही है.
महंगाई ने बढ़ाया घरेलू खर्च
बाजार में सब्जियों, फलों और रोजमर्रा की जरूरत की वस्तुओं की कीमतें बढ़ने से घरेलू बजट प्रभावित हुआ है. लोगों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में रसोई का खर्च काफी बढ़ गया है. खासकर मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों पर इसका असर अधिक पड़ रहा है.
आलू और प्याज के दामों में भी लगातार बदलाव देखने को मिल रहा है. वहीं हरी सब्जियों की कीमतें मौसम और आवक के आधार पर तय हो रही हैं.
फलों के बाजार में रोज बदल रहे भाव
गर्मी के मौसम में आम और लीची की मांग बढ़ी हुई है. हालांकि इन फलों के दाम स्थिर नहीं हैं. व्यापारियों के अनुसार मंडी में जितनी आवक होती है, उसी के आधार पर रोज कीमतें तय होती हैं. कभी दाम बढ़ जाते हैं तो कभी गिरावट दर्ज की जाती है.
जानिए आज के प्रमुख भाव
स्थानीय कारोबारियों के अनुसार गेहूं 2600 से 2650 रुपये प्रति क्विंटल, मक्का 2100 से 2150 रुपये, मंसूरी चावल 3250 से 3400 रुपये और अरवा मोटा चावल 3100 से 3250 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा है. बासमती चावल का भाव 12500 से 13500 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंचा हुआ है.
दालों में मसूर 6000 से 6550 रुपये, मूंग दाल 9540 से 9600 रुपये और अरहर दाल 11500 से 15000 रुपये प्रति क्विंटल बिक रही है. वहीं आलू 1200 से 1450 रुपये और प्याज 1800 से 1900 रुपये प्रति क्विंटल के बीच कारोबार कर रहा है.
अभी राहत की उम्मीद कम
व्यापारियों का मानना है कि जब तक ढुलाई और अन्य परिचालन लागत में कमी नहीं आती, तब तक खाद्यान्न और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों में बड़ी राहत मिलने की संभावना कम है. ऐसे में आने वाले दिनों में भी बाजार की नजर आवक और परिवहन लागत पर बनी रहेगी.
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