घरों में दुबके लोग. दिन निकलते ही तेजी से बढ़ने लगता है तापमान
तापमान में तेजी से वृद्धि होने के कारण लोगों की परेशानी बढ़ गयी है. दिनभर उमस भरी गरमी के बीच पछुआ हवा का सिलसिला जारी रहता है. विभिन्न चिकित्सकों के क्लिनिक में लू के मरीजों की तादाद काफी बढ़ गयी है.
बांका : जिले का पारा 42 डिग्री के पार हो गया है. इन दिनों तेज चिलचिलाती धूप के साथ-साथ लू भी चल रही है. दिन निकलते ही सूर्य का तापमान चढ़ने लगता है. दोपहर आते-आते पारा 42 डिग्री तक आ जाती है. दिन भर उमस भरी गरमी के बीच तेज पछुआ हवा का सिलसिला भी शुरू हो जाता है. जो देर शाम तक एक समान बनी रहती है. इस मौसम में लोगों का जीना मुहाल हो गया है. शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र की आबादी भीषण गरमी के चपेट में है. तेज धूप और चल रही लू के कारण दिन लोग अपने-अपने घरों में दुबक जाते हैं. दोपहर के वक्त शहर की सभी सड़के सुनी पड़ जाती है. ऐसे मौसम में घरों में पंखे की हवा भी काम नहीं आ रहा है. साथ ही साथ इन दिनों लोग लू और गरमी के चपेट में आकर अक्सर बीमार पड़ रहे है.
अस्पताल व नसिंग होम में बढ़ा मरीज
इन दिनों चल रही तेज धूप ने अक्सर लोग बीमार पड़ रहे है. अधिकतर लोग कै-दस्त के शिकार व लू के भी चपेट में आ रहे है. इसको लेकर शहर के विभिन्न नीजी चिकित्सक व सरकारी अस्पतालों में मरीजों का भीड़ लगने लगा है.
वहीं ग्रामीण इलाके में भी लोग ग्रामीण चिकित्सक के पास अपना उपचार करवा रहे है. उधर अस्पताल की बात करे तो प्रतिदिन करीब दर्जनों लू के मरीज उपचार के लिए यहां पहुंच रहे है. अमूमन पूर्व में अस्पताल में डिहाईड्रेशन का मरीज कम आता था. लेकिन विगत एक सप्ताह से इसके रोगियों की संख्या में काफी वृद्धि हुई है. अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार प्रतिदिन ऐसे मरीजों की संख्या 60 से 70 तक हो गयी है. वहीं लू के मरीजों में भी वृद्धि हुई है. शुक्रवार को लू से शिकार दो दर्जन मरीज अस्पताल पहुंचे थे. जिसमें एक दर्जन महिला और छोटे बच्चें शामिल है. वहीं शहर के लगभग सभी नसिंग होम में इन मरीजों स्लाइन चढ़ाते देखा जा रहा है. वहीं नसिंग होम के सभी बेड हाउसफूल है.
-लू से बचने के लिए बरते सावधानी
गर्मी के मौसम में लापरवाही के कारण शरीर में निर्जलीकरण, लू लगना, चक्कर आना, घबराहट होना, नकसीर आना, उल्टी-दस्त, घमौरियां जैंसी कई समस्या हो रही है. लोगों को गर्मी के मौसम में सूती हल्के रंग के कपड़े पहनना चाहिये. गर्मी के मौसम में चमकदार भड़कीले और चटक रंग वाले कपड़े गर्मी को अवशोषित करते हैं. जिससे शरीर की त्वचा जलने लगती है. खास कर पूरी गर्मी में सूती कपड़े पहनना चाहिये. यदि सूती कपड़े उपलब्ध न हो तो ऐसे कपड़े चुने जिसमें सूती का अंश अधिक हो. यात्रा करने के समय लोगों को चेहरा और सर को रूमाल या साफे से ढंक कर ही घर से निकले.
लू से बचने के लिए ज्यादा भारी या बासी भोजन का नहीं करें सेवन
गरमी में ज्यादा भारी या बासी भोजन लोगों को नहीं करना चाहिए. भारी खाना और जरूरत से ज्यादा खाने से उल्टी दस्त की शिकायत हो सकती है. गरमी में गरम मसालों का उपयोग लौंग, जायफल, दालचीनी का उपयोग कम से कम करें. गर्मी में जब घर से निकलें कुछ खाकर और पानी पीकर ही निकलें, खाली पेट तो बिलकुल नही. बाजार की ठंडी चीजे नहीं, बल्कि घर की बनी ठंडी चीजों का ही सेवन करना चाहियें. जैंसे- कैरी का पना, नीबू पानी, फलों का रस, संतरे का सरवत, सत्तू, दही की लस्सी, गुलकंद आदि का सेवन करना चाहिये. हरी ताजी सब्जियों जैसे कि लौकी, ककडी, खीरा, पालक, पुदीना, नीबू, तरबूज, नेनुआ आदि का सेवन अधिक से अधिक करना चाहिये.
बांका : मई माह आरंभ होते ही जिले भर का तापमान चरम पर आ गया है. पारा चढ़कर 41 के पार हो गया है. कड़ी धूप के बीच लोग लू के भी शिकार होने लगे है. इससे बचने के लिए लोग शीतल पेय पदार्थ का अधिक से अधिक सेवन कर रहे है. शहर में इन दिनों ठंडे पदार्थ की बिक्री तेज हो गयी है. वहीं इस मौसम को देख कर स्कूल जाने वाले छोटे-छोटे बच्चे भी अपने चेहरे को कपड़ा से ढ़क कर निकलते है. शुक्रवार को न्यूतम 24 अधिकतम 42 डिग्री का तापमान रहा. कड़ी धूप को देख कर दोपहर में बहुत कम ही लोग मार्केट में नजर आते थे. वहीं इस तरह के मौसम में लोग तारबूज, सत्तू, आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक, खीरा, गन्ना का रस, आम का सरबत, नींबू पानी सहित अन्य चीज का सेवन ज्यादा करते नजर आ रहे है. शहर के भिन्न चौक चौराहे के समीप ठेला पर लगी दुकान को देख कर लोगों पहुंच जाते हैं. जो कड़ी धूप से बचने के लिए ठंडे पदार्थ जैसी चीजों को ज्यादा पसंद करते है. वहीं चालक भी धूप से बचने के लिए चश्मा,मुंह मे कपड़ा ढ़ंक कर अपनी यात्रा करते हैं. उधर चिलचिलाती धूप को देख कर लोग पंखा, कूलर, फ्रिज, मिट्टी के घड़ा, सुराही सहित अन्य चीजों के खरीदारी करने में जुट गये हैं.
