कब्जे की गयी जमीन गैर मजरूआ खास
सीओ ने कहा जांचोपरांत अवैध जमाबंदी को निरस्त करने की अनुशंसा की जा सकती है
बाराहाट : थाना क्षेत्र के चिलिमल गांव निवासी पंकज चौधरी द्वारा एमएलसी मनोज यादव पर जमीन हड़पने के आरोप की जांच में नया खुलासा हुआ है. अचंलाधिकारी द्वारा जांच में उक्त जमीन को लेकर जो तथ्य उभर कर सामने आ रहे हैं, उसके मुताबिक उभय पक्षों ने कुछ सरकारी कर्मचारियों एवं अधिकारियों की मिली भगत से गैर मजरूआ खास जमीन की अवैध जमाबंदी करा कर उसे अपने नाम करवा लिया. बाद में इसे अपनी पैतृक संपत्ती बता कर कई लोगों के पास बेचने का काम किया.
मामले को लेकर बुधवार को अंचल कार्यालय में पूरे गहमा गहमी के माहौल में जमीन के कागजात की जांच परख की गयी. जिसमें उक्त जमीन की जो वर्ष 1905 के मुताबिक खाता 238 खेसरा 4293 एवं 4294 में कुल 73 डीसमिल जमीन गैर मजरूआ खास दर्ज है. जो आगे चल कर वर्ष 1960-61 के रजिस्टर दो में तत्कालिन सीओ और कर्मचारी के सहयोग से कुल जमीन नरसिंह चौधरी को बंदोबस्त कर दिया गया. बाद में उनके पुत्र योगेंद्र चौधरी ने उसे पंकज चौधरी एचं अन्य के साथ बेचना शुरू किया. इस मामले में अंचल कार्यालय के सूत्रों की मानें तो एक साथ इतने बड़े पैमाने पर किसी एक व्यक्ति को जमीन बंदोबस्त करने का कोई नियम नहीं है. इस पर भी बंदोबस्त की गयी जमीन को बेचा गया, जो कानूनी अपराध है.
इस सिलसिले में अंचलाधिकारी ने बताया कि जांचोपरांत संबंधित जमाबंदी को निरस्त करने की अनुशंसा की जा सकती है. जानकार बताते हैं कि वर्तामन समय में जिस जमीन पर विवाद चल रहा है. उससे कभी आसपास के किसानों का सैकड़ों एकड़ में लगी फसल को पानी दिया जाता था. उस वक्त जमीन बांध के रूप में था. इसे लोगों ने अपनी पैतृक संपत्ति बता कर उसे चहारदीवारी देकर घेर रखा है.
