दुखद स्थिति . िरक्शा शेड में खुली हैं दुकानें
शहर में वीर कुंवर सिंह मैदान व शास्त्री चौक के समीप नेहरू रोजगार योजना अंतर्गत तत्कालीन नगर पंचायत द्वारा बनाया गया रिक्शा पड़ाव दबंग अतिक्रमणकारियों की भेंट चढ़ गया है.
बांका : गरमी के मौसम में लोग छांव पाने के लिए पेड़ आदि के सहारे लेते हैं लेकिन दो वक्त की रोटी के लिए पहिये की तरह जिंदगी चलायमान करने वाले लोगों को यहां छांव का कोई साधन नहीं है. विडंबना यह है कि सामाजिक आर्थिक पायदान पर सबसे निचले क्रम पर खड़े रिक्शा चालकों के लिए पूरे शहर में कहीं कोई आशियाना नहीं है. तेज धूप हो या बरसात या फिर कड़ाके की ठंड इन्हें सिर छुपाने की जगह नहीं मिलती है. इन्हें चंद लम्हों का आराम देने के लिए शहर में वीर कुंवर सिंह मैदान एवं शास्त्री चौक के समीप नेहरू रोजगार योजना अंतर्गत तत्कालीन नगर पंचायत द्वारा रिक्शा पड़ाव तो बना लेकिन वह भी दबंग अतिक्रमणकारियों की भेंट चढ़ गया.
ऐसे में दूर-दराज गांव से शहर पहुंचे रिक्शा चालकों की मुश्किलों को समझा जा सकता है. दर्द तो तब और बढ़ जाता है जब आंखों के सामने अपने ही बसेरे पर अवांछित तत्वों का कब्जा देखते हैं. आर्थिक रूप से विपन्न होने की वजह से प्रतिकार की ताकत भी क्षीण हो चुकी है. फरियाद करें तो करें किससे, यहां तो कानून व्यवस्था के अस्तत्व का भी बच पाना मुश्किल लग रहा है.
शहर के कन्या मवि के समीप बना रिक्शा पड़ाव का हाल : इस पड़ाव का हाल यह है कि इसकी दिवारों पर बड़े और मोटे अक्षर में रिक्शा पड़ाव तो अंकित है. लेकिन यह पड़ाव अब होटल में तब्दील हो गया है. पड़ाव के आधे हिस्से में होटल चलाया जा रहा है. यहां न तो यात्रियों के बैठने की जगह है न ही रिक्शा और ऑटो चालकों के लिए विश्रम करने का जगह है.जबकि इसके ठीक सामने प्रतिदिन सैकड़ों रिक्शा खड़ी रहती है. लेकिन रिक्शा चालकों के लिए जगह नहीं है.
शास्त्री चौक के समीप बने रिक्शा पड़ाव का हाल : शास्त्री चौक के समीप रिक्शा पड़ाव में अब चाय-पान व नाश्ता की दुकान अवैध रूप से चला रहे है. इसके बाद अगर कुछ जगह बचा भी है तो चार पहिये वाहन का गायराज बना रखा है. जिस कारण रिक्शा चालक अपने रिक्शा पर ही विश्राम करने को विवश हैं. ऐसे में यहां दिन रात रहने वाले रिक्शा चालकों एवं यात्रियों को चैन की सांस लेने के लिए एक पल का भी आसरा इस रिक्शा पड़ाव से नहीं है.
नगर प्रशासन से नहीं मिल पा रहा है लाइसेंस
रिक्शा चालक बताते हैं कि नगर अधिकारी द्वारा लाइसेंस निर्गत नहीं किया जा रहा है. जबकि कई वर्षों से रिक्शा चालकों द्वारा लाइसेंस शुल्क जमा किया जाता रहा है. उस शुल्क के एवज में औपबंधिक रशीद दी जाती है. जबकि फोटो युक्त चालक का लाइसेंस निर्गत करने का कानून है.
जिल लोगों ने रिक्शा पड़ाव पर कब्जा किया है. उसके विरुद्ध कार्यवाही करते हुए रिक्शा पड़ाव को खाली कराया जायेगा. साथ ही जिन चालकों ने लाइसेंस के लिए शुल्क जमा किये हैं उसे टीन टिकट व औपबंधिक रशीद लाइसेंस के रूप में दी जायेगी.
बीके तरुण, कार्यपालक पदाधिकारी, नगर परिषद, बांका
